मोदी पर है पाकिस्तान की नज़र

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भारत के उर्दू अख़बारों में जहां आम चुनाव के बाद उभरे सियासी परिदृश्य की चर्चा है, तो पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों ने भारत की नई सरकार के साथ रिश्तों की संभावनाओं और मीडिया की अभिव्यक्ति पर लगाई जा रही बंदिशों की चर्चा की है.

आज समाज ने बिहार में जद(यू) सरकार को लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल की तरफ़ समर्थन दिए जाने का स्वागत किया है.

अख़बार लिखता है कि आम चुनाव के बाद उभरे सियासी परिदृश्य में जब धर्मनिरपेक्ष ताक़तें बेवजूद होती जा रही हैं, ऐसे में लालू का नीतीश कुमार से सियासी दुश्मनी ख़त्म करने का फ़ैसला बेहद सूझबूझ भरा है.

अख़बार कहता है कि न सिर्फ़ इसका अन्य राज्यों में स्वागत होना चाहिए बल्कि इसी आधार पर आने वाली चुनौतियों से निटपने की रणनीति बनाई जानी चाहिए.

'आप' की विडंबना

हिंदोस्तान एक्सप्रेस का संपादकीय है- मज़बूत विपक्ष ज़रूरी है. अख़बार लिखता है कि यह हैरत की बात है कि भारत में कभी ऐसी सरकार नहीं बनी, जिसे 50 फ़ीसदी लोगों ने वोट दिया हो.

इस बार भाजपा को 31 फ़ीसदी वोट मिले और 282 सीटें, लेकिन देखा जाए तो 69 फ़ीसदी लोगों ने भाजपा के ख़िलाफ़ वोट दिया है. फिर भी उसे पूर्ण बहुमत मिल गया. हालत यह है कि कांग्रेस के पास इतने भी सांसद नहीं है कि वो मुख्य विपक्षी दल बन सके.

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Image caption केजरीवाल की आम आदमी पार्टी में बिखराव शुरू हो गया है

लेकिन अख़बार कहता है कि ये ज़िम्मेदारी कांग्रेस को ही मिलनी चाहिए क्योंकि तृणमूल कांग्रेस, एआईएडीएमके और बीजू जनता दल जैसी जो बड़ी पार्टियां उभरी हैं, वो सभी क्षेत्रीय दल हैं और उनके अपने क्षेत्रीय हित हैं जबकि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और सरकार की कारगुज़ारियों और खामियों पर नज़र रख सकती है.

राष्ट्रीय सहारा ने लिखा है कि दिल्ली के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की कामयाबी जितनी सनसनीख़ेज़ और हैरान करने वाली थी, हालिया आम चुनाव में उसकी हार भी कमोबेश उतनी ही सनसनीख़ेज़ और हैरान करने वाली है.

अख़बार लिखता है कि पहले माना जा रहा था कि अगर दिल्ली में दोबारा विधानसभा चुनाव हुए, तो आम आदमी पार्टी को बहुमत मिल जाएगा, लेकिन अब इस पर सवाल उठने लगे हैं.

अख़बार की राय है कि अगर आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनावों में अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाती, तो इसके लिए वह अपने सिवा किसी और को दोष नहीं दे सकती.

मोदी पर नज़र

भारत में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए पाकिस्तान प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को भेजे गए निमंत्रण पर दक्षिणपंथी अख़बार नवाए वक़्त ने लिखा है कि इसे ठुकरा दिया जाना चाहिए .

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Image caption मोदी के शपथ ग्रहण में आएंगे नवाज़ शरीफ़

अख़बार के अनुसार मोदी ने प्रधानमंत्री मनोनीत होने के बाद कश्मीर नीति पर बयान देकर साफ़ कर दिया है कि उनके इरादे नेक नहीं हैं.

वहीं रोज़नामा क़ौमी अख़बार में छपे एक लेख में कहा गया है कि पहले मोदी धार्मिक उन्मादी और मुस्लिम विरोधी के तौर पर जाने जाते थे लेकिन इस बार उनका नया रूप सामने आया है.

भारतीय चुनाव प्रचार में कश्मीर मुद्दे का ज़िक्र होने और विदेशी नीति के मोर्चे पर बीजेपी के आक्रामक रुख़ अख्तियार करने की बातों के बावजूद अख़बार कहता है कि राजनीतिक नारे तो सिर्फ़ एक ढोंग होते हैं, जिन्हें बाद में ख़ारिज कर दिया जाता है.

अख़बार की राय है कि अगर मोदी कश्मीर को लेकर सख़्त रवैया अपनाएंगे, तो इतिहास ख़ुद अपने आपको दोहराएगा और यह झगड़ा दोनों देशों को आपसी रिश्तों में आगे बढ़ने से रोक सकता है.

'जिसकी लाठी उसकी भैंस'

पाकिस्तान में सबसे लोकप्रिय चैनल जियो न्यूज़ और जियो फ़ैमिली का प्रसारण बंद किए जाने पर रोज़नामा वक़्त ने लिखा है कि इससे पत्रकार बिरादरी में खलबली मची है.

इस फ़ैसले के पीछे जाने-माने पत्रकार और जियो न्यूज़ के एंकर हामिद मीर पर हमले और उसके लिए आईएसआई पर लगाए गए आरोपों की पृष्ठभूमि में अख़बार कहता है कि जियो न्यूज़ और जंग ग्रुप के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार चरम को पहुंच गया है जबकि पत्रकारों की आज़ादी लोकतंत्र की स्थिरता के लिए बहुत ज़रूरी है.

वहीं जंग के पहले पन्ने पर सत्ताधारी पीएमएल(एन) के सीनेटर मुशाहिदुल्लाह का बयान है कि सेना, मीडिया और राजनेता, सबने ग़लतियां की हैं, लेकिन ग़लती का यह मतलब नहीं है कि कुचल दिया जाए.

अपने संपादकीय में जंग लिखता है कि ये सिर्फ़ जंग ग्रुप या जियो की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश की विडंबना है कि पाकिस्तान में 'जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली सोच' को परवान चढ़ाया जा रहा है.

अख़बार के अनुसार पत्रकारों की जिस आज़ादी को इतनी क़ुरबानियां के बाद हासिल किया गया है, उसे बचाना सबका फ़र्ज़ है जिसमें सरकार, सरकारी संस्थाएं और सिविल सोसाइटी सबको अपना योगदान देना होगा.

लाहौर में मेट्रो

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Image caption लाहौर में मेट्रो बस सेवा के बाद अब मेट्रो ट्रेन सेवा लाने की तैयार हो रही है

रोज़नामा एक्सप्रेस ने चीन के शिनचियांग में चरमपंथी हमले में हुई 31 लोगों की मौत की घटना पर चिंता जताई है और अंदेशा ज़ाहिर किया है कि कहीं ऐसी घटनाओं से चीन और पाकिस्तानी की दोस्ती प्रभावित न हो.

अख़बार के अनुसार चीन के इस प्रांत की सीमा पाकिस्तान से मिलती है और दहशतगर्दी को लेकर पूरी दुनिया में पाकिस्तान की छवि दाग़दार रही है. इसलिए यह घटना पाकिस्तान के लिए भी उतनी ही चिंता की बात होनी चाहिए जितनी चीन के लिेए है.

इसके अलावा औसाफ़ ने चीन की मदद से लाहौर में मेट्रो ट्रेन चलाने की योजना पर लिखा है कि शहरियों को सुविधा देने के दिशा में यह अहम क़दम है और उम्मीद है कि पाकिस्तान में पहली बार मेट्रो लाने की इस योजना में पारदर्शिता बरती जाएगी और इसे जल्द से जल्द साकार किया जाएगा.

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