दो महीने से अगवा बलूचिस्तानी कार्यकर्ता का कोई पता नहीं

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कराची में झुलसाने वाली गर्मी में शहर के मुख्य प्रेस क्लब के बाहर एक धरना प्रदर्शन चल रहा है. करीब 20 साल के युवा लतीफ़ गौहर फ़ुटपाथ पर लेटे हुए हैं.

उनके बगल में उनके साथी बैठे हुए हैं, जिनमें महिलाएं ज़्यादा हैं. सबने अपने चेहरे को परंपरागत ढंग से ढका हुआ है.

लतीफ़ गौहर बीते अप्रैल से भूख हड़ताल पर हैं. हर बीतते दिन के साथ उनका वज़न कम हो रहा है और सेहत बिगड़ रही है.

यह भूख हड़ताल पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा राष्ट्रीय छात्र नेता जाहिद बलोच को अगवा किए जाने के विरोध में किया जा रहा है.

जाहिद बलोच अलगावावादी बलोच छात्र संस्था (आज़ाद) के मुखिया हैं और सुरक्षा बल के जवानों ने उन्हें क्वेटा से 18 मार्च को अगवा किया था.

बताया जा रहा है कि पारामैलिट्री फोर्स फ्रंटियर कॉर्प्स के जवानों ने बलोच को बंदूक की नोक पर अगवा किया.

इसके बाद उनकी आंखों पर पट्टी बांध दिया गया और हाथ बांध कर उन्हें उस गाड़ी में डाला गया, जिसमें पहले से ही सादी वर्दी में आईएसआई के जवान मौजूद थे.

दिन-दहाड़े अगवा

बलोच को दिन के उजाले में तीन महिला मित्रों और कई स्थानीय लोगों की मौजूदगी में अगवा किया गया था, लेकिन दो महीने के बाद उनका कोई पता नहीं चल पाया है.

पिछले उदाहरणों को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि छात्र नेता को काफी प्रताड़ित किया जा रहा होगा.

बलोच की पत्नी जारजान को आशंका है कि वो अपने पति को दोबारा नहीं देख पाएंगी. बलोच के दो बेटे भी हैं, एक दो साल का और दूसरा चार साल का.

Image caption अगवा किए जाने के करीब छह महीने पहले बीबीसी ने की थी जाहिद बलोच से मुलाक़ात.

यह आशंका इसलिए भी ज़्यादा है क्योंकि परिजनों और बलोच के साथियों के लगातार कहने के बावजूद भी पुलिस ने उनकी गिरफ़्तारी का मामला दर्ज नहीं किया.

लगातार दस दिन तक पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया.

बीबीसी से वो मुलाक़ात

जाहिद को अगवा किए जाने से छह महीने पहले मैं बलूचिस्तान के दूर दराज के ज़िले आवारान में उनसे मिला था. तब उन्होंने अपना नाम बलोच ख़ान बताया था.

उन्होंने बताया था कि वह छिपकर इसलिए रहने को मज़बूर हैं क्योंकि बलोच अलगावादी पाकिस्तानी सेना के निशाने पर हैं.

बलोच ने एक मुलाकात में बीबीसी उर्दू से कहा था, "अगर उन्होंने मुझे तलाश लिया, तो मेरी हत्या कर देंगे."

बलोच ने ये भी बताया था कि उनका संघर्ष आत्मसम्मान और पहचान से जुड़ा है. उन्होंने कहा था, "अगर आप एक लेखक हैं या स्वतंत्रता की मांग करने वाले कार्यकर्ता तो ये लोग आपके पीछे पड़ जाते हैं. ये लोग हमारी भाषा, संस्कृति और विरासत को मिटाना चाहते हैं."

हालांकि पाकिस्तानी सेना यह आरोप लगाती रही है कि बलोच को भारत से समर्थन मिल रहा है.

इस सवाल के जवाब में मुस्कुराते हुए जाहिद ने कहा था, "यही आरोप वे बंगालियों पर लगाते रहे थे. 1971 के स्वतंत्रता आंदोलन को दबाने के लिए हज़ारों हत्याएं हुईं, लेकिन क्या हुआ? इस सबसे बांग्लादेश का गठन हुआ."

पाकिस्तानी सरकार ने मार्च, 2013 में दर्जन भर आतंकी और कट्टरपंथी संगठनों के साथ बलोच आज़ाद समूह पर पाबंदी लगा दी थी.

बलोच की गिरफ़्तारी पर बलूचिस्तान के गृह मंत्री सरफ़राज़ बुगती ने बीबीसी से कहा, "मैंने इस बारे में कभी नहीं सुना. मुझे तो इस नाम के किसी भी शख़्स के होने पर संदेह है."

बढ़ता विरोध प्रदर्शन

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बुगती ने राज्य में लोगों को अगवा किए जाने और प्रताड़ित किए जाने के मामलों से भी इनकार किया है.

लेकिन पिछले साल लापता लोगों के परिवार वालों ने क्वेटा से कराची तक और उसके आगे कराची से इस्लामाबाद तक की 2000 किलोमीटर से भी ज़्यादा पैदल मार्च करते हुए अगवा किए जाने और लोगों को हिरासत में लिए जाने का विरोध किया था.

इसे एक ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन माना गया था, जिसमें महिलाएं और बच्चे तक शामिल हुए थे.

वॉयस ऑफ़ मिसिंग बलोच पर्सन्स (वीएमबीपी) नामक अभियान समूह के मुताबिक, बीते पांच साल के दौरान करीब 2900 लोगों को जबरन अगवा किया गया है.

हालांकि पाकिस्तानी अधिकारी इस संख्या से इनकार कर रहे हैं और केवल कुछ दर्जन मामलों के होने की बात कर रहे हैं.

हालांकि कराची में लतीफ़ गौहर की भूख हड़ताल जारी है. उनकी कमज़ोरी लगाता बढ़ रही है. विरोध प्रदर्शन में मौजूद उनके एक साथी ने कहा, "हम चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूह और दूसरे देश हमारे अधिकारों की रक्षा और क़ानून के शासन के लिए आगे आएं."

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