नवाज़ शरीफ़ और ज़रदारी की बैठक में 'एकजुटता का संदेश'

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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और पूर्व राष्ट्रपति और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सह-अध्यक्ष आसिफ़ अली ज़रदारी के बीच बैठक हुई, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था और क़ानूनों पर चर्चा की गई.

सरकारी मीडिया के अनुसार दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत ख़त्म हो गई है और अब दोनों नेताओं की अलग से बातचीत चल रही है.

इससे पहले प्रतिनिधिमंडल स्तर पर बातचीत के दौरान पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की ओर से राष्ट्रीय संसद में विपक्ष के नेता खुर्शीद शाह, सांसद रजा रब्बानी और मुराद अली शाह शामिल थे.

सरकार की ओर से वित्त मंत्री इस्हाक़ डार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ज़ाहिद हामिद और फ़व्वाद हसन शामिल थे.

सरकारी मीडिया के अनुसार इस बैठक में पाकिस्तान सुरक्षा अध्यादेश सहित कराची ऑपरेशन, देश में शांति और चरमपंथ पर चर्चा हुई.

एकजुटता का संदेश

इस बैठक से पहले बीबीसी से बातचीत के दौरान पूर्व राष्ट्रपति के प्रवक्ता फ़रहत अल्लाह बाबर ने बताया कि ज़रदारी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से मुलाक़ात करेंगे. उनका कहना था कि हालांकि इस तरह की बैठकों का कोई एजेंडा नहीं होता लेकिन उनसे जो संदेश जाता है वह महत्वपूर्ण है.

उनका कहना था कि वर्तमान संदर्भ में जब ऐसी बातें हो रही हैं कि नागरिकों और लोकतांत्रिक सरकार को कुछ पक्षों से ख़तरा है, तो इस तरह के वातावरण में आसिफ़ अली ज़रदारी और प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की मुलाकात एक स्पष्ट संदेश देती है कि गैर-लोकतांत्रिक ताक़तों के ख़िलाफ़ राजनीतिक दल एकजुट हैं.

उन्होंने कहा, "याद रहे कि पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ देशद्रोह के मामले में सेना की चिंता और सेनाध्यक्ष के बयान अपनी जगह हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण मंत्रियों के बयानों से ये धारणा बनी है कि सेना और सरकार के बीच आंतरिक असंतोष लोकतांत्रिक सरकार के लिए ख़तरा बन रहा है.

ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि तालिबान से वार्ता और अब पाकिस्तान सुरक्षा अध्यादेश के निचले सदन से पारित हो जाने पर सरकार से नाराज़ के बावजूद विपक्षी दल पीपीपी एक बार फिर नवाज़ शरीफ़ सरकार के समर्थन में आवाज़ बुलंद करेगी.

आसिफ़ अली ज़रदारी की प्रधानमंत्री से मुलाक़ात भी इसी सिलसिले की एक कड़ी है, लेकिन पाकिस्तान सुरक्षा अध्यादेश पारित करने के लिए सरकार की आपाधापी से न केवल पीपुल्स पार्टी और दूसरे विपक्षी दल बल्कि गठबंधन सरकार में शामिल फजलुर्रहमान भी नवाज़ शरीफ़ की सरकार से नाराज़ हैं.

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