अल-सीसी ने पद छोड़ा, लड़ेंगे राष्ट्रपति चुनाव

फ़ील्ड मार्शल अब्दुल फ़तह अल-सीसी ने मिस्र के सैन्य प्रमुख पद से इस्तीफ़ा देकर राष्ट्रपति चुनाव में खड़े होने की घोषणा की है.

उनके इस क़दम को बहुत पहले से ही तय माना जा रहा था. अल-सीसी ने कहा कि वह सरकारी टेलीविज़न पर अंतिम बार सैन्य वर्दी में दिख रहे हैं.

गत जुलाई में विपक्ष के व्यापक प्रदर्शन के बाद अल सीसी ने इस्लामी राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी का तख़्ता पलट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

संवाददाताओं का कहना है कि किसी मज़बूत प्रतिद्वंद्वी की ग़ैरमौजूदगी और उनकी लोकप्रियता को देखते हुए राष्ट्रपति चुनाव में उनके जीतने की संभावना ज़्यादा है.

59 वर्षीय पूर्व सैन्य प्रमुख अपने समर्थकों के लिए एक ऐसे रक्षक की तरह हैं जो मिस्र में साल 2011 से चल रहे राजनीतिक बवंडर का अंत कर सकता है.

साल 2011 में बड़े पैमाने पर हुए जन आंदोलन के कारण तीन दशकों से राज कर रहे होस्नी मुबारक के शासन का अंत हो गया था.

लेकिन उनके विरोधी अल सीसी को व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन का ज़िम्मेदार मानते हैं और उन्हें आशंका है कि वह फिर से देश में तानाशाही का दौर लौटाना चाहते हैं.

घोषणा

मिस्र के अंतरिम प्रशासन द्वारा 919 संदिग्ध इस्लामी चरमपंथियों पर मुक़दमा चलाने के आदेश के कुछ घंटों बाद ही अल सीसी ने राष्ट्रपति चुनाव में उतरने की घोषणा की है.

कुछ दिन पहले ही एक अन्य मामले में 528 लोगों को मौत की सज़ा दी गई है.

फ़ील्ड मार्शल ने अपने संबोधन में देश की अवाम से कहा कि उन्होंने पहली बार सैन्य वर्दी तब पहनी थी जब वो 15 वर्ष के रंगरूट थे. उन्होंने कहा कि वह जनता की भारी मांग पर इस चुनाव में उतरने जा रहे हैं.

उन्होंने साथ ही आगाह किया कि देशवासियों के सामने एक कठिन चुनौती है क्योंकि देश चरमपंथी ख़तरे समेत आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सुरक्षा के नाज़ुक दौर से गुजर रहा है.

उन्होंने कहा, ''यदि मुझे नेतृत्व करने का मौक़ा मिलता है तो मैं वादा करता हूं कि हम स्थिरता, सुरक्षा और मिस्र के लिए उम्मीद को हासिल कर सकते हैं.''

राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा रविवार को होने की संभावना है.

हालांकि मतदान की तिथि अभी तक घोषित नहीं है, लेकिन एक समाचारपत्र अल-अहराम ने अंतरिम राष्ट्रपति आदिल मंसूर के हवाले से कहा है कि मतदान 17 जुलाई को सम्पन्न हो जाएगा.

संभावना

वामपंथी नेता हमदीन सबाही राष्ट्रपति पद के एकमात्र दूसरे उम्मीदवार हैं जो चुनाव में उतरने की अपनी इच्छा जता चुके हैं. वो 2912 के चुनावों में तीसरे स्थान पर रहे थे.

संभावना है कि जनरल सेदकी सोबी अगले फ़ील्ड मार्शल होंगे.

यदि अब्दुल फतह अल सीसी राष्ट्रपति बन जाते हैं तो वह मिस्र के उन शासकों में शामिल हो जाएंगे जो सीधे सेना से आए थे.

एक संक्षिप्त कालखंड में इस्लामी राष्ट्रपति मोर्सी ही ग़ैर सैन्य पृष्ठभूमि से थे. मोर्सी ने अगस्त 2012 में अल सीसी को एक साथ फील्ड मार्शल और रक्षा मंत्री नियुक्त किया था.

लेकिन यह अल सीसी ही थे जिन्होंने एक वर्ष बाद ही मुस्लिम ब्रदरहुड की सरकार के ख़िलाफ़ शुरू हुए प्रदर्शन पर मोर्सी से जनता की भावनाओं के अनुरूप काम करने या सैन्य हस्तक्षेप के लिए तैयार रहने को कहा था.

जब मोर्सी ने इनकार किया तो सीसी ने संविधान को निलंबित कर दिया और अंतरिम सरकार की घोषणा कर दी.

अंतरिम सरकार के आने के बाद से अब तक 1,000 से भी ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और मोर्सी की पार्टी मुस्लिम ब्रदरहुड के हज़ारों सदस्य गिरफ़्तार किए जा चुके हैं.

मोर्सी समेत ब्रदरहुड के कई नेताओं पर मुक़दमा चलाया जा रहा है. अंतरिम सरकार ने मुस्लिम ब्रदरहुड को चरमपंथी संगठन घोषित किया है.

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