इराकः मोसूल पर क़ब्जे में मदद से कुर्दों का इनकार

  • 17 जून 2014
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कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार के प्रमुख ने कहा है कि कुर्दिश पेशमेर्गा फौज सुन्नी चरमपंथियों के कब्जे से मोसूल को मुक्त करवाने में इराकी सेना की कोई मदद नहीं करेगी.

नेशिरवन बरज़ानी ने बीबीसी को बताया है कि उनकी पहली प्राथमिकता उत्तर-पूर्व में केआरजी स्वशासित इलाकों की रक्षा करना है.

उन्होंने इराक़ के अरब मूल के सुन्नियों को भी उनका स्वायत्त क्षेत्र देने की मांग भी की.

पिछले हफ्ते पेशमेर्गा लड़ाकों ने जिहादियों के आगे बढ़ने की सूरत में इराकी सैनिकों द्वारा खाली किए गए कई शहरों और कस्बों पर नियंत्रण कर लिया था.

नियंत्रण में लिए क्षेत्रों में किरकुक शहर भी शामिल है. तेल बहुल प्रांत तमीम से घिरा शहर किरकुक केआरजी और बगदाद में अरब नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के बीच चल रहे राजनीतिक और आर्थिक विवाद का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है.

'गलत नीति'

इरबिल में बीबीसी के जिम म्यूर से बात करते हुए बरज़ानी ने इस बात पर जोर दिया कि अब कुर्दों की पहली प्राथमिकता अपने स्वायत्तशासी क्षेत्रों की रक्षा करना है.

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उनके पास लगभग 75 हज़ार सैनिक हैं मगर उनका कहना था कि इस्लामिक स्टेट इन इराक़ ऐंड द शाम (आईएसआईएस) को अरब मूल के सुन्नियों के इलाक़े से बाहर निकालने के काम में वह उनका इस्तेमाल नहीं करेंगे क्योंकि ये सिर्फ़ आतंकवाद का सवाल नहीं है.

कुर्दों का लंबे समय से किरकुक को लेकर इराक़ी शासन से विवाद रहा है. वे उसके अपने स्वायत्तशासी क्षेत्र में होने का दावा करते रहे हैं.

कुर्द स्वायत्त क्षेत्र केआरजी के प्रधानमंत्री ने मौजूदा संकट के लिए इराक़ में शिया प्रधानमंत्री नूरी मलिकी द्वारा अपनाई गई नीतियों को जिम्मेदार बताया है. नूरी मलिकी पर अरब मूल के सुन्नियों के ख़िलाफ भेदभाव करने और शक्ति के केंद्रीकरण का आरोप है.

वे कहते हैं, "बात केवल आईएसआईएस की नहीं है. यह सुन्नी इलाकों को लेकर इराक़ सरकार की गलत नीतियों का परिणाम है. अब बात उपेक्षित महसूस कर रहे सुन्नी समुदाय के बारे में है."

स्वायत्त सुन्नी अरब क्षेत्र

कुर्दिस्तान के राष्ट्रपति मसूद बरज़ानी के भतीजे बरज़ानी को लगता है कि अब इराक पहले जैसा कभी नहीं हो पाएगा.

वे कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि अब इराक में मोसूल का रह पाना संभव है. जैसा मैंने कहा- मोसूल के पहले का इराक, और मोसूल के बाद का इराक. इसलिए हमें अब मिल-बैठ कर ये सोचना है कि साथ रहने के लिए क्या किया जाना चाहिए. लेकिन यदि हम ये सोचते हैं कि इराक मोसूल के पहले वाला इराक बन सकता है, तो मेरे मुताबिक ये लगभग असंभव है."

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उनका कहना है कि इस संकट का हल एक स्वायत्त सुन्नी अरब क्षेत्र ही हो सकता है.

वे आगे कहते हैं, "हमें फैसला सुन्नी क्षेत्र पर छोड़ देना होगा. हमारी समझ से, सबसे बेहतर विकल्प है कि सुन्नियों का अपना क्षेत्र हो, जैसा हमारा कुर्दिस्तान में है."

उन्होंने कहा, "कुर्दों तथा यहां तक कि शिया समूहों और मलिकी के बीच अब किसी तरह का भरोसा नहीं बचा है. इसलिए मेरे विचार से इस संकट का कोई राजनीतिक हल अब मुश्किल है."

सूचना के अनुसार ईरान कुर्द पर दबाव डाल रहा है कि वे आईएसआईएस और इसके सहयोगियों के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान में शामिल हो. लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कुर्द इराक़ सरकार में बदलाव के बिना इस विषय पर विचार तक करने को तैयार नहीं हैं.

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