फुटबॉल से तपता चीन, बीमारियां की अर्ज़ियां बढ़ीं!

  • 14 जून 2014
चीन का एक शख़्स नकली ख़ुशी मनाते हुए इमेज कॉपीरइट AFP

चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स का शीर्षक था, "फ़ुटबॉल के बुखार से बढ़ी बीमारी की अर्ज़ियां."

अख़बार में इस बात का हवाला दिया था कि चीन और ब्राज़ील के बीच 11 घंटे का समय अंतराल है. यानी ब्राज़ील में जब खेल शुरू होता है तो चीन में रात के बारह से सुबह के छह बजे का समय होता है. अख़बार के अनुसार इस कारण चीन में कई ऑनलाइन कंपनियाँ बीमारी का नकली प्रमाणपत्र उपलब्ध करा रही हैं ताकि फ़ुटबॉल के शौकीन छुट्टी ले सकें.

जाहिर है, चीन में फ़ुटबॉल के प्रशंसकों की अच्छी ख़ासी संख्या है.

यह अलग बात है कि फ़ुटबॉल विश्व कप में चीन का प्रदर्शन कभी ख़ास नहीं रहा है. चीन अब तक केवल एक बार ही 2002 में विश्व कप के लिए क्वॉलीफाई कर सका है.

दक्षिण अफ्रीका में 2010 में हुए विश्व कप में चीन दर्शकों की संख्या के आधार पर सबसे अव्वल रहा था. उस साल चीन में औसतन हर लाइव मैच को एक करोड़ 75 लाख दर्शकों ने देखा था. ध्यान रहे कि दक्षिण अफ्रीका का चीन से समय अंतराल और ब्राज़ील से चीन का समय अंतराल ज़्यादा अलग नहीं है.

चीन में फ़ुटबॉल की दीवानगी तो समझ में आती है लेकिन बीमारी के जाली प्रमाणपत्र बनाने और बनवाने वालों की संख्या कहाँ से आ गई?

पसंदीदा बीमारी, पसंदीदा अस्पताल

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नकली चीज़ें बनाने में चीन की महारथ से सब वाकिफ हैं. चीन में बनने वाले नकली बैग, घडि़याँ और कार इत्यादि की चर्चा पुरानी हो चुकी है. हाल में आई एक ख़बर से चीन में मौजूद एक नकली संयुक्त राष्ट्र शांति बल का पता चला.

इसलिए बीमारी का नकली प्रमाणपत्र उपलब्ध करानी वाली ऑनलाइन सेवा को खोजना ज़्यादा मुश्किल नहीं था.

कुछ ही मिनटों में हमसे पूछा गया कि आप किस बीमारी का चुनाव करना चाहेंगे और किस अस्पताल का प्रमाण पत्र आपको चाहिए.

तक़रीबन एक घंटे बाद मोपेड पर सवार एक व्यक्ति असली जैसा दिखने वाला हमारा नकली प्रमाणपत्र हमें सौंप गया. कुल ख़र्च आया मात्र 16 डॉलर (तक़रीबन 950 रुपये).

लेकिन क्या ऐसा नकली प्रमाणपत्रों की मांग विश्व कप के कारण बढी है, जैसा कि ग्लोब टाइम्स ने अपनी ख़बर में कहा है?

हमारे डीलर ने इससे इनकार किया. लेकिन एक दूसरे डीलर ने यह बात मानी कि विश्व कप की वजह से कारोबार में थोड़ी तेज़ी आई है.

'बीमार' पत्रकार

लेकिन यह भी संभव है कि इस तेज़ी में शरारती फ़ुटबॉल प्रशंसकों का हाथ में न हो, बल्कि मेरे जैसे पत्रकार इसके लिए ज़िम्मेदार हों जो यह साबित करना चाहते हों कि चीन में बीमारी का नकली प्रमाणपत्र हासिल करना कितना आसान है.

चीन में मौजूद विदेशी पत्रकारों का सरसरी तौर पर जायजा लेने के बाद मुझे बहुत ही निराशा के साथ बताना पड़ रहा है कि शंघाई में मौजूद 'द टेलीग्राफ़' के एक शख़्स को सांस संबंधी संक्रमण है.

वहीं अमरीका के सरकारी रेडियो के संवाददाता को पेट में जलन की शिकायत है (जो आने वाले रविवार से शुरू होने वाली है) और एनबीसी न्यूज़ के चीन कार्यालय के किसी शख़्स को भयानक अपेंडिसाइटिस है.

उम्मीद है, ये सारे बीमार जल्द ही स्वस्थ हो जाएंगे.

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