पाकिस्तानी तालिबान में दरार, महसूद गुट अलग हुआ

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पाकिस्तानी तालिबान के महसूद गुट ने संगठन के नेताओं के तौर तरीक़ों को ''ग़ैर-इस्लामिक'' बताते हुए संगठन से अलग होने की घोषणा की है.

साल 2007 में पाकिस्तानी तालिबान के बनने के बाद ये पहला मौका है जब संगठन में दरार आई है. विश्लेषकों का कहना है कि इस अलगाव से सरकार के साथ चल रही शांति वार्ता को बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, टीटीपी, के महसूद धड़े के प्रवक्ता आज़म तारिक़ ने बताया कि उनका गुट केंद्रीय संगठन से आधिकारिक रूप से अलग हो गया है.

दक्षिण वज़ीरीस्तान में एक पत्रकार सम्मेलन में आज़म अज़ीज़ ने कहा कि सरकार और पाकिस्तानी तालिबान के बीच जारी शांति वार्ता पर मतभेद होने की वजह से उनके गुट ने अलग होने का फ़ैसला किया है.

'ग़ैर-इस्लामिक तरीक़े'

तारिक़ ने कहा कि उनका गुट बातचीत के पक्ष में है, जबकि तालिबान का नेतृत्व सरकार के ख़िलाफ़ हमले जारी रखना चाहता है. प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान तालिबान चोरी और फिरौती के लिए अपहरण करने वाला आपराधिक गिरोह बन गया है.

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पिछले सात साल में पाकिस्तान में चरमपंथी हमलों में हज़ारों लोग मारे गए हैं और ज़्यादातर हमलों की ज़िम्मेदारी तालिबान ने ली है.

टीटीपी में ये दरार पिछले एक महीने की अंदरूनी लड़ाई के बाद आई है, जिसमें संगठन के दर्जनों लड़ाके मारे गए.

महसूद धड़े का कहना था कि वे अपना अलग गुट बना रहे हैं, जिसका नाम तरहीक तालिबान दक्षिण वज़ीरीस्तान होगा.

प्रवक्ता आज़म तारिक़ महसूद ने पत्रकारों को बताया कि टीटीपी नेतृत्व को ''इस्लाम के विपरीत'' तौर-तरीक़ों को छोड़ने से रोक पाने में नाकाम होने के बाद उनके गुट ने अलग होने का फ़ैसला लिया.

तारिक़ ने कहा, "हम सार्वजनिक जगहों पर बम हमले, फिरौती और अपहरण को ग़ैर इस्लामी मानते हैं औऱ क्योंकि टीटीपी के नेता इन बातों को नहीं छोड़ रहे, इसलिए हमने तय किया है हम इसकी ज़िम्मेदारी नहीं बांटेगे."

दरार

साल 2009 में टीटीपी के संस्थापक बैतुल्लाह महसूद के एक ड्रोन हमले में मौत के बाद संगठन में मतभेद उभरने लगे और साल 2013 में उनके उत्तराधिकारी हकीमुल्लाह महसूद के एक अन्य ड्रोन हमले में मौत के बाद ये दरार पुख़्ता हो गई.

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हकीमुल्लाह महसूद की मौत के बाद टीटीपी की कमान एक ग़ैर महसूद नेता के हाथों में चली गई, जिससे संगठन में मतभेद बढ़ने लगे, जिसका नतीजा यह विभाजन है.

पाकिस्तान की सरकार ने इस वर्ष मार्च में टीटीपी के साथ शांति वार्ता शुरू की थी, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि संगठन में आंतरिक कलह की वजह से फ़िलहाल बातचीत रुकी हुई है.

जानकार मानते हैं कि टीटीपी में विभाजन से पाकिस्तानी तालिबान काफ़ी कमज़ोर पड़ जाएगा और इससे अन्य क्षेत्रीय गुटों के भी अलग होने की संभावना बढ़ जाएगी.

इससे उन चरमपंथी गुटों के सामने आने की संभावना है जो पाकिस्तान की सरकार के साथ शांति वार्ता करने के ज़्यादा इच्छुक हैं.

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