फ्रांसः विश्वयुद्ध के सैनिकों को याद किया गया

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फ़्रांस के नॉरमैंडी शहर में दूसरे विश्वयुद्ध के सबसे बड़े सैन्य अभियान 'डी-डे' की 70वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है. इस मौके पर फ्रांस के राष्ट्रपति फांसुआ ओलांद ने उन सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जिनकी बहादुरी और त्याग की बदौलत दुनिया ही बदल गई.

दुनिया भर के राजनेताओं और ब्रिटेन के राजशाही परिवार के साथ-साथ सैंकड़ों पूर्व सैनिकों ने भी डी-डे की 70वीं सालगिरह पर सैनिकों को अपनी श्रद्धांजलि दी.

बयेउक्स में राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद के साथ महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने डी-डे अभियान में मारे गए सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की. अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सैनिकों को याद करते हुए कहा कि आज़ादी के लिए अमरीका की प्रतिबद्धता फ्रांस के तट पर खून से लिखी गई थी.

सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए सारे नेता क्विसट्रेहम में जुटेंगे. क्विसट्रेहम उन तटों में से एक है जहां मित्र देश की टुकड़ियों ने हमला किया था.

डी-डे क्या है?

डी-डे विश्वयुद्ध के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में से एक है. यह 6 जून को मनाया जाता है.

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डी-डे का संबंध नॉरमैंडी की हुई उस लड़ाई से है जिसे अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त अभियान माना गया है.

छह जून 1944 को मित्र देशों के एक लाख 56 हज़ार सैनिकों ने जर्मन सैनिकों के ख़िलाफ़ एक अभियान में भाग लिया जिसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध को एक निर्णायक मोड़ मिला.

अभियान में भाग लेने के लिए इस दिन ब्रितानी, अमरीकी और कनाडाई सैनिक उत्तरी फ्रांस के नॉरमैंडी शहर के तटीय इलाक़े पर पहुंचे.

यह अभियान 'ऑपरेशन ओवरलॉर्ड', यानी नाजी कब्ज़् वाले यूरोप पर हमला, का पहला चरण था. इस अभियान का इरादा दूसरे विश्व युद्ध को समाप्त करना था.

सैनिकों की कुर्बानी

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पोर्टमाउथ के डी-डे संग्रहालय के अनुसार जर्मन सैनिकों के खिलाफ चलाए गए इस अभियान में पूर्व अनुमान से कहीं ज्यादा, मित्र देशों के 4413 सैनिकों की मौत हो गई थी.

डी-डे के अभियान का परिणाम ये हुआ था कि मित्र देशों की सेना फ्रांस में अपना पैर जमाने में अंतः कामयाब हो गई.

पूर्व से सोवियत सेनाओं के आने और हिटलर के गढ़ बर्लिन पर कब्जा करने के कारण अगले 11 महीनों के भीतर ही नाजी जर्मनी की हार हो गई थी.

अमरीका के युद्ध स्मारक कोलीविली-सर-मेर पर दिए गए अपने भाषण में राष्ट्रपति ओलांद ने कहा, "डी-डे में भाग लेने वाला हर सैनिक 'हीरो' है."

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उन्होंने आगे ये भी कहा कि न तो फ्रांस उन वीर सैनिकों की कुर्बानी भूलेगा और न ही वह अमरीका के साथ एकजुटता को ही भूल सकता है.

पहला हमला

डी-डे को याद करने की शुरूआत आधी रात को क्विसत्रेहम के नजदीक पिगासस पुल के पास हुई. यहां ब्रितानी सैनिकों ने मित्र देशों के अभियान की कार्रवाई शुरू करते हुए पहला हमला किया था.

बयेउक्स के 'कॉमनवेल्थ वार ग्रेव्स सिमिट्री' पर महारानी के साथ प्रिंस चार्ल्स और डचेज ऑफ कार्नवेल ने भी सैनिकों को याद किया.

'गोल्ड लैंडिंग बिचेज' के पास अरोमंचेज में ड्यूक और डचेज ऑफ कैंब्रिज भी सैनिकों को याद किए जाने वाले समारोह का हिस्सा बनेंगे. इस तट पर डी-डे के दिन सैंकड़ों ब्रितानी टुकिड़ियों ने हमला बोला था.

श्रद्धांजलि के मौके पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी प्रिंस चार्ल्स के साथ मौजूद होंगे. पहले की खबरों के अनुसार प्रिंस चार्ल्स ने अपनी कनाडा यात्रा के दौरान एक महिला से रूस के राष्ट्रपति की आलोचना की थी.

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रूस और यूक्रेन के दरम्यान जारी तनाव के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति की भी इस अवसर पर उपस्थित होने की संभावना है.

नाजी कब्जे से आज़ादी

डी-डे दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उत्तरी फ्रांस को आजाद करने के लिए चलाए गए 80 दिनों के अभियान का सूचक है.

माना जाता है कि डी-डे के दिन चलाए गए इस अभियान में मित्र देशों के 2,500 से 4000 और लगभग 9000 जर्मन सैनिकों मारे गए थे.

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इस दिन ब्रिटेन, अमरीका और कनाडा के एक लाख 56 हजार सैनिकों ने उस नॉरमैंडी तट पर आक्रमण किया था जो दूसरे विश्व युद्ध के निर्णायक मोड़ों में से एक माना जाता है.

इतिहासकार एंटोनी बीवर ने बीबीसी को बताया, "असल में नाजी कब्जे से पश्चिमी यूरोप को आज़ादी इन्हीं तटों पर मिली."

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