इसराइली किशोर लापता, तनाव चरम पर

  • 21 जून 2014
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क़रीब एक हफ़्ते इसराइल के 16 साल के नफ़्ताली फ्रेकेल, 16 साल के गिलाड शएर और 19 साल के इयाल येफ्रैक अधिकृत पश्चिमी तट के व्यस्त इलाक़े सड़क संख्या-60 से लापता हैं.

ये किशोर हेब्रॉम और इसके आसपास की बस्ती के यहूदी मदरसे से अपने घरों को लौट रहे थे.

नफ़्ताली की आंटी इत्तायेल फ्रेंकेल ने बीबीसी को बताया, "वे तीन मासूम बच्चे हैं. वे तो बस स्कूल से घर लौट रहे थे. तब से उनका कोई अता-पता नहीं है. हमें उनकी चिंता हो रही है."

इसराइल ने लापता किशोरों की तलाश के लिए 'ब्रदर्स कीपर' नाम से एक व्यापक अभियान छेड़ रखा है.

इस सिलसिले में अब तक 300 से ज्यादा फ़लस्तीनियों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. इसमें से अधिकांश का संबंध फ़लस्तीनी संगठन हमास से है.

इसराइल ने हमास पर किशोरों को अगवा करने का आरोप लगाया है. अभी तक किसी फ़लस्तीनी चरमपंथी समूह ने घटना की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

उबलता ग़ुस्सा

इसराइल ने सोशल मीडिया पर भी किशोरों की तलाश के लिए व्यापक अभियान चला रखा है. उन्होंने इसके लिए #ब्रिंगबैकअवरब्यॉज हैशटैग भी लॉन्च किया है.

इस घटना से अधिकांश इसराइली नागरिक बेहद सहमे हुए हैं. विशेषकर वे इसराइली, जो वेस्ट बैंक बस्तियों के नज़दीक रहते और काम करते हैं.

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इन बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अवैध माना गया है. हालांकि इसराइलियों का इस पर मतभेद है.

छना रुए नाम के एक युवक ने, जो खराब यातायात व्यवस्था के कारण अक्सर हेब्रॉम और यरुशलेम के बीच की सड़क संख्या-60 पर लिफ़्ट लेकर अपने घर आते हैं, बताया, "यह किशोरों और उनके परिवार के साथ बहुत बुरा हुआ."

दूसरी युवती नोआ लारोन ने बताया, "उन्हें जितने भी लोग जानते हैं, सभी चिंतित हैं. हम अच्छी ख़बर पाने की आस में अपने आईफोन पर लगे हुए हैं."

किशोरों के तलाश अभियान में हज़ारों की संख्या में इसराइली टुकड़ियां लगी हैं. फ़लस्तीनी शहरों और गांवों में प्रवेश करने के बाद उनके साथ कई हिंसक झड़पें हो चुकी हैं.

इन झड़पों में दो युवा फ़लस्तीनियों के मारे जाने से फ़लस्तीनियों में ग़ुस्सा और असंतोष भड़क उठा है.

सामूहिक सज़ा

गुरुवार को इसराइली सैनिकों के दक्षिणी हेब्रॉम में गोलीबारी करने पर 15 साल का एक फ़लस्तीनी युवक मारा गया था.

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इस हफ़्ते के शुरू में इसी तरह एक युवक रामाल्लाह के पास जलाजोअन शरणार्थी शिविर में मारा गया था.

इसराइली सेना ने दक्षिणी हेब्रॉम इलाके की नाकेबंदी कर रखी है. अधिकांश हेब्रॉमवासियों पर वेस्ट बैंक बस्ती के आसपास घूमने और सीमा पार जाने पर रोक लगा दी गई है.

यहां के स्थानीय निवासियों को लगता है, मानों उन्हें तीन इसराइली किशोरों के लापता होने की सामूहिक सज़ा दी जा रही है.

वेस्ट बैंक के निवासी इसा अमरो कहते हैं, "ढेर सारी चौकियां और बंद. बस यही हो रहा है. मैं कई हफ़्तों से काम पर नहीं गया."

उन्होंने बताया, "हमारे घर पर सैनिक कभी भी आ धमकते हैं. हमारा परिवार, बच्चे और पड़ोसी सभी पूरी तरह सहमे हुए हैं. यह इसराइलियों का एक तरह का बदला है, जो फ़लस्तीनी नागरिकों से लिया जा रहा है, जबकि हम इसके लिए कतई ज़िम्मेदार नहीं हैं."

समाधान की आस

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कई अन्य फ़लस्तीनियों की तरह मुहतसब को मौजूदा संकट के राजनीतिक समाधान की आस है.

"आजकल कई फ़लस्तीनी नागरिक फ़लस्तीनी अधिकारियों (जो वेस्ट बैंक के एक हिस्से को नियंत्रित करते हैं) से नाराज़ हैं. उन्हें लगता है कि वे उनकी रक्षा नहीं कर रहे."

वे आगे कहती हैं, "हालांकि शायद ही उनके हाथ में कुछ है. हम सब अच्छी तरह जानते हैं कि इसराइल हम फ़लस्तीनियों को एकजुट नहीं देखना चाहता."

यह घटना ऐसे वक़्त में सामने आई है, जब दो मुख्य फ़लस्तीनी राजनीतिक गुटों, हमास और फतह, ने चुनाव का मार्ग प्रशस्त करने के लिए एक नई एकीकृत सरकार की स्थापना की है..

इसके मुखिया राष्ट्रपति महमूद अब्बास, फ़तह के प्रमुख हैं.

इसराइल ने नई सरकार का पुरज़ोर विरोध किया और अप्रैल में फ़लस्तीनी राजनीतिक सुलह के बाद अब्बास के साथ हुई शांति वार्ता को रद्द कर दिया है.

राजनीतिक संकट

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यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमरीका और दूसरे देशों की ही तरह इसराइल भी हमास को एक चरमपंथी समूह मानता है.

राष्ट्रपति अब्बास ने तीन इसराइली किशोरों के अगवा किए जाने की घटना के साथ-साथ इसराइली सेना की कार्रवाई की आलोचना की है. उनकी सैनिक तलाशी अभियान में इसराइल की मदद कर रहे हैं जिससे हमास अधिकारी नाराज़ हैं.

इसराइल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वेस्ट बैंक में उसके सैन्य अभियान के उद्देश्यों में हमास के कार्यकर्ता और उनका बुनियादी ढांचे पर हमला भी शामिल है.

हमास इससे पहले गज़ा पट्टी में पांच साल तक बंधक बनाए गए सैनिक गिलाद शालिट समेत कई इसराइलियों के अगवा होने के लिए जिम्मेदार रहा है.

मध्य इसराइल के मोदिन के पास नोफ़ अयालोन के परंपरागत इलाक़े में मौजूद फ्रेंकेल परिवार के पड़ोसी और मित्र प्राथनाएं कर रहे हैं. किशोरों के ग़ायब होने की घटना, जो उनके परिवार के लिए निजी संकट थी, अब राजनीतिक संकट में बदल चुकी है.

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