कैसा है एलजी का लेज़र वाला स्मार्टफ़ोन?

  • 31 मई 2014
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एलजी के नए स्मार्टफ़ोन में पहली बार लेज़र युक्त ऑटो-फोकस की ख़ूबी शामिल होगी जिससे बेहतर फोटो लेने में मदद मिलेगी.

यह पहला ऐसा फोन है जिसमें लेज़र निर्देशित फोकस की विशेषता होगी.

दक्षिण कोरियाई कंपनी एलजी ने जी3 हैंडसेट को दुनिया भर में लॉन्च करने से जुड़े लंदन में आयोजित कार्यक्रम में कंपनी के नए हैंडसेट की इस ख़ूबी की घोषणा की.

इस तकनीक के ज़रिये कम रोशनी वाली स्थितियों और गतिशील वस्तुओं को स्थिर कर एंड्रॉयड फोन के कैमरे के फोकस का बेहतर इस्तेमाल कर तस्वीरें ली जाएंगी.

विशेषज्ञों ने इस नए प्रयोग की तारीफ़ की है लेकिन उनका सुझाव था कि इस नई पहल का असर कंपनी की वैश्विक बिक्री रैंकिंग पर सीमित होगा.

टेलीकॉम कंसंल्टेंसी सीसीएस इंसाइट जसदीप बादयाल का कहना है, "मोबाइल हैंडसेट को सिर्फ़ देखकर उनका आकलन करना या पहचानना मुश्किल होता जा रहा है."

"किसी भी उपकरण में कुछ अलग तरह की ख़ूबियां होनी चाहिए ताकि जब कोई उपभोक्ता एक दुकान में जाए तब खुदरा विक्रेता उन्हें यह समझा सके कि किसी दूसरे स्मार्टफोन के मुकाबले वह क्यों अलग है. "लेकिन अब भी यह एलजी के लिए कठिन लड़ाई होगी क्योंकि सैमसंग, ऐपल और सोनी का मार्केटिंग बजट ज़्यादा है."

तकनीकी शोध कंपनी गार्टनर के मुताबिक एलजी की हैंडसेट बिक्री अब लगभग दोगुनी होकर वर्ष 2013 में 46 लाख हो गई है जो वर्ष 2012 में 26 लाख स्मार्टफ़ोन तक सीमित थी.

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हालांकि इसी अवधि के दौरान दक्षिण कोरियाई स्मार्टफोन की बाजार हिस्सेदारी में मामूली तेज़ी आई और यह 3.8 फ़ीसदी से बढ़कर 4.8 फ़ीसदी हो गई और यह कंपनी सैमसंग, ऐपल और हुआवेई के पीछे चौथे पायदान पर बनी हुई है.

लेज़र निर्देशित फोन

एलजी के जी2 और सैमसंग के एस5 के मुक़ाबले जी3, 14 सेंटीमीटर स्क्रीन और 538 पिक्सल प्रति इंच की वजह से यह बड़ा दिखता है और इसका रिज़ॉल्यूशन भी ज़्यादा है.

हाई डेफ़िनिशन ब्रांड वाले स्क्रीन की तुलना में एलजी का स्क्रीन भी बेहतरीन गुणवत्ता मुहैया कराता है. इस अपग्रेड की वजह से स्मार्टफ़ोन की बैटरी चलने की रफ़्तार कम न हो जाए इसके लिए कंपनी ने क़दम उठाए हैं.

हालांकि सैमसंग की तुलना में इस स्मार्टफ़ोन के प्रमुख 13 मेगापिक्सल वाले पिछले हिस्से के कैमरे में रिज़ॉल्यूशन कम है.

लेकिन इस कैमरे को लेज़र ऑटो फंक्शन की वजह से बेहतर बनाने की कोशिश की गई है और एलजी का कहना है कि यह महज 0.276 सेकंड में ही फोकस करता है और यह मानव मस्तिष्क के संकेतों के हाथ तक पहुँचने की गति की तुलना में भी तेज़ है.

यह कम शक्ति वाली लेज़र की किरणों के ज़रिये फ़ोन और तस्वीर ली जाने वाली वस्तु के बीच की दूसरी को माप लेता है.

'बदल सकता है खेल'

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Image caption लेज़र फोकस की मदद से कम रोशनी में भी तस्वीरें ली जा सकती हैं.

एमेचर फोटोग्राफ़र पत्रिका के तकनीकी लेखक जॉन डेवो का कहना है, "मुझे याद है कि एक दशक पहले सोनी ने भी लेज़र निर्देशित ऑटोफोकस के लिए कोशिश की थी."

"ऐसी मददगार किरणों या लेज़र का एक फ़ायदा यह है कि इससे कम रोशनी में भी फोकस करने में मदद मिलती है हालांकि यह पूरी प्रक्रिया धीमी थी."

"एलजी जी3 अगर इसी काम को प्रभावी ढंग से और तेज गति से कर सकता है तो यह मोबाइल फोन फोटोग्राफी में बड़ा बदलाव ला सकता है."

कंपनी का कहना है कि यह फोन सेल्फी के लिए बेहद उपयुक्त होगा. हालांकि इस लिहाज़ से इसे हुआवेई से प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ेगा.

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