फ़ुटबॉल विश्व कप के प्रायोजक नई भूमिका निभाने को तैयार

  • 11 जून 2014
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विश्व कप फ़ुटबॉल को प्रचार-प्रसार के लिए दुनिया भर से मिलने वाला धन फ़ीफ़ा को कंपनियों की ओर से मिलने वाले धन की तुलना में काफ़ी अधिक है.

इस साल विश्व कप के प्रायोजक इस विशाल खेल आयोजन के वित्तीय समर्थक के रूप में अपनी भूमिका के साथ-साथ ग़ैर वाणिज्यिक, सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी जागरूक है.

इसे सोनी के 2022 का विश्व कप क़तर को देने के लिए मचे बवाल में शामिल होने के रूप में देखा जा सकता है.

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एक अन्य बड़े प्रायोजक एडिडास का कहना है कि यह मसला "ना ही फ़ुटबॉल के लिए और ना ही फ़ीफ़ा और उसके सहयोगियों के लिए अच्छा है."

एक और बड़े प्रायोजक कोका कोला का कहना है कि टूर्नामेंट के दौरान ब्राज़ील में एक बार फिर से सामाजिक अशांति का फैलना ब्रांडिंग संदेश को कमज़ोर करनी की तैयारी है.

यथार्थवादी दृष्टिकोण

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स्पोर्ट्स प्रायोजक एजेंसी ब्रांड रैपोर्ट के निगेल करी का कहना है, "कंपनियां और ब्रांड जागरूक हो रहे हैं और आम लोगों को यह दिखाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं कि प्रायोजक होने के सामाजिक पहलू भी है. जब कंपनियां विश्व कप जैसे अहम खेल आयोजनों में शामिल रहता है तो दुनिया भर में इसकी जानकारी रहती हैं और दुनिया के प्रति अधिक यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाता है ताकि लोग सम्मान कर सकें. "

इसलिए अब जब 2014 के विश्व कप टूर्नामेंट में कुछ ही दिन बचे रह गए हैं तो इसके मायने यह है कि सिर्फ़ 32 देश ही अपनी रणनीतियों के साथ इसमें हिस्सा नहीं ले रहे हैं बल्कि 22 कॉर्पोरेट समर्थक भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं.

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ब्राज़ील के एक विशेषज्ञ के मुताबिक़ बड़े नामी प्रायोजक अपने स्वभाव से विपरीत रक्षात्मक तरीक़े से खेल रहे हैं.

रियो डी जनेरियो आधारित खेल मार्केटिंग सलाहकार आमिर सोमोगी कहते हैं, "प्रायोजकों के विश्व कप का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होने को लेकर कोई विवाद नहीं है. हालांकि कुछ लोग सड़कों पर विरोध कर रहे हैं और विश्व कप में लगने वाले लागत के लिए प्रायोजक पर दोष डाल रहे हैं."

वैश्विक खेल की दुनिया के दो सबसे बड़े आयोजनों में से इस एक के साथ अपना नाम जोड़ने के लिए आठ मिलियन पाउंड से लेकर 120 मिलियन पाउंड तक का भुगतान किया है.

कमाई

दक्षिण अफ़्रीक़ा में हुए पिछले विश्व कप के दौरान 3.2 अरब से ज़्यादा लोगों ने दुनिया भर में टीवी पर विश्व कप देखा है.

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आयोजन के साथ जुड़े कंपनियों को अधिकार बेच कर फ़ीफ़ा भी लाभान्वित हुआ है. फ़ीफ़ी के चार साल के विश्व कप के चक्र के दौरान 850 मिलियन पाउंड कमाने का अनुमान है.

इस पर बहुत ज़ोर नहीं देने के बावजूद प्रायोजकों का मुख्य उद्देश्य है कि वे फ़ुटबॉल प्रेमियों को अपने ब्रांड पर ज़्यादा पैसे ख़र्च करने के लिए बढ़ावा दे.

खेल मार्केटिंग अनुसंधान कंपनी रेपूकॉम के विश्व फ़ुटबॉल रिपोर्ट के अनुसार 2010 के आयोजन के दौरान विश्व स्तर पर प्रायोजकों ने 4.12 बिलियन डॉलर कमाया था.

इस राशि में से 907 मिलियन अकेले फ़ाइनल मुक़ाबले में कमाया गया था.

इस वर्ष भी सोशल मीडिया के माध्यम से ब्रांड को बढ़ावा देने के मामले में इज़ाफ़ा होने की उम्मीद है.

मिलवार्ड ब्राउन ऑप्टीमोर की ब्रांड विशेषज्ञ अनास्तासिया कुवरोवसकिया इससे सहमत है कि सोशल मीडिया "अनोखा और ज़्यादा विस्तृत माध्यम प्रदान करता है लेकिन बदले में "यह अच्छी तरह से डिज़ाइन और सुविचारित दृष्टिकोण की मांग करता है."

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