सीरिय:अमरीका ने की राष्ट्रपति चुनाव की निंदा

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अमरीका ने सीरिया में तीन जून को राष्ट्रपति चुनाव कराने की योजना को ख़ारिज कर दिया है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी राष्ट्रपति चुनाव की योजना को खारिज करते हुए कहा है कि यह देश में तीन साल से जारी गृह युद्ध को ख़त्म करने की कोशिशों में बाधा पहुँचाएगा, जिसमें अबतक डेढ़ लाख लोगों की मौत हो चुकी है.

सीरिया के सरकारी सुरक्षा बलों ने हाल के दिनों में कुछ सफलता हासिल की है. लेकिन विद्रोही बलों का अभी भी देश के बड़े भूभाग पर कब्ज़ा बना हुआ है. इस बात की संभावना नहीं है कि इन इलाक़ों में मतदान हो.

माना जा रहा है कि राष्ट्रपति बशर-अल-असद सात साल के लिए तीसरा कार्यकाल भी चाहते हैं.

नया क़ानून

सरकार ने अभी हाल में चुनाव से संबंधित एक नया क़ानून बनाया है, इसके मुताबिक़ चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्ति के लिए यह जरूरी बनाया गया है कि वह पिछले 10 साल से सीरिया में रह रहा हो.

विपक्ष के अधिकांस नेता देश छोड़कर चले गए हैं, ऐसे में वो चुनाव नहीं लड़ पाएंगे.

विपक्षी कार्यकर्ता अहमद अलक़ैसर ने असद पर सीरिया के लोगों के ख़ून पर चुनाव कराने का आरोप लगाते हुए कहा है कि केवल राष्ट्रपति समर्थक ही मतदान करेंगे.

उन्होंने समाचार एजेंसी एपी से कहा,'' जब हमें रोटी खाने से भी रोका जा रहा है, तो हम मतदान कैसे कर पाएंगे.''

एक सरकारी सांसद ने कहा कि विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाके में मदतान नहीं होगा. हालांकि इसको लेकर अभी सरकार की ओर से कोई घोषणा नहीं की गई है.

सीरिया में चुनाव कराने की योजना की निंदा के लिए अमरीका, यूरोपिय संघ और संयुक्त राष्ट्र एक हैं.

अमरीकी विदेश विभाग की प्रवक्ता जेन पास्की ने कहा, '' चुनाव कराने की घोषणा वास्तव में प्रतिनिधित्व की इच्छा रखने वाले मतदाताओं का सत्ता की ओर से जनसंहार है.''

वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यह राजनीतिक प्रक्रिया को नुक़सान पहुँचाएगा और मामले के राजनीतिक समाधान में बाधा डालेगा.

अमरीका और यूरोपिय संघ ने राष्ट्रपति चुनाव की इस घोषणा को लोकतंत्र का मज़ाक बताया है.

सीरियाई शरणार्थी

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संसद के सभापति मोहम्मद अल लाहाम ने चुनाव की घोषणा करते हुए कहा कि विदेशों में रह रहे सीरियाई 28 मई से मतदान कर पाएंगे.

हालांकि अभी यह साफ़ नहीं है कि विवादित क्षेत्रों में मतदान कराने की सरकार की क्या योजना है या देश छोड़कर भागे 60 लाख लोग मतदान में किस तरह हिस्सा लेंगे.

क़रीब 27 लाख सीरियाई पड़ोसी देशों में शरणार्थियों के रूप में रह रहे हैं. वहीं बहुत से लोग उन देशों में भी रह रहे हैं, जहाँ सीरियाई दूतावास 2011 से बंद हैं.

सीरिया में चुनावों की घोषणा राजधानी दमिश्क के मध्य में स्थित संसद भवन से सौ मीटर की दूरी पर मोर्टार से हुए हमले के बाद की गई. सरकारी टीवी के मुताबिक़ इस हमले में पांच लोगों की मौत हो गई.

राष्ट्रपति बशर-अल-असद ने 2000 में अपने पिता की जगह ली थी. वो 2007 में दोबारा राष्ट्रपति चुने गए. उस समय हुए जनमत संग्रह में उन्हें 98 फ़ीसदी वोट मिले थे.

दमिश्क में मौज़ूद बीबीसी संवाददाता लेज डाउसेट का कहना है कि असद ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि वो चुनाव लड़ेंगे या नहीं. लेकिन किसी को भी इस बात पर संदेह नहीं है कि वह तीसरा कार्यकाल चाहेंगे.

साल 2012 में हुए संविधान संशोधन की काफ़ी आलोचना हुई थी. इसके मुताबिक़ चुनाव में कई उम्मीदवार खड़े हो सकते हैं.लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि इस बात की संभावना बहुत कम है कि कोई असद को चुनौती दे.

वहीं एक अन्य घटनाक्रम में पास्की ने कहा कि अमरीका इन ख़बरों की जांच कर रहा है कि विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाक़ों पर रासायनिक हथियारों से हमले किए गए.

फ़्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने रविवार को कहा कि उनके पास इस बात की 'सूचना' है कि असद समर्थक बल अभी भी रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इसको लेकर उनके पास कोई सबूत नहीं है.

सरकार अगले रविवार तक अपने रासायनिक हथियारों को सौंपने के लिए तैयार हो गई है. राष्ट्रपति असद पिछले साल राजधानी दमिश्क में सैकड़ों लोगों के मारे जाने के बाद इसके लिए तैयार हुए थे.

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