एक घर में दो बाघ और वे चार महीने

ऑस्ट्रेलिया चिड़ियाघर के दो शावक घर में इमेज कॉपीरइट

ऑस्ट्रेलिया में उत्तरी ब्रिसबेन के एक चिड़ियाघर में विलुप्तप्राय सुमात्रा बाघ के दो शावकों का जन्म हुआ. बाघों की इस प्रजाति को संरक्षण देने के लिए एक अनोखी पहल की गई.

स्पॉट और स्ट्राइप बाघ के ऐसे पहले बच्चे हैं जो ऑस्ट्रेलिया के चिड़ियाघर में जन्मे. चार महीनों के लिए इन्हें चिड़ियाघर के सुपरवाइजर गाइल्स क्लार्क के घर भेज दिया गया. पढ़िए उनके अनुभव उनकी ही कलम से.

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सुमात्रा के जंगलों में जन्म लेने वाले बाघों के एक तिहाई बच्चे चिड़ियाघर की चारदीवारी में ज़िंदा नहीं रह पाते. इसलिए मैंने तय किया कि उन्हें अपने घर पर चौबीस घंटे निगरानी में रखूंगा.

उन्हें कोई दिक़्क़त न हो इसके लिए मैंने अपने घर में कुछ ख़ास बदलाव किए. लिविंग रूम का कालीन हटाया और आरामदेह सिंथेटिक फ़र्श बिछावाया. खुले घर में कुछ बाड़ भी लगाई.

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आकार में बेहद छोटे और वजन में मात्र ढाई किलो के होने के कारण बाघ के इन बच्चों से मुझे कोई ख़तरा महसूस नहीं हो रहा था. मेरी चप्पलों को कुतरने से ज़्यादा वे कुछ नहीं कर सकते थे.

जैसे-जैसे वे बड़े होते गए, तंदुरुस्त होते गए. मैंने और मेरे परिवार ने उन्हें दिन में पूरे घर में घूमने की आज़ादी दे दी लेकिन उनकी शरारतों के कारण हम रात उन्हें एक बड़े कमरे में बंद कर देते थे.

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जब सुबह होती तो उस कमरे का नज़ारा यूं होता मानो वह जंगल का कोई कोना हो.

उनके साथ एक से एक अनोखे अनुभव हुए. हम जब उन्हें पुराने सोफे पर बिठा देते, वे कुछ मिनटों में ही सोफ़े को यूं चीर-फाड़ देते थे मानो वह किसी मृत जानवर की देह हो.

बाघ के इन बच्चों की दोस्ती हमारे कुत्ते सीजर और रूबी से भी हो गई थी. वे उनके साथ खूब खेलते.

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स्पॉट और हमारे बीच पहले दिन से ही गहरा नाता बन गया था. बाद में वह हमसे ख़ास तवज्जो और सहूलियतें चाहने लगा था. स्ट्राइप ज़्यादा शरारती और चंचल था.

मेरे परिवार ने उनकी देखभाल और पालन-पोषण में काफ़ी मदद की. 'टाइगर मिल्क' वाले वे विशाल बॉक्स. उनके बेबी बॉटल को धोना और स्टरलाइज करना, फ़र्श को साफ़ करना हमें थका देता था.

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कई बार मैं उनकी देख-रेख करते करते ऐसा थक जाता था जितना कोई इंसान के दो बच्चों को पालते हुए थक जाता है.

बेशक ये काफ़ी कठिन था, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि मैंने सही काम किया. बाघों के संरक्षण में ये महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले हैं. और मुझे उम्मीद थी कि सुमात्रा के बाघों की दुर्दशा के बारे में इससे लोग भी जागरुक भी होंगे.

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आदर्श स्थिति में मैं बाघ के बच्चों को जंगल में ही रखने का हिमायती हूं. लेकिन दुर्भाग्य से जंगल उनके लिए उपयुक्त नहीं है. यहां उन पर बंदूक का ख़तरा लगातार मंडराता रहता है. विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके बाघ के इन बच्चों की ये सबसे अच्छी ज़िंदगी होगी जो हम उन्हें दे सकते हैं.

चार महीनों में स्पॉट और स्ट्राइप ने दरवाजा खोलना और कूद कर बाड़े को पार करना सीख लिया था. उनके चिड़ियाघर लौटने का वक़्त आ पहुंचा था.

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