पोप और ओबामा की मुलाक़ात में भी छाया रहा क्राईमिया

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क्राईमियाई संकट को लेकर यूरोपीय यात्रा के तीसरे चरण में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा गुरुवार को पोप फ्रांसिस से पहली बार मिले.

नीदरलैंड और ब्रसेल्स में यूरोपीय देशों के नेताओं से तीन दिन की बातचीत के बाद वो रोम के लिए रवाना हो गए थे.

क्राईमिया के यूक्रेन से अलग होकर रूस में शामिल होने के बाद रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ गया है.

रूसी समर्थक फ़ौज यूक्रेन में मॉस्को समर्थित राष्ट्रपति विक्तर यानुकोविच के तख्तापलट के बाद से ही क्रीमिया के विभन्न महत्वपूर्ण स्थलों पर कब्ज़ा जमाना शुरू कर दिया है.

यूक्रेन के नौसैनिक अड्डे पर रूस का क़ब्ज़ा

बुधवार को ओबामा ने कहा कि यदि मॉस्को घुसपैठ को जारी रखता है तो अमरीका और यूरोपीय यूनियन और अधिक प्रतिबंध लगाएंगे.

इस महीने की शुरुआत में एक मतदान के बाद रूस समर्थक सुरक्षाबलों ने क्राईमियाई खाड़ी को यूक्रेन से अलग कर दिया था.

यूक्रेन और उसके सहयोगी पश्चिमी देशों ने इस मतदान को ग़ैरक़ानूनी बताया है.

अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा के उप सलाहकार बेन रोड्स ने कहा कि ओबामा पोप फ्रांसिस के प्रशंसक रहे हैं और दुनिया भर के लोगों में जिस तरह बराबरी और सहभागिता का संदेश उन्होंने दिया है, उससे भी राष्ट्रपति प्रभावित हैं.

रोड्स ने कहा कि ओबामा ने पोप के नेतृत्व के प्रति अपना सदिच्छा व्यक्त करने के लिए इस मुलाकात की योजना बनाई.

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मतभिन्नता

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रोम में बीबीसी संवाददाता एलन जॉन्सटन कहते हैं कि दोनों ही व्यक्ति गर्भपात, गर्भ निरोध और समलैंगिक विवाह जैसे मुद्दों पर बिल्कुल अलग विचार रखते हैं, लेकिन इस मुलाक़ात के दौरान उन्होंने अपने विचार साझा किए.

पोप से मिलने के बाद ओबामा इतालवी राष्ट्रपति जॉर्जियो नैपोलितानो से मिलने वाले हैं.

इसके बाद वो इतालवी प्रधानमंत्री मातियो रेंजी के साथ दोपहर के भोज में शामिल होंगे और एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करेंगे.

बुधवार को अमरीकी राष्ट्रपति ने यूरोपीय संघ के राष्ट्राध्यक्षों से बात की.

क्राईमिया के मसले पर वाशिंगटन और यूरोपीय संघ पहले ही रूस और यूक्रेन के कुछ लोगों पर लक्षित प्रतिबंध लगा दिए हैं.

ओबामा ने अपने एक संबोधन में कहा कि रूसी लोगों को जल्द यह पता चल जाएगा कि वे सुरक्षा, समृद्धि और सम्मान को बलपूर्वक हासिल नहीं कर सकते.

उन्होंने कहा, ''इसीलिए, इस पूरे संकट के दौरान, कूटनीति का विकल्प खुला रखते हुए, हमें दबाव की अपनी पर्याप्त क्षमता को संगठित करना होगा.''

उन्होंने कहा कि जब यूरोप और अमरीका एक साथ खड़े होंगे तभी दुनिया ज़्यादा सुरक्षित है.

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