पाक: हामिद मीर की तरह खुश किस्मत नहीं थे शहज़ाद

  • 26 अप्रैल 2014
हामिद मीर पर हमले का विरोध इमेज कॉपीरइट AP

पाकिस्तान में पिछले दिनों जाने माने पत्रकार हामिद मीर पर हुए जानलेवा हमले से 2011 में मारे गए एक दूसरे पत्रकार सलीम शहज़ाद की यादें ताज़ा हो गईं.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कुछ पत्रकारों ने तुरंत सक्रिय होते हुए शहज़ाद की हत्या के लिए पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई पर आरोप लगाया था लेकिन हत्या की जांच के लिए बनाया गया न्यायिक आयोग किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सका था.

हामिद मीर का मामला भी वैसा ही मोड़ लेता हुआ दिखाई दे रहा है क्योंकि उनके भाई ने इन हमले के लिए खुफ़िया एजेंसी को ज़िम्मेदार ठहराया है.

शहज़ाद पाकिस्तानी सेना और अल-क़ायदा के बीच कथित संबंधों की पड़ताल कर रहे थे, जब उनका अपहरण किया गया और बाद में वो 30 मई 2011 को इस्लामाबाद के क़रीब एक नहर के पास मृत पाए गए.

इस मामले की जांच के लिए गठित किए गए न्यायिक आयोग ने इस अपहरण और हत्या के पीछे होने से आईएसआई को साफ़ बरी कर दिया.

हालांकि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया कि सरकार को ख़ुफ़िया एजेंसियों के ऊपर अधिक नियंत्रण रखने की ज़रूरत है.

पढ़ें: हमले के लिए आईएसआई ही ज़िम्मेदार : हामिद मीर

हत्या की साजिश

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19 अप्रैल को कराची पहुंचे हामिद मीर के एयरपोर्ट के निकलते ही उनकी कार पर गोलियां चलाई गईं.

हामिद मीर पाकिस्तान के प्रमुख टीवी चैनल जियो न्यूज़ पर सबसे लोकप्रिय प्राइम टाइम शो 'कैपिटल टॉक' की मेज़बानी करते हैं.

वो विभिन्न मसलों पर पाकिस्तानी सेना की काफ़ी आलोचना करते रहे हैं, जिसमें उन लापता हुए लोगों का मसला भी शामिल है, जिसमें सुरक्षा बलों पर आरोप लगते हैं कि उन्होंने चरमपंथी समूहों के साथ कथित संबंधों के चलते सैकड़ों लोगों को "जबरन गायब" कर दिया.

प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने शहज़ाद हत्याकांड की तरह ही हामिद मीर पर हुए हमले की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग बनाया है.

लेकिन इस बात को लेकर संदेह है कि क्या आयोग हमले में आईएसआई की कथित भूमिका को लेकर कोई निश्चित जवाब दे पाएगा.

पढ़ें: पाकिस्तान में मीडिया की आजादी का सवाल

सेना का इनकार

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पाकिस्तानी सेना हामिद मीर पर हुए हमले में अपना हाथ होने से साफ़ इनकार कर चुकी है.

सेना के प्रवक्ता ने बताया, "आईएसआई या आईएसआई प्रमुख के ख़िलाफ़ बिना किसी आधार के आरोप लगाना पूरी तरह से अफ़सोसनाक और भ्रामक है."

इसके साथ ही सेना के प्रभाव वाले रक्षा मंत्रालय ने जियो न्यूज के लाइसेंस को रद्द करने के लिए एक शिकायत दायर की है. ये शिकायत हामिद मीर पर हमले के बाद जियो न्यूज़ पर कथित रूप से प्रसारित सेना विरोधी सामग्रियों के चलते की गई है.

इसके बाद रक्षा मंत्रालय की शिकायत की समीक्षा के लिए पाकिस्तान में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (पैमरा) ने बुधवार को तीन सदस्यों वाली एक समिति का गठन किया.

ऐसे में जियो टीवी पर प्रतिबंध असंभव नहीं है.

इस बीच एक कम चर्चित तालिबानी ट्विटर खाते पर हमले की जिम्मेदारी ली गई है और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के प्रवक्ता ने इस दावे से इनकार किया है. ऐसे में हमले को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है.

ट्विटर अकाउंट @तहरीकएतालिबान पर हमले के तुरंत बाद दावा किया गया, "हम तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान पंजाब चैप्टर हामिद मीर पर हुए हमले की जिम्मेदारी लेते हैं. हमने इसे लश्कर-ए-झांगवी कराची के भाइयों के साथ मिलकर अंजाम दिया."

इस ट्विटर खाते का इस्तेमाल 11 फरवरी से केवल दो बार किया गया है.

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