तियेनएनमेन बरसी के मद्देनज़र चीन में तनाव

  • 4 जून 2014
तियेनएनमेन चौक इमेज कॉपीरइट Getty

तियेनएनमेन नरसंहार की 25वीं बरसी पर चीनी सुरक्षाकर्मियों से बीजिंग का तियेनएनमेन चौक पट गया है.

विदेशी पत्रकारों को तियेनएनमेन चौक से दूर ले जाया गया, राहगीरों की तलाशी ली गई और उनके कागजातों की जाँच भी की गई.

हाल के सप्ताहों में दर्जनों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है ताकि बरसी के मौके पर शांति सुनिश्चित की जा सके.

तियेनएनमेन बरसीः गिरफ़्तारियों, प्रतिबंधों का दौर

साल 1989 में प्रदर्शनकारी राजनीतिक सुधार चाहते थे लेकिन सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर हुए सत्ता संघर्ष में कट्टरपंथियों की जीत के बाद उन पर कार्रवाई का आदेश दिया गया था.

सरकार 1989 के विरोध प्रदर्शन को क्रांति-विरोधी दंगों के रूप में देखती है और इसकी याद में कोई कार्यक्रम नहीं करती है.

दमन

हालांकि हांगकांग में तियेनएनमेन बरसी रैली में हज़ारों लोगों के भाग लेने की उम्मीद की जा रही है.

ताइवान में कार्यकर्ताओं के समूह भी तियेनएनमेन चौक की तस्वीर के साथ तियेनएनमेन बरसी मना रहे हैं.

ताइवान और जापान की सरकारों ने चीन से आग्रह किया है कि वह इस मौके को मानवाधिकार के प्रति अपने रवैये में सुधार के तौर पर इस्तेमाल करे.

इस आयोजन के हफ़्तों पहले से देश में वकीलों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जा रहा है.

मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक बयान में कहा है कि 66 लोगों को हिरासत में लिया गया, उनसे पूछताछ की गई या वे लापता हैं.

1989 में हुए इस जनसंहार और प्रदर्शनों से संबंधित शब्दावलियों को इंटरनेट सर्च में प्रतिबंधित कर दिया गया है और गूगल पर कथित रूप से रोक लगाई गई है.

श्रद्धांजलि

शांति के लिए नोबेल पुरस्कार जीत चुके मानवाधिकार कार्यकर्ता हू जिया ने कहा, "मुझे खेद है कि मैं श्रद्धांजलि देने के लिए चौक नहीं जा सकता." जिया ने पिछले छह साल में अपना अधिकांश समय या तो जेल में गुजारा है या नज़रबंदी में.

उन्होंने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से कहा, "मुझे ख़ुशी है कि उन घटनाओं और बलिदानों को 25 साल बाद भी याद रखा गया है."

इमेज कॉपीरइट AFP

तियेनएनमेन पर हुआ प्रदर्शन चीन में साल 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक की स्थापना के बाद कम्युनिस्ट शासन के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा प्रदर्शन था.

लोकतांत्रिक सुधारों की मांग को लेकर तियेनएनमेन चौक में लाखों लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा हुए थे.

छह हफ़्तों के विरोध प्रदर्शन के बाद 4 जून 1989 को चीनी प्रशासन ने बीजिंग की सड़कों पर सैकड़ों लोगों का दमनकर इसे दबा दिया था.

विश्लेषकों का मानना है कि प्रदर्शन की 25वीं बरसी पर होने वाला दमन पहले के वर्षों की अपेक्षा और कड़ा है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार