ऑस्ट्रेलिया में शरण के लिए क्रिकेट का सहारा

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ओशियन 12 यानी खेल जांबाज़ों की टीम. यह टीम सिडनी की उपनगरीय लीग में लोगों पर अपनी छाप छोड़ने के लिए तैयार है.

खास बात यह है कि यह टीम ऐसे तमिल युवाओं से बनी है, जो ऑस्ट्रेलिया में शरण पाना चाहते हैं. अब वो ग्लोबल क्रिकेट कॉम्पीटिशन के फ़ाइनल में जगह बनाने के लिए जी-जान लगा देंगे.

ओशियन 12 शरणार्थियों की टीम है. ये युवा नावों से ऑस्ट्रेलिया पहुंचे. फिलहाल उन्हें अस्थायी वीज़ा देकर आव्रजक हिरासत से रिहा किया जा चुका है.

वो बेताबी से यह सुनने को लालायित हैं कि उनका शरणार्थी होने का दावा सफल रहा है.

उथय कुमार एक उभरते तेज़ गेंदबाज़ हैं. अपने स्कूल के दिनों में वह तब गोलीबारी में घायल हो गए थे, जब उनके स्कूल पर हमला हुआ था. उनके घुटने में चोट आई थी.

टीम के युवाओं में कोई शारीरिक दिक़्क़तों से पार पाकर यहां तक पहुंचा, तो कोई अतीत के मनोवैज्ञानिक घावों को भरने की कोशिश में जुटा है.

26 वर्षीय स्टीफ़न पहले 18 महीने इंडोनेशिया में रहे. फिर स्मगलरों के इस्तेमाल में लाई जाने वाली बड़ी नौका से ऑस्ट्रेलिया रवाना कर दिए गए.

वे कहते हैं, ''मैं वापस श्रीलंका नहीं जाना चाहता. उन हालात के बारे में सोचने पर ही मैं पागल हो जाता हूं.''

एक दुभाषिए के ज़रिए वे बताते हैं, ''उस नाव में मैं 18 दिन रहा. शुरुआती कुछ दिन बहुत मुश्किल भरे थे. मुझे उल्टियां हो रही थीं. मैं कुछ खा नहीं पा रहा था.''

''जब मैंने ऑस्ट्रेलियाई नौसेना को देखा और खुद को क्रिसमस द्वीप पर पाया, तो लगा मानो नई ज़िंदगी मिल गई.''

इस प्रशिक्षु इंजीनियर ने बताया कि उन्हें यातनाएं दी गईं पर उनका कहना था कि उन्हें एक खुश और शांतिपूर्ण ज़िंदगी चाहिए.

बराबरी

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वे कारागार में थे और महज़ एक फ़ोन पर उनका निर्वासन हो सकता है. क्रिकेट अब उनके लिए तनाव से निजात पाने का बेहतरीन साधन बन गया है.

ग्लोबल टी-20 प्रतियोगिता करने वाले लास्ट मैन स्टैंड्स के सिडनी लीग मैनेजर दीनू राजारत्नम कहते हैं, ''ये खेल उन्हें महसूस कराता है कि वो उस समुदाय का हिस्सा हैं, जिसका हिस्सा वो बनना चाहते हैं.''

''यहां उन्हें वाकई एक अवसर मिल रहा है, जो मैदान में हर किसी को मिलता है. वो बराबर हैं, वो मुकाबला कर रहे हैं. उन्हें छक्का या चौका मारने या विकेट लेने के सबके बराबर अवसर हैं.''

शरण चाहने वालों को हिरासत में लेने की ऑस्ट्रेलियाई नीति के तहत पकड़ा गया. उनके स्वास्थ्य की जांच-पड़ताल तो हुई ही, साथ ही उन्हें सुरक्षा जांच से भी गुज़ारा गया.

स्टीफ़न को पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और हिंद महासागर में मौजूद क्रिसमस आइलैंड के कर्टिन आव्रजक गृह में क़रीब पांच महीने क़ैद में रखा गया.

उनका अनिवार्य कारावास 1990 के शुरू में आरंभ हुआ. आव्रजक हिरासत की नीति हालांकि काफी विवादित है. आलोचक इसे ग़लत और अमानवीय कहते हैं, पर कई लोग मानते हैं कि देश की सीमाएं सुरक्षित रखने के लिए यह ज़रूरी है.

उनका मानना है कि ये नीति उन लोगों को रोकने के लिए भी ज़रूरी है, जो ज़िंदंगी दांव पर लेकर नाव के ज़रिए ऑस्ट्रेलियाई समुद्री तटों पर पहुंचने की कोशिश करते हैं.

ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने थिंक टैंक 'सिडनी इंस्टीट्यूट' के प्रमुख गेरार्ड हेंडरसन कहते हैं, ''सरकार नहीं चाहती कि लोग यहांग़ैरक़ानूनी तरीके से आएं या यहां आते हुए उनके समुद्र में डूबने का खतरा हो.''

''हम मानते हैं कि लोग यहां संयुक्त राष्ट्र रिफ़्यूजी सिस्टम के तहत आएं, न कि स्मगलरों के ज़रिए भेजे जाएं. हमें सीमा की सुरक्षा की चिंता है.''

वे कहते हैं, ''कुछ लोग ग़लत तरीक़े से ऑस्ट्रेलिया को नस्लवादी देश के रूप में पेश करते हैं. जो भी यहां रहता है या यहां की यात्रा कर चुका है, वह जानता है कि ऐसा नहीं है.''

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सिडनी के किंग्स लेंग्ले ज़िले के पीयर्स रिज़र्व में ओशियन 12 अपने क्रिकेट प्रदर्शन से धूम मचाए हुए है. सीमा रेखा के मैच का आनंद ले रहे 'लास्ट मैन स्टैंड्स' के रॉब स्टीवेंसन कहते हैं, ''ये तमिल युवा अपने खेल से लोगों का दृष्टिकोण बदल रहे हैं.''

''कुछ टीमें बहुत जुझारू होती हैं. श्वेत ऑस्ट्रेलियाइयों का रुख आमतौर पर राजनीतिक शरणार्थियों के प्रति नकारात्मक रहता है. जब उन्हें ओशियन 12 की जानकारी दूसरी टीमों से मिल रही है, तो दृष्टिकोण बदल रहा है.''

क्रिकेट ने दी राहत

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ये टीम ब्लू माउंटेन शरणार्थी सपोर्ट ग्रुपकी मदद से तैयार की गई. ब्रिटेन में जन्मी ग्रुप की प्रवक्ता एन मैरी क्लिफ़टन कहती हैं, ''रोज़ की अनिश्चिय भरी ज़िंदगी के बावजूद क्रिकेट में राहत वाला प्रभाव है.''

''जब हमने शुरू किया, तो इन लोगों को वाकई ज़्यादा अंदाज़ नहीं था. वो ज़्यादा असर भी नहीं छोड़ पाते थे. अब वो बेहतर कर रहे हैं, आत्मविश्वास से भरे हैं. शर्मीले होने के बाद भी हँस रहे हैं. क्रिकेट ने वाकई उनकी मदद की है. अब हम एक और टीम चाहते हैं- शरणार्थियों के लिए नेटबाल की लड़कियों की टीम और एक फ़ुटबाल टीम. जो इसी तरह बढ़िया प्रदर्शन करे.''

खेल और सौहार्द्र किस तरह चीज़ों को बदल सकता है- ओशियन 12 इसका उदाहरण है.

उनका लक्ष्य अगले महीने बारबेडॉस में होने वाली लास्ट मैन स्टैंड्स वर्ल्ड चैंपियनशिप में पहुंचना है.

लेकिन उनकी आखिरी जीत क्रिकेट से परे है और ये आव्रजन अधिकारियों के हाथ में है कि क्या वो ये तय करेंगे कि ये खिलाड़ी स्थाई तौर पर ऑस्ट्रेलिया में रह सकते हैं और नए सिरे से ज़िंदगी को खड़ा कर सकते हैं.

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