मृत्युदंड के मामले बढ़े, चीन नंबर वन

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Image caption ईराक और इराक़ में मृत्युदंड के मामले तेज़ी से बढ़े हैं.

मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि दुनियाभर में मौत की सज़ा दिए जाने के मामलों में पिछले साल बढ़ोतरी हुई है.

संस्था के मुताबिक़ चीन इस मामले में अब भी पहले स्थान पर है लेकिन ईरान और इराक़ में मृत्युदंड के मामले बढ़े हैं.

ईरानी अधिकारियों ने 369 लोगों को मृत्युदंड देने की पुष्टि की है लेकिन एमनेस्टी का मानना है कि इससे कहीं अधिक संख्या में लोगों को गुप्त रूप से मौत की सज़ा दी गई.

एमनेस्टी का कहना है कि इराक़ में लगातार तीसरे साल मृत्युदंड के मामले बढ़े हैं जिनमें से अधिकांश लोगों को अस्पष्ट आतंकवाद विरोधी क़ानूनों के तहत दोषी पाया गया था.

एमनेस्टी की प्रवक्ता ओद्रे गौगरान (वैश्विक मामलों की निदेशक) ने कहा कि ईरान और इराक़ में मृत्युदंड के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं.

चिंताजनक बढ़ोतरी

उन्होंने कहा, "इस साल की रिपोर्ट से साफ़ है कि मृत्युदंड के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है. साल 2013 में उससे पिछले साल की तुलना में क़रीब 100 और लोगों को मौत की सज़ा दी गई. इसका कारण ईरान और इराक़ में मृत्युदंड के मामलों में हुई बढ़ोतरी है. यह चिंता का विषय है."

गौगरान ने कहा, "हमें उम्मीद है कि इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने और मृत्युदंड के मामले में अधिकारियों को चुनौती देने के कारण लोगों के पास अपने बचाव के ज़्यादा अधिकार होंगे, मौत की सज़ा में कमी आएगी और निश्चित तौर पर उनके अमल में और कमी आएगी."

उन्होंने कहा, "चीन में मृत्युदंड पाने वाले लोगों की संख्या बाक़ी सभी देशों में मौत की सज़ा पाने वाले लोगों की संयुक्त संख्या से ज़्यादा है. वहां हर साल हज़ारों लोगों को मौत की सज़ा दी जा रही है."

गौगरान ने कहा, "हम चाहते हैं कि पहले क़दम के तौर पर चीन ऐसे अपराधों की संख्या कम करे जिनमें मृत्युदंड का प्रावधान है. चीन जिस तरह से इसे अंजाम देता है वह अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत स्वीकार्य नहीं है. साथ ही देश में लोगों को अपने बचाव के लिए ज़्यादा अधिकार दिए जाने की ज़रूरत है."

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