भारत-चीन संबंधों को चीनी मीडिया ने सराहा

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चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत की नई सरकार के साथ उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेने दिल्ली आए हुए हैं. चीनी अखबारों ने दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों का स्वागत किया है.

वांग यी ने रविवार को भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की. मुलाक़ात के दौरान व्यापार और निवेश सहित कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को सुधारने के विभिन्न तरीकों पर चर्चा की गई.

रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस साल भारत दौरे पर आने की घोषणा की है.

भारत के नए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनावों में भारी जीत हासिल की.

मोदी ने वादा किया कि वे अपने कार्यकाल के दौरान अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और चीन के साथ संबंधों को आगे ले जाएंगे.

आर्थिक सहयोग

चीन के प्रमुख अखबार 'यूथ डेली' का मानना है कि भारत की कमजोर हो रही अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत करने का काम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'पूर्णतः संभव' है.

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अखबार लिखता है, “चीन-भारत मुकाबला बिलकुल फुटबॉल मैच की तरह है. चीन मैच के पहले हाफ में बढ़त लिए हुए है. मोदी युग आने के कारण भारत की शुरुआत मैच की दूसरे हाफ में हो रही है. कमजोर शुरुआत के बावजूद ये पूरी तरह संभव है कि भारत पहले के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करे.”

चाइना इंस्टीच्यूट ऑफ कंटेंपोरेरी इंटरनेशनल रिलेशन में दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञ ने 'चाइना डेली' को बताया कि भारत चीन से 'सबक' ले.

वे कहते हैं, "भारतीय अर्थव्यवस्था चीन-भारत के आपसी आर्थिक सहयोग के बल पर ही आगे बढ़ सकती है. साथ ही, ये भी जरूरी है कि मोदी चीन के सुधार के अनुभवों और खुली रणनीति से सबक ले."

चीनी इंटरनेट पर जारी एक लेख में कहा गया है कि चीन और भारत दोनों ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में एक ही दृष्टिकोण अपनाया है, और इसलिए दोनों देशों के बीच किसी तरह के मतभेद की कोई जमीन नहीं बचती.

लेख में इस बात पर भी चर्चा की गई है कि जापान भी भारत के साथ नजदीकी संबंध स्थापित करना चाहता है, लेकिन साथ में लेख ये भी कहता है कि भविष्य में चीन-भारत संबंध नई उंचाइयों को छूने वाले हैं.

क्षेत्रीय सुरक्षा और संप्रभुता

इंटरनेट पर जारी इस लेख में कहा गया है, “चीन-भारत के आर्थिक सहयोग को सुस्त वैश्विक अर्थव्यवस्था और करीब लाएगी…लेकिन यदि जापान के कारण चीन-भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों में किसी तरह के टकराव के हालात पैदा होते हैं तो इससे चीन के साथ ही साथ भारत के विकास में भी रुकावट आएगी.”

विश्लेषकों ने 'ग्लोबल टाइम्स' को बताया है कि मोदी अभियान के दौरान चीन-भारत सीमा विवाद पर कड़े रुख अपनाए जाने के बावजूद इस मसले को हल करने के लिए व्यावहारिक नजरिया अपनाने की जरूरत है.

मेरीलैंड के जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में अतिथि स्कॉलर लोंग झिंगचुन कहते हैं, "क्षेत्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के मामले में, विशेषकर पश्चिमी चीन के लिए, भारत एक महत्वपूर्ण कारक है. भारत को भी विकास के लिए जरूरी सुरक्षा के माहौल को बनाने और कायम रखने के लिए चीन के सहयोग की जरूरत है."

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