गैस आयातक से निर्यातक कैसे बना अमरीका?

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प्राकृतिक गैस के मामले में रूस के एकाधिकार को तोड़ने के लिए अमरीका में गैस उत्पादन बढ़ाने की मांग होती रही है.

कुछ साल पहले तक लोगों के लिए यह असंभव सा दिखता रहा होगा, लेकिन हाल के दिनों में अमरीका के ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव आया है.

ऊर्जा के क्षेत्र में कभी सबसे बड़ा आयातक देश रहा अमरीका अब बाकी दुनिया को निर्यात करने की ओर अग्रसर है.

देश में गैस का उत्पादन तेज़ी से बढ़ा है. नतीजन अब वो निर्यात में भी तेज़ी लाने की कोशिश कर रहा है.

कुछ लोग कहते हैं कि इस क़दम से अमरीका केवल इस क्षेत्र का दबंग खिलाड़ी ही नहीं बन जाएगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को भी हिलाकर रख देगा.

लेकिन यह उतना आसान नहीं है, जितना कहा जा रहा है.

बाधाएं

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Image caption अनुमान के मुताबिक, अमरीका में दस हज़ार ख़रब घन फुट प्राकृतिक गैस का भंडार है.

मौजूदा क़ानूनों के तहत गैस निर्यात करने वाली कंपनियों को उन देशों से विशेष अनुमति की ज़रूरत होती है, जिन्होंने अमरीका के साथ मुक्त व्यापार समझौता नहीं किया है.

हालांकि अमरीका के ऊर्जा विभाग ने अभी तक सात कंपनियों को निर्यात की मंज़ूरी दी है, लेकिन इनमें से कई को अब भी संघीय ऊर्जा नियामक आयोग से हरी झंडी का इंतज़ार है.

सबसे बड़ी बाधा है कि इन कंपनियों को अब भी बड़े पैमाने पर ऐसे संयंत्र स्थापित करने की ज़रूरत है जो गैस निर्यात को आसान बनाए.

इस तरह की आधारभूत संरचनाओं को बनाने में एक लंबा समय लगता है और साल 2015 तक ही इनके तैयार होने का अनुमान लगाया जा रहा है.

इनमें से ज़्यादातर तो 2017 से 2019 के बीच ही संचालन के लिए तैयार हो पाएंगी.

डेलॉइट मार्केटप्वाइंट परामर्शदाता कंपनी से जुड़े टॉम शोय का कहना है, ''इस तरह के टर्मिनल बनाने में तब चार वर्ष लगेंगे जब सभी काग़जी कार्रवाई पूरी हों.''

कम होंगे गैस के दाम?

इन सब के बावज़ूद, एक मामले में अमरीका को बढ़त हासिल है, वो है गैस के दाम.

अमरीका में गैस के दाम चार डॉलर (क़रीब 240 रुपये) प्रति एमबीटीयू के आस पास ही रहे हैं जो कि यूरोप और एशिया की अपेक्षा बहुत कम है.

दामों में अंतर का सबसे बड़ा कारण ये है कि यूरोपीय और एशियाई देशों को आपूर्ति करने वाली कंपनियां गैस के दाम को तेल के दामों के साथ जोड़ देती हैं, जिससे अमरीका की अपेक्षा दाम में तीन या चार गुना तक बढ़ोतरी हो जाती है.

विश्लेषकों का कहना है कि यदि अमरीका ने गैस का निर्यात करना शुरू किया तो वैश्विक गैस कीमतों में भारी गिरावट आएगी.

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Image caption प्राकृतिक गैस निर्यात के क्षेत्र में रूस को चुनौती देने में अमरीका को अभी लगेगा समय.

जिन सात परियोजनाओं को मंज़ूरी मिली है उससे अमरीकी ऊर्जा विभाग की निर्यात क्षमता 10 अरब घन फुट गैस प्रति दिन हो जाएगी.

डेलॉइट के मुताबिक गैस की यह मात्रा जर्मनी की कुल प्राकृतिक गैस ज़रूरतों के बराबर है.

ऊर्जा विभाग के पास 24 और टर्मिनल बनाने के प्रस्ताव मंजूरी के लिए आए हुए हैं, जिनकी गैस निर्यात करने की क्षमता 25 अरब घन है.

यूक्रेन में बदलते घटनाक्रम के बीच अमरीका में निर्यात पाबंदियों को कम करने की मांग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है.

'रूस पर अंकुश की कोशिश'

कुछ लोगों का मत है कि अमरीका का प्राकृतिक गैस भंडार इस क्षेत्र में रूस के एकाधिकार को चुनौती दे सकता है और इस इलाके में उसके राजनीतिक प्रभाव को कम कर सकता है.

एक अनुमान है कि अमरीका के इस क्षेत्र में उतरने के बाद अगले पांच सालों में रूस के राजस्व में 30 प्रतिशत की कमी आ जाएगी और लंबे अंतराल में इसके 60 प्रतिशत तक गिरने की संभावना है.

हालांकि फ़िलहाल तो रूस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने जा रहा है. एक शोध फर्म एडवांस रिसोर्स इंटरनेशनल के अनुसार, अमरीका के पास तकनीकी रूप से रूपांतरण योग्य शैल गैस भंडार 10,000 खरब घन फीट है.

अधिकांश लोगों का अनुमान है कि अमरीका में आने वाले कई दशकों तक आपूर्ति कर सकने लायक गैस भंडार है.

सवाल सिर्फ यह है कि यह कितनी तेज़ी से होता है.

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