फ़ेसबुक पर अफ़वाहों ने ली महिला की जान?

  • 9 मई 2014
वूडू

ब्राज़ील के एक तटीय शहर में हुई एक हत्या सोशल मीडिया के ज़रिए फ़ैलाई अफ़वाहों के ख़तरे से आगाह करती है.

दुनिया भर के अन्य समुदायों की तरह साओ पाउलो के नज़दीक ग्वारुहा के लोग भी स्थानीय फ़ेसबुक पन्नों के ज़रिए ही समाचार अपडेट लेते हैं.

ग्वारुहा अलर्ट यहाँ एक चर्चित फ़ेसबुक पेज है जिससे क़रीब पचास हज़ार लोग जुड़े हैं. लेकिन इसी पेज पर की गईं कुछ अपडेट को अब एक महिला के क़त्ल की वजह माना जा रहा है.

शनिवार को यहां 33 वर्षीय फ़ाबियाने मारिया, जो दो बच्चों की मां थीं, को भीड़ ने दिनदहाड़े सरेआम बुरी तरह पीटा. मारिया की सोमवार को अस्पताल में मौत हो गई.

इस बर्बर घटना को कई लोगों ने न सिर्फ़ अपने मोबाइल कैमरों में क़ैद किया बल्कि ऑनलाइन पोस्ट भी कर दिया.

मारिया के वकीलों का कहना है कि ग्वारुहा अलर्ट फ़ेसबुक पेज उनकी मौत की वजह बना है.

आरोप

लेकिन वो फ़ेसबुक पेज पर आरोप क्यों लगा रहे हैं? दरअसल, कुछ दिनों से यहां अफ़वाह फ़ैल रही थी कि एक महिला जादू-टोने (वूडू अनुष्ठान) के लिए बच्चों का अपहरण कर रही है.

पुलिस की ओर से पन्ना चला रहे लोगों को अफ़वाहों से आगाह किए जाने के बावजूद इस बारे में फ़ेसबुक पन्ने पर लगातार अपडेट पोस्ट किए जाते रहे.

अफ़वाहों में कहा जा रहा था कि अपहरण करने वाली महिला के पास हमेशा बाइबिल होती है. जिस दिन मारिया पर हमला हुआ उस दिन उनके हाथों में भी बाइबल थी. लोगों ने उन्हें एक बच्चे को केला देते हुए देखा था.

मारिया के अधिवक्ता ने बीबीसी को बताया, "फ़ेसबुक पन्ने को चलाने वाला क़ातिल नहीं है लेकिन वो एक ग़ैर ज़िम्मेदार इंसान है जिसे अपने कृत्य की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए."

पेज के संचालकों का कहना है कि उन्होंने पुलिस के उस बयान को भी अपने पन्ने पर पोस्ट किया था जिसमें कहा गया था कि अपहरण का कोई मामला सामने नहीं आया है.

भीड़ ज़िम्मेदार

हालांकि वे स्वीकार करते हैं कि उन्होंने इस संबंध में किए गिए पुराने अपडेट नहीं हटाए और वे अपने पेज पर इस बारे में चर्चा करते रहे.

उनके वकीलों का कहना है कि जो लोग फ़ेसबुक पन्ने पर आरोप लगा रहे हैं वे ग़लत लोगों की तलाश में हैं. उनका कहना है कि हत्या के लिए हमला करने वाली भीड़ ज़िम्मेदार है.

स्थानीय पुलिस प्रमुख रिकार्डो लारा ने बीबीसी से कहा कि अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि मारिया के क़त्ल के तार 'वूडू किडनेपर' की अफ़वाहों से जुड़े हैं.

हालाँकि गिरफ़्तार किए गए एक व्यक्ति का कहना है कि उसने इन अफ़वाहों के बारे में सुना था.

इस समय ब्राज़ील में ऐसा कोई क़ानून नहीं है जिसके तहत सोशल मीडिया पर अफ़वाहें फ़ैलाना अपराध हो.

ब्राज़ील में इस मुद्दे पर गंभीर बहस हो रही है और संभवतः इस मामले के बाद नया क़ानून भी बना दिया जाए.

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