ख़त्म नहीं हो रहा बोस्निया की औरतों का इंतज़ार

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बोस्निया का नाम वहां बहने वाली बोसना नदी के नाम पड़ा है. यह नदी उत्तर की तरफ बहती हुई ज़ेनिका शहर के बीचोंबीच गुजरती है.

नदी के किनारों पर स्थित स्टील के विशाल कारखानों की चिमनियों से निकलने वाला काला धुंआ आसपास की घाटी में फैला रहता है.

ऐसी ही एक कारखाने के सामने महिला शरणार्थियों के लिए बने शिविर में रहने वाली लैला अपनी आपबीती सुनाती हैं.

वह कहती हैं, "उस वक़्त मैं 14 साल थी और अपनी दादी के साथ रहती थी."

उन्होंने कहा, "मुझे ज़बरदस्ती पकड़ कर जेल में डाल दिया गया. वहां मैंने तीन साल गुजारे. हमसे ज़बरन शारीरिक श्रम करवाया जाता था. कुछ दिन के बाद मुझे और तीन अन्य महिलाओं को बाक़ी क़ैदियों से अलग कर दिया गया. हमें एक घर में ले जाया गया."

लैला ने कहा, "सैनिक शराब पीते थे और हमारे साथ ग़ुलामों जैसा व्यवहार करते थे. शराब के नशे में धुत्त सैनिक हमारा बलात्कार करते."

चुप रहना ही बेहतर

बोस्निया युद्ध के दौरान लैला जैसी यौन यातनाएं झेलने वाली महिलाओं की अनुमानित संख्या 20,000 से 50,000 तक है.

असली संख्या का शायद ही कभी पता चले क्योंकि कई महिलाओं ने चुप रहना ही बेहतर समझा है. उन्हें डर है कि अगर उन्होंने मुंह खोला तो उन्हें सामाजिक तिरष्कार का सामना करना पड़ सकता है.

वीमंस इंटरनेशनल लीग फ़ॉर पीस एंड फ्रीडम की नेला पोरोबिच का मानना है कि समय बीतने के साथ बोस्निया युद्ध में यातनाएं सहने वाली महिलाओं के लिए अपने अतीत के बारे में बात करना आसान नहीं.

उन्होंने कहा, "यौन हिंसा की शिकार महिलाओं और उनके साथ काम कर रहे पेशेवर लोगों से भी बात करने पर हमें पता चला कि युद्ध के दौरान या उसके ख़त्म होने के तुरंत बाद यौन हिंसा के बारे में बात करना जितना आसान था उतना आज 20 साल बाद नहीं है."

उन्होंने कहा, "इतने सालों में समाज बहुत आगे निकल गया है. वो इन पुरानी बातों को याद नहीं करना चाहता लेकिन इन महिलाओं के लिए अपने अतीत को भूलना आसान नहीं है."

शोधकर्ताओं का मानना है कि बोस्निया युद्ध के दौरान वर्ष 1992 से 1995 तक लोगों के ऊपर कई तरह के अत्याचार हुए. नस्ली जनसंहार और यंत्रणा जैसे घिनौने अपराधों के सामने यौन उत्पीडन को कमतर माना गया.

राह में कई रोड़े

अपने लिए न्याय की मांग करने वाले लोगों की राह में कई रोड़े हैं.

अदालतें पहले ही युद्ध अपराध से जुड़े 1300 मामलों को निपटाने की कोशिश में जुटी हैं. केवल संगीन मामलों और उच्च अधिकारियों की संलिप्तता वाले मामलों को वरीयता दी जा रही है. इन अदालतों में गवाहों के पूरी सुरक्षा दी जाती है और उनका नाम गुप्त रखा जाता है.

सैनिकों द्वारा किए गए बलात्कार के मामलों को निचली अदालतों में भेज दिया जाता हैं जहां गवाहों के लिए किसी प्रकार की सुरक्षा का कोई प्रावधान नहीं होता और पीड़ितों को अभियुक्तों के सामने ही सबूत देने को कहा जा सकता है.

बोस्निया युद्ध के दौरान हुए यौन हिंसा की घटनाओं में अब तक 70 से भी कम मामलों में ही मुक़दमा चलाया गया है.

महिलाओं के लिए चलाई जा रही परियोजना मेडिका ज़ेनिका की निदेशक साबिहा हुसिक ने कहा, "बलात्कार पीड़ित महसूस करती हैं कि उनकी बातों पर कोई विश्वास नहीं करता."

बोस्निया युद्ध के दौरान महिलाओं को भी नहीं बल्कि पुरूषों को भी यौन अत्याचार का सामना करना पड़ा. ऐसा उन्हें बेइज़्जत करने के लिए किया जाता था.

बेहोश होने तक मारा

बोस्निया की सेना के पूर्व सैनिक ज़िनिया अपनी आपबीती बताते हुए कांप उठते हैं.

ज़िनिया ने कहा, "सेना पुलिस के लोग मुझे उठाकर तहख़ाने में ले गए. वहां उन्होंने मुझे बेहोश होने तक मारा."

उन्होंने कहा, "थोड़ी देर बाद जब मुझे होश आया तो एक अधिकारी ने तेज धार के औज़ार से मेरे कपड़े फाड़ दिए. उसके बाद उसने उस औज़ार को मेरे गुप्तांगों में घुसा दिया. उन्होंने सोचा कि खून बहने से मैं मर जाऊंगा."

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उन्होंने कहा, "अगर आप अपना हाथ या पैर खो देते हैं तो आप इसे देख सकते हैं लेकिन जब आपकी आत्मा कराह रही हो तो यह दिखती नहीं है. मैं भले बाहर से चट्टान की तरह मज़बूत दिख रहा हूं लेकिन मैं अंदर से खोखला हूं."

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग और हॉलिवुड अभिनेत्री तथा संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थियों से संबंधित संस्था यूएनएचआरसी की विशेष राजदूत एंजेलीना जोली युद्ध के दौरान होने वाली यौन हिंसा के मुद्दे पर जून में लंदन में होने वाले एक सम्मेलन को संबोधित करेंगी.

बोस्निया पर फ़िल्म

दो साल पहले बोस्निया युद्ध पर आधारित जोली की एक फ़िल्म आई थी 'द लैंड ऑफ़ ब्लड एंड हनी'. इस फ़िल्म को देखने के बाद जोली की इस मुहिम में हेग भी शामिल हो गए. वे पिछले हफ़्ते बोस्निया दौरे पर गए और उन्होंने लोगों से वादा किया कि उनकी आवाज़ को जून अधिवेशन में दुनिया के सामने लेकर लाएंगे.

हो सकता है कि भविष्य में सबूत जुटाऩे के बेहतर साधनों से अधिक से अधिक लोगों पर मुक़दमा चलाया जाए लेकिन अधिकतर पीड़ितों का मानना है कि अब बहुत देर हो चुकी है.

यौन शोषण की पीड़िता एड़िना कहती हैं, "मेरा यौन शोषण करने वाले लोग अब भी क़ानून के हाथों से दूर हैं. उनमें से बहुत लोगों के प्रोफ़ाइल को मैंने फ़ेसबुक पर देखा है और वो स्वच्छंद घूमते हैं."

एड़िना का कहना है कि उन्हें बोस्निया सरकार के प्रति ग़ुस्सा है. उन्होंने कहा, " अपराधियों को पकड़ने और उन पर क़ानूनी कार्यवाही करने का काम इतना धीमे चल रहा है. 20 साल में बहुत सारी औरतें न्याय पाने का इंतज़ार करती हुई मर गई."

उन्होंने कहा, "वे लंबे समय तक न्याय पाने का इंतज़ार नहीं कर पाईं."

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