यूक्रेन: हवाई अड्डे पर सेना ने किया नियंत्रण

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यूक्रेन के आंतरिक मंत्रालय का कहना है कि सेना ने यूक्रेन के पूर्वी शहर दोनेत्स्क में हिंसक झड़प के बाद हवाई अड्डे को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया है.

विद्रोहियों का कहना है कि कम से कम 30 रूस समर्थक अलगाववादी इस झड़प में मारे गए हैं. यूक्रेन ने कहा है कि मौजूदा संघर्ष में उसका कोई सैनिक नहीं मारा गया है.

इससे पहले हथियारबंद अलगाववादियों ने सोमवार को एयरपोर्ट को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की थी.

यूक्रेन के नए राष्ट्रपति पेत्रो पोरोशेनको ने तब चरमपंथियों से महीनों के बजाय घंटों में निपटने का संकल्प लिया.

रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव ने मंगलवार को राष्ट्रपति पेत्रो पोरोशेनको से दोबारा सेना की कार्रवाई रोकने की अपील की थी और 17 अप्रैल को जिनेवा में हुए शांति वार्ता का रोडमैप तैयार किया था.

मॉस्को में एक प्रेस कांफ्रेस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि दोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्र में "वास्तव में युद्ध" चल रहा था.

रूस समर्थक राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को अपदस्थ किए जाने के बाद क्राईमिया क्षेत्र में जनमतसंग्रह हुआ जिसमें 90 प्रतिशत से ज़्यादा लोगों ने रूस में शामिल होने का जनादेश दिया.

संघर्ष

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आंतरिक मंत्री अर्सेन अवाकोव ने कहा, "एयरपोर्ट पूरी तरह से नियंत्रण में हैं विरोधियों को बहुत नुकसान झेलना पड़ा है. हमें कोई नुकसान नहीं हुआ है. "

उन्होंने कहा कि अभियान अभी भी जारी है और बीबीसी की टीम ने मंगलवार को छिटपुट गोलीबारी की आवाज़ सुनी हैं.

स्वघोषित दोनेत्स्क पीपुल्स रिपब्लिक के एक प्रतिनिधि ने बीबीसी से कहा कि सोमवार को हुई झड़प में 30 लोगों को मारे जाने की रिपोर्ट सही है.

अन्य रिपोर्टों के अनुसार मरने वालों की संख्या अलग-अलग है.

दोनेत्स्क के मेयर एलेक्जेंडर लुकयानचेंको ने कहा कि पिछले दिनों हुई हिंसा में 40 लोग मारे गए हैं जबकि एक अन्य अलगावदी ने कहा कि हिंसा में अबतक 50 विद्रोही मारे गए हैं.

दोनेत्स्क एयरपोर्ट पर विद्रोहियों के हमले के कुछ ही घंटे बाद यूक्रेन की भारी भरकम मात्रा में हथियारबंद सेना हवाई हमला कर दिया.

11 मई के जनमत संग्रह के बाद दोनेत्स्क और लुहांस्क के अलगाववादियों ने यूक्रेन से स्वतंत्र होने की घोषणा कर दी थी. हालांकि इसे किएफ़ और पश्चिमी देशों ने मान्यता नहीं दी है.

इन दो क्षेत्रों ने क्राइमिया में हुए विवादास्पद जनमत संग्रह के बाद स्वतंत्र होने के संकेत दिए, जिन पर मार्च में रूस ने क़ब्ज़ा किया था.

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