लादेन के दामाद चरमपंथ के मामले में दोषी

ओसामा के दामाद सुलेमान अबु गैथ इमेज कॉपीरइट Reuters

अमरीका में 9/11 के चरमपंथी हमले के बाद अल-क़ायदा के प्रवक्ता और ओसामा बिन लादेन के दामाद सुलेमान अबु गैथ को न्यूयॉर्क की एक अदालत ने चरमपंथ संबंधी मामले में दोषी पाया है.

अमरीकियों को मारने की साज़िश रचने और अल-क़ायदा की मदद के लिए सुलेमान को उम्रक़ैद की सज़ा हो सकती है.

कुवैत में मौलवी सुलेमान को बीते साल जॉर्डन में पकड़ने के बाद अमरीका लाया गया था.

सुलेमान, अल-क़ायदा के सबसे शीर्ष नेता हैं जिन पर चरमपंथी हमले के बाद अमरीका में मुक़दमा चलाया गया है.

जूरी ने उन्हें तीन मामलों में दोषी पाया है- पहला अमरीकियों की मारने की साज़िश, दूसरा अल-क़ायदा को समर्थन देने की साज़िश और तीसरा अल-क़ायदा को मदद पहुंचाना.

अदालत ने पांच घंटे चली बहस के बाद अपना फ़ैसला सुनाया है.

जूरी को कुछ ऐसे वीडियो दिखाए गए जिनमें सुलेमान अमरीकियों को धमका रहे हैं, लेकिन इस बारे में सुलेमान का कहना था कि उनकी भूमिका पूरी तरह से धार्मिक थी जिसका मक़सद तमाम मुसलमानों को उनका दमन करने वालों के ख़िलाफ़ खड़ा करना था.

आरोपों से इनकार

सुलेमान ने अपनी गवाही में कहा कि 9/11 के हमले की रात बिन लादेन ने ही उन्हें अल-क़ायदा का प्रवक्ता बनने के लिए कहा था.

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अदालत में अंतिम ज़िरह के दौरान असिस्टेंट यूएस एटॉर्नी जॉन क्रेनन ने ज़ोर दिया कि सुलेमान जो कह रहे हैं, वो 9/11 के बाद उनकी भूमिका के बारे में बताता है.

उन्होंने कहा, ''आरोपी ने अमरीकियों को मारने की अल-क़ायदा की साज़िश के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई और उन्होंने अन्य लोगों को भी इस साज़िश में शामिल किया.''

लेकिन सुलेमान ने अल-क़ायदा में लोगों की भर्ती करने में अपनी भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि बिन लादेन एक शेख़ थे और उनके इसी ओहदे का ध्यान रखते हुए हमले की रात वे ओसामा से एक गुफा में मिलने पर राज़ी हुए थे.

सुलेमान का बचाव कर रहे वक़ील ने दलील दी कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि सुलेमान को अल-क़ायदा की साज़िश के बारे में कोई जानकारी थी.

वहीं अदालत में सबको हैरान करते हुए सुलेमान ने अपने बचाव में ख़ुद गवाह की भूमिका निभाते इस आरोप से इनकार किया कि उन्होंने अल-क़ायदा के हमले में कोई मदद की थी और दावा किया कि वे इसके कभी औपचारिक सदस्य भी नहीं बने थे.

अमरीकी असैन्य अदालतों में चल रहे चरमपंथ संबंधों अन्य मुक़दमों की तरह इस मुक़दमें में जूरी के सदस्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

अल-क़ायदा के संस्थापक बिन लादेन को अमरीकी बलों ने मई 2011 में पाकिस्तान के ऐबटाबाद में मार दिया था.

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