'गैंगस्टर भी वर्ल्ड कप के दौरान पंगा नहीं ले रहे'

  • 25 जून 2014
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18 तारीख़ को फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप में मैक्सिको और ल्यारी का मैच 0-0 से बराबर रहा मगर परवाह नहीं, अब 24 जून को कैमरून के साथ जो मैच होगा उसमें ल्यारी ही विजेता होगा. नेमार हमारा है और हम नेमार के.

कराची का ल्यारी, जिसमें ब्राज़ील की तरह अफ़्रीकी नस्ल के बलोच, गोरे पठान और भूरे पंजाबी सभी तो शामिल हैं, लेकिन ल्यारी इतना ग़रीब है कि यूं समझ लें कि मुंबई का धारावी ल्यारी के मुक़ाबले में नई दिल्ली है.

तंग-तंग गलियों में फ्लैटों का ऐसा घना जंगल जिनमें 15 लाख इंसान बसते हैं. इस पांच-सात वर्ग किलोमीटर के जंगल में हथियार बंद शिकारी भी हैं, हेरोईन और चरस बेचने वाले डॉन भी और बॉक्सिंग के 22 और फ़ुटबॉल के 100 से अधिक क्लब भी.

अब्बा के आंसू पर बच्चे क्या कहते हैं?

क्या-क्या बताऊं इन क्लब से कौन-कौन पैदा हुआ. अब्दुल गफ़ूर जो पाकिस्तान की फ़ुटबॉल टीम के पेले कहलाते थे, असली पेले तो आज भी ज़िंदा हैं मगर अब्दुल गफ़ूर पेले को दो वर्ष पहले विकलांगता और बीमारी साथ ले गई.

60 के दशक में एशियन गेम्स के लोकल हीरो मोहम्मद उमर बलोच किसी सरकारी दफ़्तर में मामूली नौकरी करते-करते निकल लिए. नेशनल टीम का पहाड़ जैसा ऊंचा लंबा फुलबैक मोहम्मद सिद्दीक़ जिसने रिटायरमेंट के बाद पान का खोखा लगा लिया और इस खोखे में जीते हुए मेडल भी लटका लिए.

फ़ुटबॉल की धूम

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हुसैन जान कभी नेशनल फ़ुटबॉलर थे, अब 20 रुपए में गाड़ी धोकर ऐसे चमकाते हैं कि आप बोनट पर अपनी शक्ल देख लें. उस्मान जान, गोलकीपर और नेशनल कप्तान आख़िरी ज़िंदगी में वो....खैर, छोड़िए ख़ुशी के मौक़े पर मैं क्या बहकी-बहकी बातें कहने लग गया.

मैकेनिक, ठेले घसीटने वाले, गधा गाड़ी दौड़ाने वाले, कुली और चपरासी की नौकरी करने वाले और गैंगस्टर- ये ल्यारी वाले न तो कभी ब्राज़ील गए हैं और न जाएंगे, फिर भी न जाने क्यों और कब से ख़ुद को मिनी ब्राज़ील कहने पर अड़े बैठे हैं.

भारत-पाकिस्तान के समधियाना संबंध

लेकिन शायद मैं कुछ ग़लत कह गया, इसमें तीन ल्यारी वाले ऐसे हैं जिन्होंने ब्राज़ील अपनी आंखों से देख लिया है. ये तीनों बच्चे कुछ दिनों पहले उस पाकिस्तानी टीम का हिस्सा थे जिसने पहले तो पूल मैच में भारत को 31-0 से हराया और फिर स्ट्रीट चिल्ड्रन वर्ल्ड फ़ुटबॉल कप के सेमीफ़ाइनल तक पहुंचकर तीसरी पोज़ीशन हासिल की. इन तीनों बच्चों को ल्यारी वाले यूं देखते हैं जैसे ये रियो डि जनेरो से नहीं मक्का-मदीना या फिर हरिद्वार से पलटे हों.

और जनाब पाकिस्तानी टीम न सही पाकिस्तानी ब्राज़ुका तो वर्ल्ड कप का प्रतीक बन ही चुकी है. इस दफ़ा मिनी ब्राज़ील में और ही तरह का जोश है. ल्यारी के बीचों-बीच चील चौक पर ब्राज़ील के झंडे लहरा रहे हैं.

फ़ुटबॉल क्लबों में ब्राज़ीलियाई टीम की वर्दियां पहन कर प्रैक्टिस हो रही है. कौन सा मैच, कब और किसके बीच खेल जा रहा है यह किसी से पूछने की ज़रूरत नहीं है. दीवारों पर सब लिखा हुआ है.

दुआएं ब्राज़ील के साथ

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जिस दिन ब्राज़ील की टीम किसी से भिड़ती है तो हर मोहल्ले में चंदा जमा करके प्रोजेक्टर और बड़ी-बड़ी स्क्रीनें लाई जाती हैं. गोद के बच्चों और उनकी मांओं से लेकर बुज़ुर्गों तक सब स्क्रीन के सामने बुत बने बैठ जाते हैं.

जैसे ही ब्राज़ील गोल करता है, हर आदमी खड़ा हो जाता है और ढोल की थाप पर शरीर की बोटी-बोटी हिलाते हुए फिर बैठ जाता है. और जब ब्राज़ील के ख़िलाफ़ गोल होता है तो आसमान की तरफ़ हाथ उठ जाते हैं.

पाकिस्तानी अपनी इज़्ज़त कब करेंगे

ल्यारी में गैंगस्टर के ख़िलाफ़ एक मुद्दत से ऑपरेशन चल रहा है. इलाक़ा कई-कई दिन पुलिस के घेरे में रहता है. गलियों में गैंगस्टर एक-दूसरे के पीछे बंदूकें लेकर ऐसे भागते हैं कि बॉलीवुड के हीरो भी हसरत से देखें.

लेकिन आजकल ल्यारी में शांति है, पुलिस मुठभेड़ कम हो गई हैं. गैंगस्टर भी समझते हैं कि वर्ल्ड कप के दौरान पंगा लिया तो पुलिस तो आएगी बाद में उससे पहले जनता उनका फ़ुटबॉल बना डालेगी.

लेकिन ब्राज़ील अगर वर्ल्ड कप न उठा सका तो फिर क्या होगा, इस सवाल पर पहले तो सबकी चुप्पी लग गई और फिर सब मुझे घूरने लग गए. क्यूं अशुभ बात मुंह से निकालते हो साहब, अल्ला न करे ऐसा हो.

सब मुसलमान मांओं, बहनों की दुआओं से जीतेगा इंशाअल्लाह, वी आर द वर्ल्ड चैंपियन, दिगड़िग, दिगड़िग, दिगड़िग, दिगड़िग, दन दनादन दन, दन दनादन दन, दन दनादन दन, दन दन दन.

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