समस्याओं के भंवर में शेल गैस इंडस्ट्री

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जब शेल ऑयल और गैस के दम पर अमरीका में ईंधन की क़ीमतें लुढ़कीं तो दुनिया के बाक़ी देशों ने इस घटना को हैरानी भरे नज़रिए से देखा.

महज़ चार वर्ष पहले ही यूरोप में प्राकृतिक गैस की क़ीमतें मुश्किल से अमरीका के मुक़ाबले महंगी थीं. आज ये क़ीमतें तीन गुना ऊंची हैं, जबकि जापान में पांच गुना तक ऊंची हैं.

इससे समझा जा सकता है कि दुनिया के तमाम देश इस ओर बेसब्री से क़दम उठाना चाहते हैं.

ब्रिटेन से लेकर पोलैंड, चीन और अर्जेंटीना की सरकारें सस्ते ईंधन और ईंधन सुरक्षा की तलाश में हैं. कई देश अब इस निर्णय पर पहुंच गए हैं कि इसका जवाब शैल ही है.

लेकिन क्या अमरीका में शेल गैस की क्रांति को दुनिया के बाक़ी हिस्से में वाक़ई दुहराया जा सकेगा?

पोलैंड यूरोपीय शेल गैस का प्रतिनिधि हीरो रहा है लेकिन, औद्योगिक सूचनाएं देने वाले प्लैट्स के प्रबंध सपादक स्टुअर्ट इलियट का कहना है, ''पोलिश प्रयोग असफल होता जा रहा है.''

असफल प्रयोग

बड़े पैमाने पर उपलब्ध स्रोत के लालच में और उत्पादन के लिए इच्छुक सरकार की वजह से अमरीका की बड़ी ऊर्जा कंपनियां अपने घरेलू सफलता को दोहराने विदेशों में पहुंचीं.

2013 के लिए 40 में से 30 कुओं से उत्पादन की योजना बनाई गई थी. लेकिन, इस समय केवल एक कुएं से ही इतना उत्पादन हो पा रहा है जो आर्थिक रूप से अपने आप में सक्षम है.

एक्सॉन मोबिल, टेलिसमैन और मैराथन जैसी कंपनियां इन क्षेत्रों से हट गईं जबकि शेवरान, कोनोको फिलिप्स और सैन लियोन अभी भी मैदान में डटी हुई हैं.

इसके लिए सरकारों के लालचीपन को ज़िम्मेदार ठहराया गया.

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लेकिन एक्सॉन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रेक्स टिलर्सन ने कहा कि जो तकनीक अमरीका में सफल रही वो पोलिश भूगर्भीय संरचना के लिए नाकाम साबित हुई.

ब्रिटेन सरकार को भी शैल के लिए काफ़ी उम्मीदें थीं. लेकिन, चार वर्षों में केवल कुछ गिने चुने कुएं ही खोदे जा सके.

अमरीका में ऐसे 100 कुएं खोदे गए तब जाकर उद्योग को लगा कि शेल गैस उत्पादन व्यवहारिक है.

काम में रुकावट की मुख्य वजह भूकंप के ख़तरे की आशंका से ड्रिंलिंग का जनता द्वारा विरोध किया जाना है.

बढ़ता विरोध

भूगर्भीय जल के प्रदूषित होने, भूकंपन और ग्रामीण आबादी की बर्बादी की आशंकाएं जनता के ज़ेहन में चढ़ गई हैं.

थिंक टैंक शेथम हाऊस से जुड़े शोधार्थी प्रोफ़ेसर पौल स्टीवेन्स कहते हैं, ''ये चिंताएं वाजिब हैं. हम प्रदूषित जल का क्या करें, भूगर्भीय जल में भारी धातु और रेडियोधर्मी तत्व होते हैं.''

''सबसे बड़ी समस्या आसानी से रिसने वाली मीथेन गैस की है, जिसके बारे में हम साधारणतया नहीं जानते कि वहां कितना रिसाव है.''

और यह विरोध केवल ब्रिटेन तक ही सीमित नहीं है. पूरी दुनिया में इसका विरोध शुरु हो चुका है. पिछले साल 20 से ज़्यादा देशों के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया था.

फ्रांस ने तो अपने यहां ड्रिंलिंग को प्रतिबंधित कर दिया है जबकि जर्मनी, रोमानिया और बुल्गारिया में इसे स्थगित कर दिया गया है.

आधारभूत शोध

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शेल गैस की राह में सबसे बड़ी रुकावट यूरोप में विरोध का स्वर है क्योंकि यहां अमरीका की तुलना में अधिक घनी आबादी है और लोग तेल एवं गैस निकालने की गतिविधियों से वे ज़्यादा परिचित हैं.

इसके अलावा यूरोप में पर्यावरण से संबंधित क़ानून भी कड़े हैं.

अमरीका और इसके बाहर शेल गैस उत्पादन के लिए शोध पर बहुत मामूली सरकारी निवेश रहा है.

अमरीकी सरकार ने 1980 के दशक में मूलभूत वैज्ञानिक शोध पर लाखों डॉलर ख़र्च किए जबकि यूरोपीय आयोग चाहता है कि इस उद्योग को शोध और विकास में ख़ुद निवेश करना चाहिए.

अमरीकी शेल गैस उद्योग का विकास रातों रात नहीं हो गया, इसे इस स्थिति में पहुंचने में 25 वर्ष लगे हैं.

प्रोफ़ेसर स्टीवेन्स का कहना है कि संपत्ति का अधिकार एक प्रमुख अड़चन है. अमरीका में जिस ज़मीन के नीचे खनिज होता है वो जमीन के मालिक का होता है और वो एक तय क़ीमत पर अपनी जमीन ऊर्जा कंपनी को सौंप देते हैं. जबकि यूरोप में खनिज पर राज्य का अधिकार होता है और कोई भी बिना लड़े अपनी ज़मीन को किसी कंपनी के हवाले नहीं करना चाहता.

इसके अलावा ज़्यादातर देशों में भूगर्भीय सरंचना के अनुकूल होने और आधारभूत संरचनाओं की कमी होने का भी सवाल है.

यह स्पष्ट है कि अमरीका के बाहर शेल गैस उद्योग के लिए भारी रुकावट है.

शेल गैस का ऊर्जा क़ीमतों पर यूरोप में पड़ने वाला असर भी एक कारक है, क्योंकि पूरे महाद्वीप के बाज़ार में एकीकृत क़ीमतें ही प्रभावी होती हैं.

पावरी के एक अनुमान के अनुसार, 2020 से 2050 तक गैस की क़ीमतें छह से 14 प्रतिशत तक कम हो सकती हैं जबकि इसी दौरान बिजली क़ीमतें तीन से आठ प्रतिशत सस्ती हो सकती हैं.

महत्वाकांक्षी लक्ष्य

एक देश जहां शेल का उज्जवल भविष्य दिखाई देता है, वो है चीन.

इलियट का कहना है कि गैस की मांग में तेज़ी से वृद्धि होनी है और वे शैल पर अरबों डॉलर ख़र्च करने के लिए तैयार भी है.

2020 तक वर्तमान में अमरीकी शेल गैस के उत्पादन का एक तिहाई उत्पादन हासिल करना सरकार की योजना है.

विशेषज्ञों की राय है कि चीन के पास वो सारी चीज़ें हैं जो शेल के विकास के लिए उपयुक्त हैं, सस्ता श्रम बाज़ार, बहुत कम क़ानूनी बाधाएं, न के बराबर विरोध और उपयुक्त भूगर्भीय संरचनाएं.

हालांकि चीन के लिए यह आसान नहीं है. जहां अमरीका में हज़ारों शैल कुएं हैं, वहीं, दुनिया भर में कुछ गिने चुने ही शैल कुएं हैं, जहां व्यावसायिक पैमाने पर उत्पादन हो रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रचुर शेल गैस उत्पादन में अभी 20 वर्ष तक लग सकते हैं.

जो सरकारें शेल को ऊर्जा क़ीमतों को कम करने के लिए शार्टकट रास्ते के रूप में देख रही हैं, तो यह उनकी यथार्थवादी सोच नहीं हो सकती है.

शेल ऐसा रक्षक नहीं है, जैसा अधिकांश लोग सोचते हैं.

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