सीआईए के 'तौर-तरीक़ों' की रिपोर्ट सार्वजनिक होगी

  • 4 अप्रैल 2014
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इंटेलिजेंस मामलों की अमरीकी सीनेट की एक समिति ने संदिग्ध चरमपंथियों से पूछताछ के दौरान बर्बर तरीके अख़्तियार करने के संबंध में अपनी जांच रिपोर्ट को गोपनीय सूची से हटाने के पक्ष में मतदान किया है.

जांच रिपोर्ट के लीक हुए हिस्से में कहा गया है कि पूर्व राष्ट्रपति डब्ल्यू जॉर्ज बुश के शासनकाल में अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने अपने पूछताछ के तरीक़ों के बारे में सराकार को बार-बार ग़ुमराह किया.

सीआईए ने जांच रिपोर्ट के कुछ नतीज़ों पर आपत्ति जताई है और कहा है कि रिपोर्ट में ग़लतियां हैं.

समिति की अध्यक्ष डायनी फ़ीस्टीन ने कहा है कि गोपनीय सूची से जांच रिपोर्ट को हटाए जाने का प्रस्ताव तीन के मुक़ाबले 11 मतों से पास हो गया है.

उन्होंने जांच के नतीज़ों को ''हतप्रभ'' कर देने वाला बताया है.

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'गंभीर ख़ामियां'

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कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी के इस सीनेटर ने कहा, ''जांच रिपोर्ट ने ऐसी बर्बरता को उजागर किया है जो राष्ट्र के रूप में हमारे मूल्यों से बिल्कुल विपरीत है. यह ऐसा नहीं है जिसके अमरीकी अभ्यस्त हैं.''

यह जांच रिपोर्ट पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के शासनकाल में सीआईए की कार्रवाईयों से संबंधित है.

संवाददाताओं के अनुसार मतविभाजन के दौरान समिति के रिपब्लिकन सदस्यों ने रिपोर्ट को गोपनीय सूची से बाहर करने के पक्ष में डेमोक्रेट सदस्यों के साथ मतदान किया था और यह स्पष्ट है कि समिति के अंदर इस मुद्दे पर तीखा विभाजन था.

जार्जिया के रिपब्लिकन सीनेटर सैक्सबी शैम्ब्लिस ने कहा कि हालांकि उन्होंने पक्ष में मतदान किया लेकिन यह समय की बर्बादी ही थी.

फ़ीस्टीन द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि रिपोर्ट में सीआईए के गोपनीय हिरासत और पूछताछ कार्यक्रम के प्रबंधन में ''गंभीर ख़ामियां'' उजागर हुई हैं, जिसके तहत 100 से भी ज्यादा बंदी आते हैं.

बयान के अनुसार, ''यह भी बहुत सदमे जैसा है और दिखाता है कि एक लोकतांत्रिक देश में ख़ुफ़िया एजेंसी की निगरानी क्यों बहुत महत्वपूर्ण है.''

''इस रिपोर्ट के संक्षिप्त विवरण और निष्कर्ष को जल्द ही जारी किया जाना दिखाता है कि यह राष्ट्र भारी से भारी ग़लतियों को स्वीकार करता है और इनसे सबक़ लेने की ज़रूरत महसूस करता है.''

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सार्वजनिक होगी रिपोर्ट

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रिपोर्ट के अनुसार ''अब यह पर्याप्त रुप से स्पष्ट है कि 9/11 जैसे चरमपंथी हमले भविष्य में न हों इसे रोकने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सज़ा दिलाने के प्रयास में सीआईए ने जो गंभीर ग़लतियां की हैं वो हमें आज तक साल रही हैं.''

बयान में कहा गया है कि 6200 पन्नों की रिपोर्ट, जिसे बनाने में पांच साल लगे, को सुधारा जा रहा है और बाद में इसे गोपनीय सूची से बाहर कर दिया जाएगा.

इसमें कहा गया है कि सूची से बाहर करने और इसे सार्वजनिक करने के लिए 500 पन्नों वाले इस संक्षिप्त विवरण, साक्ष्य और नतीज़ों को राष्ट्रपति बराक ओबामा को भेजा जाएगा.

मंगलवार को वॉशिंगटन पोस्ट में लीक हुई रिपोर्ट में कहा गया है कि बंदियों से पूछताछ के लिए सीआईए ने गोपनीय जगहों पर ऐसे तरीक़ों का इस्तेमाल किया जो मान्य नहीं थे.

कैदियों से पूछताछ के इन तरीकों में बर्फीले पानी में संदिग्धों को डुबाकर रखना और कैदियों का सिर दीवार पर मारना शामिल है.

अधिकारियों का कहना है कि सीआईए के जांच कार्यक्रम से बहुत ही मामूली ख़ुफ़िया जानकारी हासिल हो सकी और अल-क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन को तलाशने में कोई मददगार साबित नहीं हुई.

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