केरी पहुंचे इराक़, कई और शहर विद्रोहियों के क़ब्ज़े में

इराक़ में आईएसआईएस के लड़ाके इमेज कॉपीरइट NON

इराक़ में जारी संकट के बीच अमरीका के विदेश मंत्री जॉन केरी सोमवार को इराक़ पहुंच गए हैं. वहीं सुन्नी चरमपंथी संगठन आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक़ एंड अल-शाम) ने देश के उत्तर-पश्चिम के कई कस्बों में कब्ज़ा कर लिया है.

दूसरी ओर दक्षिण बग़दाद के अल-हिला क्षेत्र में बंदूकधारियों के हमले में 70 क़ैदी मारे गए हैं. अल-हिला में बीबीसी के पुलिस सूत्रों के अनुसार इन सभी क़ैदियों को सुरक्षा कारणों से दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा रहा था, तभी बंदूकधारियों ने इस काफिले पर हमला कर दिया.

पुलिस के अनुसार ये सभी क़ैदी चरमपंथ के मामले में अभियुक्त थे. सभी क़ैदी दोनों पक्षों के बीच हुई गोलीबारी में मारे गए. घटना में कई पुलिसकर्मी और छह हमलावर भी मारे गए.

लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हमले में सभी क़ैदी क्यों मारे गए.

देश के उत्तरी इलाक़े में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तेल अफ़ार हवाई अड्डे पर भी चरमपंथियों का क़ब्ज़ा हो चुका है.

इराक़ के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसूल से सीरिया को जोड़ने वाला मुख्य संपर्क मार्ग इसी क़स्बे में है. मोसूल पर आईएसआईएस ने दो हफ़्ते पहले ही नियंत्रण कर लिया था.

इराक़ पहुंचने से पहले रविवार को केरी ने मिस्र की राजधानी काहिरा में कहा था कि चरमपंथी संगठन आईएसआईएस की 'हिंसा और दमन की विचारधारा' न केवल इराक़ के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए ख़तरा है.

इराक़ के इर्बिल में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर का विश्लेषण

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  • सीरिया और इराक़ के सभी संपर्क मार्गों से इराक़ सरकार नियंत्रण खो चुकी है.

  • जॉर्डन और इराक़ के एकमात्र संपर्क मार्ग से भी सरकार नियंत्रण खो चुकी है.

  • आईएसआईएस के लड़ाके अब सीरिया के लड़ाकों से सीधा संपर्क कर सकते हैं.
  • सीमाओं पर नियंत्रण खो देने का दूरगामी रणनीतिक और सांकेतिक महत्व है.
  • इराक़ के टुकड़ों में बंट जाने का ख़तरा बहुत बढ़ गया है और इस वक़्त सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इराक़ को आंतरिक विघटन से बचाया जा सकता है?
  • जॉन केरी की कोशिश है कि इराक़ के विभिन्न राजनेता मिलकर स्थिति का सामना करें.
  • केरी चाहते हैं कि देश का राजनैतिक नेतृत्व आपसी गुटबाजी से ऊपर उठकर चरमपंथी आईएसआईएस को कड़ा जवाब दें.
  • सैद्धांतिक तौर पर यह संभव है लेकिन इसके लिए ईरान और अमरीका को साथ आना होगा.
  • इराक़ के शिया पक्ष पर ईरान का गहरा प्रभाव है लेकिन ईरान के ताज़ा बयानों के मद्देनज़र स्थिति ज़्यादा सकारात्मक नहीं प्रतीत हो रही.

अमरीका ने अपने तक़रीबन 300 सैन्य सलाहकारों को चरमपंथियों से मुक़ाबले में इराक़ सरकार की मदद के लिए भेजा है.

अमरीका ने इराक़ से साल 2011 में अपने सैन्य बलों को इराक़ से वापस बुला लिया था.

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