अफ़ग़ानिस्तान: राष्ट्रपति चुनाव में रिकॉर्ड मतदान

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अफ़ग़ानिस्तान के चुनाव आयोग के मुताबिक़ देश के एक करोड़ 20 लाख मतदाताओं में से 70 लाख ने शनिवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए हुए मतदान में हिस्सा लिया.

देश के इतिहास यह पहला चुनाव है जिसमें लोकतांत्रिक प्रक्रिया के ज़रिए सत्ता का हस्तांतरण हो रहा है. भारी बारिश और सुरक्षा चिंताओँ के बावजूद लोगों ने बढ़चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया.

चुनाव आयोग के सचिव ज़िया उल हक़ अमरखेल ने कहा कि मतदान शाम पाँच बजे समाप्त हुआ और तब तक 70 लाख लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके थे.

तालिबान ने इन चुनावों में गड़बड़ी फैलाने की धमकी दी थी और उसे ऐसा करने से रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया.

(अफ़ग़ानिस्तान में भारी मतदान)

हामिद करज़ई का उत्तराधिकारी बनने के लिए कुल आठ प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. करज़ई दो बार राष्ट्रपति बन चुके हैं और संवैधानिक बाध्यता की वजह से तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते हैं.

राजधानी काबुल में सुबह से ही बारिश हो रही थी लेकिन बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक़ ख़ासतौर पर युवा मतदाताओं ने विपरीत परिस्थितियों और सुरक्षा चिंताओं की परवाह किए बग़ैर बढ़चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया.

मतदान के समय एक घंटे बढ़ाया गया ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें.

महिलाओं की भागीदारी

कई महिलाओं ने भी मतदान में हिस्सा लिया. हालांकि उनकी संख्या पुरुषों के बराबर नहीं थी.

काबुल में एक घरेलू महिला लैला नियाज़ी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "मैं तालिबान की धमकी से डरने वाली नहीं हूं. आख़िर एक न एक दिन तो हमें मरना ही है. मैं चाहता हूं कि मेरा वोट तालिबान के चेहरे पर एक थप्पड़ की तरह पड़े."

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लेकिन जब मतदान अंतिम चरण में पहुँचा तो देशभर से बीबीसी के संवाददाताओं को रिपोर्ट मिली कि कई मतदान केन्द्रों में मतपत्र समाप्त हो गए थे.

देश के दक्षिण-पूर्व प्रांत निमरोज़ के अब्दुल अहद ने कहा कि वो और उनके परिवार के 15 सदस्य अपने ज़िले के हर मतदान केन्द्र में गए लेकिन उन्हें सबमें मतपत्र ख़त्म हो गए थे.

(अफ़ग़ान चुनाव: प्रमुख उम्मीदवार और मुद्दे)

काबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता डेविड लॉयन के बताया कि मतदान को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए व्यापक सैन्य अभियान चलाया गया जो कि साल 2001 में तालिबान के पतन के बाद सबसे बड़ा अभियान था.

चुनाव ड्यूटी

अफ़ग़ानिस्तान में पुलिस और सेना के सभी चार लाख जवानों को चुनाव ड्यूटी पर लगाया गया था.

काबुल में शुक्रवार दोपहर से ही वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी और शहर मे प्रवेश के हर रास्ते पर पुलिस की नाकेबंदी थी.

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हमारे संवाददाताओं के मुताबिक़ राजधानी में कई स्थानों पर मतदान शुरू होने से एक घंटे पहले से लोग कतारों में लग गए थे और वहां उत्सव जैसा माहौल था.

(अफ़ग़ान सियासत के महिला चेहरे)

उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद बीबीसी संवाददाता कैरन एलन ने बताया कि वहां मतदान केन्द्रों के बाहर मतदाताओं की कतारें लगी थीं और लोग मतदान के लिए अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे. एक युवा मतदाता ने बताया कि उसके पिता हिंसा की आशंका के कारण उसे मतदान करने से मना कर रहे थे लेकिन उसने इसकी परवाह नहीं की.

लेकिन पश्चिमी प्रांत हेरात और काबुल के उत्तर पूर्व में स्थित कपीसा में ख़राब मौसम और सुरक्षा कारणों से कुछ मतदान केन्द्र बंद रहे.

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