आख़िरी बचे हुए मुसलमानों को निकाला गया

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शांति कार्यकर्ताओं ने सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक की राजधानी बानगुई से 12 सौ मुसलमानों को बाहर निकाल लिया है.

ये वो कुछ आख़िरी बचे हुए मुसलमान थे जो देश में गृहयुद्ध के कारण ईसाई चरमपंथियों के निशाने पर थे.

देश में गृहयुद्ध की शुरूआत 2013 में हुई जब सेलेका विद्रोहियों ने राष्ट्रपति को बेदखल कर दिया.

मुस्लिम सेलेका विद्रोहियों पर ईसाई को निशाना बनाने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का आरोप है.

शुक्रवार को नांगा बोगुइला शहर में 22 लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट है जिसमें चिकित्सकीय संगठन मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स (एमएसएफ़) के 15 स्थानीय प्रमुख और तीन स्थानीय मज़दूर मारे गए है.

क्षेत्र के एक पूर्व सांसद गिल्स जेवियर नगुइम्बासा ने रायटर्स समाचार एजेंसी को कहा, " हमले में शिकार अधिकतर लोगों की मौत शनिवार को हुई ."

नगुइम्बासा ने सेलेका विद्रोहियों को हमले के लिए जिम्मेवार ठहराया.

जातीय संघर्ष

बानगुई के पीके-12 जिले से मुस्लिमों को देश के उत्तर में सुरक्षित जगह पर ले जाया गया है. सुरक्षा दल के जिले से बाहर जाते लुटेरे घर, व्यापारिक प्रतिष्ठान और यहाँ तक कि मस्जिद पर भी टूट पड़े.

एक लुटेरे रिचर्ड ने एपी समाचार एजेंसी को कहा, " हम यहाँ मुस्लिमों नहीं चाहते और ना ही उनके मस्जिद यहाँ चाहते हैं. "

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कुछ मुसलमान बानगुई में बचे हुए थे जबकि अधिकतर हाल के हफ़्तों में ईसाई बहुलता वाले क्षेत्र छोड़ चुके थे.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जातीय संघर्ष को रोकने में नाकाम रहने के लिए शांति सैनिकों पर आरोप लगाए हैं.

पीके-12 जिले के रहवासी टोंगा डजोबो ने एपी से कहा, "मैं दुखी मन से बानगुई छोड़ रहा हूँ लेकिन यह हमारा पीछा करेगी."

मुसलमान निशाने पर

46 लाख आबादी वाले इस देश की एक तिहाई आबादी संघर्ष के कारण अपना घर चुकी है.

सेलेका विद्रोहियों ने फ्रांकोईस बोज़ीजे को राष्ट्रपति पद से हटा दिया और अपने नेता मिशेल जोतोडीया को उनकी जगह सौप दी.

जनवरी में जोतोडीया को जबरदस्ती पद से हटा दिया गया. सांप्रदायिक हिंसा को रोकने में असफल होने के कारण उनकी आलोचना हुई.

तब से देश में मुसलमान निशाने पर हैं हज़ारों मुसलमान कैमरून और चाड जैसे पड़ोसी मुल्क जा चुके हैं.

अफ्रीकी संघ के तकरीबन 6000 सैनिकों और 2,000 फ्रांसीसी सैनिकों को रक्तपात रोकने के प्रयास के तहत सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक भेजा गया लेकिन अधिकारी चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद लगभग 12,000 सैनिकों का एक बल तैनात करे.

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