भारत से कितना अलग है दक्षिण अफ़्रीका का चुनाव?

  • 7 मई 2014
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दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद की नीति समाप्त होने के बाद हो रहे पाँचवें आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है.

इन चुनावों में सत्ताधारी अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस (एएनसी) को जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा है. राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा दूसरी बार देश के राष्ट्रपति बन सकते हैं.

हालांकि बेरोज़गारी की बढ़ती दर और भ्रष्टाचार के कई बड़े मामले सामने आने के कारण एएनसी की ज़मीन खिसक सकती है.

चुनावों से पहले कई जगह प्रदर्शन हुए हैं और सुरक्षा के लिए सैन्यबल तैनात किए गए हैं.

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रंगभेद नीति के बाद पैदा हुए मतदाता बुधवार को पहली बार मतदान करेंगे.

मतदाताओं की पसंद

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नतीजे इन नए मतदाताओं की पसंद पर भी निर्भर करेंगे.

चुनावी सर्वेक्षण बताते हैं कि अधिकतर युवा मतदाता देश के नेतृत्व से निराश हैं और उनका झुकाव विपक्षी प्रजातांत्रिक गठबंधन की ओर हो सकता है.

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इस गठबंधन का नेतृत्व रंगभेद विरोधी कार्यकर्ता हेलेन ज़िल्ले और आर्थिक स्वतंत्रता कार्यकर्ताओं के समूह के अध्यक्ष और पूर्व एएनसी नेता जूलियस मालेमा कर रहे हैं.

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Image caption जैकब ज़ूमा दोबारा राष्ट्रपति पद की दौड़ में हैं.

एएनसी अपने ऐतिहासिक संघर्ष और अपने महान नेता नेल्सन मंडेला की मौत का ज़िक्र अपने चुनाव प्रचार में कर रही है.

चुनाव प्रचार अभियान के पोस्टरों पर लिखा है, "मदीबा के लिए एएनसी को वोट दें."

कई चुनावी विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि रंगभेद विरोधी विचारधारा के तहत लड़ा जाने वाला यह आख़िरी चुनाव हो सकता है.

मुद्दे

इस समय दक्षिण अफ़्रीका की एक चौथाई आबादी बेरोज़गार है. बीबीसी के एक सर्वेक्षण के मुताबिक़ युवाओं में बेरोज़गारी सबसे बड़ा मुद्दा है.

मतदान के लिए स्कूलों, धर्मस्थलों, आदिवासी प्राधिकरण के दफ़्तरों और अस्पतालों में क़रीब 22,000 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. कूछ दूरस्थ इलाक़ों में मोबाइल मतदान केंद्रों के ज़रिए भी मतदान कराया जाएगा.

इस बार चुनाव में क़रीब ढाई करोड़ मतदाता हैं जो दक्षिण अफ़्रीका की आबादी के आधे हैं.

पुलिस के मुताबिक़ हर मतदान केंद्र पर कम से कम एक पुलिस अधिकारी तैनात होगा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सैन्यबल भी तैनात किए गए हैं.

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