श्रीलंकाः निर्वस्त्र और बेहोश मिला बौद्ध भिक्षु

श्रीलंका, बौद्ध भिक्षु

श्रीलंका में चरमपंथी बौद्ध समूह के एक प्रखर आलोचक बौद्ध भिक्षु को कोलंबो के पास गंभीर रूप से घायल पाया गया है.

वाताराका विजिथा थेरो को पानादुरा ज़िले में निर्वस्त्र और अचेत हालत में पाया गया. उनके शरीर पर कई जगह चोटें भी मिलीं.

वो बोदु बाल सेना (बौद्ध ब्रिगेड-बीबीएस) के मुखर आलोचक रहे हैं.

हमले से डरी श्रीलंकाई पत्रकार ने देश छोड़ा

एक दक्षिणी कस्बे में इस संगठन की रैली के कारण रविवार रात को मुस्लिम विरोधी दंगे भड़क गए थे.

श्रीलंका में सालों बाद हुई इस तरह की सांप्रदायिक हिंसा में चार लोग मारे जा चुके हैं.

कोलंबो में मौजूद बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैविलैंड के अनुसार, हालांकि श्रीलंका के सोशल मीडिया में इस हिंसा को लेकर काफ़ी बहस हो रही है, लेकिन कुछ अपवादों को छोड़ दें तो यहां की मुख्य धारा के मीडिया संस्थानों ने इस पर बहुत कम तवज्जो दी.

मीडिया में चुप्पी

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यहां तक कि इन घटनाओं को कवर करने के लिए पत्रकारों को भी नहीं भेजा गया.

मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार, बीबीएस ने भिक्षु पर हमले के पीछे अपना हाथ होने का खंडन किया है.

वाताराका विजिथा थेरो ने मुस्लिमों के समर्थन में बयान दिया था. उन्होंने पुलिस से जान से मारने की धमकी मिलने की भी शिकायत दर्ज कराई थी.

लाशें बरसों पहले से मिलती रही हैं: महिंदा राजपक्षे

घरों और व्यावसायिक संस्थानों पर अधिकांश हमले अलुथगामा कस्बे के वेलिपेन्ना गांव में हुए, जहां रविवार को रैली आयोजित हुई थी.

दक्षिण में दो अन्य कस्बों में भी मुस्लिमों के व्यवसाय पर हमले हुए. अलुथगामा के पास एक फार्म में तमिल अल्पसंख्यक समुदाय का निहत्था सुरक्षा गार्ड मारा गया.

फार्म पर जब बौद्ध भीड़ का हमला हुआ तो उसकी पीट-पीट कर हत्या कर दी गई जबकि गार्ड का सिंघली साथी बुरी तरह घायल हो गया है. एक अनुमान के अनुसार भीड़ में 50 से 120 लोग थे.

हमारे संवाददाता के अनुसार, चरमपंथी बौद्ध समूह से भिड़ंत में मुसलमान समुदाय से आने वाले तीन लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी गई.

सरकार पर आरोप

बीबीएस को श्रीलंका के प्रभावशाली रक्षा सचिव और राष्ट्रपति के भाई गोताभाया राजपक्षे का खुला समर्थन प्राप्त है.

बुधवार को राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने दंगाग्रस्त इलाका बेरूवाला का दौरा किया और ध्वस्त हो चुकी इमारतों के पुनर्निर्माण में सैन्य मदद का आश्वासन दिया.

लेकिन उनकी कैबिनेट के अधिकांश मुस्लिम मंत्रियों ने संसद का बहिष्कार किया और कहा कि उनकी अपनी सरकार ने हिंसा को रोकने के लिए कुछ नहीं किया.

'श्रीलंका के ख़िलाफ़ प्रस्ताव लाए भारत'

पिछले कुछ सालों से सिंघली बौद्ध पुनरउत्थानवादी समूह मुस्लिम विरोध में प्रदर्शन करते रहे हैं. इन प्रदर्शनों की अगुवाई सामान्य तौर पर भिक्षु करते रहे हैं.

मुस्लिम समुदाय ने सरकार से बौद्ध समूहों की ओर से होने वाले हमलों से बचाने की अपील की है. कुछ बौद्ध समूहों ने अल्पसंख्यकों पर बहुत ज़्यादा अधिकार लेने का आरोप लगया है.

देश के बौद्ध बहुल आबादी में मुस्लिमों की संख्या 10 प्रतिशत है.

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