डाक टिकट, जिसकी कीमत है 57 करोड़ रुपये

ब्रिटिश गयाना का वन-सेंट मजेंटा डाक टिकट इमेज कॉपीरइट AFP

न्यूयार्क में एक नीलामी के दौरान 19वीं शताब्दी के एक दुर्लभ डाक टिकट को रिकॉर्ड 95 लाख डॉलर या करीब 57 करोड़ रुपये में बेचा गया.

इस डाक टिकट को दक्षिण अमरीका के ब्रिटिश उपनिवेश ब्रिटिश गिआना ने जारी किया था.

नीलामी घर सूदबी ने बताया कि किसी भी डाक टिकट के लिए एक नया रिकॉर्ड बनाने के साथ ही ये वजन और आकार के लिहाज से दुनिया की सबसे महंगी वस्तु बन गया है.

ब्रिटिश गिआना के वन-सेंट मजेंटा डाक टिकट की नीलामी में केवल दो मिनट का समय लगा. हालांकि इस डाक टिकट को ख़रीदने वाले का नाम अभी ज़ाहिर नहीं किया गया है.

इस नीलामी से पहले भी इस डाक टिकट को तीन बार बेचा जा चुका है और हर बार इसने ब्रिकी का एक नया रिकॉर्ड बनाया.

इसकी चौड़ाई 2.5 सेंटी मीटर और लंबाई 3.2 सेंटी मीटर है, और इसे 1986 के बाद से सार्वजनिक तौर से प्रदर्शित नहीं किया गया है.

सर्वाधिक कीमती

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सूदबी ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि इस डाक टिकट को दुनिया में सर्वाधिक प्रसिद्ध और सर्वाधिक कीमती माना जाता है.

डाक टिकट मजेंटा या रानी रंग के कागज़ पर छपा है, इस पर एक तीन मस्तूलों वाला जहाज़ बना हुआ है और उपनिवेश का मोटो छपा है, "वी गिव एंड एस्पेक्ट इन रिटर्न" यानी हम देते हैं और बदले में उम्मीद भी रखते हैं.

इस डाक टिकट को उस समय जारी किया गया था जब लंदन से टिकटों की खेप आने में देरी हुई और उपनिवेश के पोस्टमास्टर से कहा गया कि खेप आने तक वो तीन डाट टिकट छाप लें.

इसके बाद तीन डाक टिकटों, वन-सेंट मजेंटा, फ़ोर-सेंट मजेंटा और फ़ोर-सेंट ब्लू की छपाई हुई, लेकिन माना जाता है कि अब सिर्फ एक वन-सेंट मजेंटा ही बचा है.

इस डाक टिकट के अंतिम मालिक जॉन डू पोंट थे, जिन्हें 1997 में ओलंपिक के एक चैंपियन पहलवान की हत्या का दोषी पाया गया था और 2010 में कैद के दौरान ही उनकी मौत हो गई.

इस डाक टिकट की बिक्री से मिली धनराशि का एक हिस्सा यूरेशियन प्रशांत वन्यजीव संरक्षण फ़ाउंडेशन को दान किया जाएगा.

इस डाट टिकट को 1980 में रिकॉर्ड 9.3 लाख डॉलर में खरीदा गया था.

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