'चरमपंथी' राजदूतों को रोकेगा अमरीकी क़ानून

  • 19 अप्रैल 2014
हामिद अबूतालेब इमेज कॉपीरइट Reuters

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक ऐसे क़ानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जिसके तहत संयुक्त राष्ट्र के किसी भी ऐसे राजदूत के देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लग जाएगा जिसके चरमपंथी कार्रवाई में शामिल होने का संदेह है.

यह क़ानून ऐसे समय आया है जब ईरान ने एक ऐसे व्यक्ति को संयुक्त राष्ट्र का राजदूत बनाया है जिस पर साल 1979 में अमरीकी दूतावास पर कब्ज़ा करने वाले चरमपंथी छात्रों से संबंध होने का संदेह है.

हालांकि अमरीका ने पहले ही हामिद अबूतालेबी के वीज़ा आवेदन को ख़ारिज कर दिया है और ओबामा ने कहा है कि वो इस नए क़ानून को एक सलाह के तौर पर लेंगे.

अमरीका के इनकार पर ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के साथ औपचारिक रूप से अपनी शिकायत दर्ज कराई है.

अबूतालेबी के साल 1979 में अमरीकी दूतावास पर क़ब्ज़े और अमरीकी राजनयिकों को बंधक बनाने वाले चरमपंथी छात्रों से संबंध को लेकर बवाल मचा था.

क़ानून

अमरीकी संसद के दोनों सदनों ने इससे संबंधित विधेयक को पारित कर दिया था और शुक्रवार को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर बाद यह क़ानून बन गया.

हालांकि अबूतालेब ने कहा है कि बंधक प्रकरण के दौरान उन्होंने कुछ मौकों पर महज दुभाषिये का काम किया था, न कि चरमपंथी के रूप में.

ईरान से क्यों नाराज़ है अमरीका?

इमेज कॉपीरइट AFP

ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी के वरिष्ठ राजनीतिक सलाहकार बनने से पहले वो इटली, बेल्जियम और ऑस्ट्रेलिया में ईरान के दूत रह चुके हैं.

शुक्रवार को अध्यादेश पर हस्ताक्षर करने के बाद एक बयान में ओबामा ने कहा, ''मैं कांग्रेस की उस व्यक्ति के बारे में चिंताओं को समझता हूं जो इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा हो और जो हमारे देश में अपने जाल फैलाने के लिए कूटनीतिक ढाल का उपयोग कर सकता है.''

उन्होंने कहा कि यह क़ानून अमरीकी संविधान को किसी राजदूत को स्वीकार या अस्वीकार किए जाने के निर्णय की शक्ति देगा.

वीज़ा

साल 1947 के हैडक्वॉटर्स एग्रीमेंट के तहत सामान्यतया अमरीका संयुक्त राष्ट्र द्वारा न्यूयॉर्क में बुलाए गए व्यक्तियों को वीज़ा देने के लिए बाध्य है.

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उप राजदूत हुसैन देघहानी ने मेजबान देशों के साथ संबंध मामले की समिति से इस मुद्दे पर बैठक बुलाने के लिए कहा है.

हुसैन ने कहा कि अमरीका ने अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी का उल्लंघन किया है.

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ''इस फ़ैसले से अमरीकी सरकार ने बहुस्तरीय कूटनीति की जटिलताओं को और बढ़ा दिया है, जिसका ख़तरनाक असर पड़ेगा और यह सदस्य देशों में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और उनकी गतिविधियों पर उलटा प्रभाव डालेगा.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार