क्राईमिया का जनमत संग्रह अवैध: संयुक्त राष्ट्र

  • 28 मार्च 2014
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संयुक्त राष्ट्र महासभा ने उस प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया है जिसमें रूस के समर्थन से क्राईमिया के जनमत संग्रह को अवैध ठहराया गया था.

इस जनमत संग्रह के परिणामस्वरूप क्राईमिया को रूस का हिस्सा बन जाना है.

संयुक्त राष्ट्र का ये अनुमोदन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा यूक्रेन को 14-18 अरब डॉलर के ऋण देने पर सहमत होने के बाद आया है.

अमरीकी संसद ने भी गुरुवार को यूक्रोन को एक अरब डॉलर की ऋण गारंटी देने संबंधी विधेयक को पारित कर दिया.

यूक्रेन के दक्षिणी प्रायद्वीप पर रूस समर्थित सैनिकों के कब्ज़े के बाद से ही रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है.

पश्चिमी देशों ने रूस के इस कदम की कड़े शब्दों में आलोचना की है. वहीं अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बुधवार को चेतावनी दी थी कि यदि रूस यूक्रेन में और ज्यादा कब्जे की कोशिश करता है तो यूरोपीय संघ और अमरीका उसके खिलाफ और कड़े प्रतिबंध लगा देंगे.

प्रस्ताव के विरोधी

संयुक्त राष्ट्र महासभा में 16 मार्च को क्राईमिया में हुए जनमत संग्रह को अवैध बताने संबंधी प्रस्ताव के पक्ष में सौ देशों ने मतदान किया. ग्यारह देशों ने प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया जबकि 58 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

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Image caption क्राइमिया के नौसैनिक

यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्रिय देश्चित्सिया ने मतदान के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा, "ये समर्थन दुनिया के हर कोने से आया है और ये साबित करता है कि ये महज़ एक क्षेत्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मसला है."

लेकिन संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत विटेली चुरकिन का कहना था, "संयुक्त राष्ट्र महासभा के करीब आधे सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया ये काफी उत्साहजनक बात है और मेरा मानना है कि ये विचार दिन प्रतिदिन और मज़बूत होगा."

न्यूयॉर्क में मौजूद बीबीसी संवाददाता निक ब्रायंट का कहना है कि ये प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं था इसलिए इसके लिए हुआ मतदान काफी हद तक प्रतीकात्मक था.

लेकिन यूक्रेन ने उम्मीद जताई है कि इस प्रस्ताव से रूस पर लगने वाले प्रतिबंध में कमी आएगी.

दिवालिया

इससे पहले यूक्रेन के अंतरिम प्रधानमंत्री अरसेनी यात्सेन्युक ने संसद में कहा था कि देश इस समय आर्थिक और वित्तीय दिवालिए के कगार पर है.

इस बीच यूक्रेन की पूर्व प्रधानमंत्री यूलिया टिमोशेंको ने कहा कि वो आगामी 25 मई को संभावित राष्ट्रपति चुनाव में अपनी दावेदारी पेश करेंगी.

दो बार यूक्रेन की प्रधानमंत्री रह चुकीं टिमोशेंको साल 2010 में भी राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ चुकी हैं.

भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें तीन साल तक जेल में रहना पड़ा था और इसी साल फरवरी में उन्हें तब रिहा किया गया जब रूसी समर्थक राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को सत्ता छोड़नी पड़ी थी.

इस दौरान यूक्रेन में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

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