अल जज़ीरा मामले में 'दखल नहीं देंगे' अल-सीसी

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मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तेह अल-सीसी ने कहा कि वे अल जज़ीरा के पत्रकारों को मिली सज़ा के मामले में 'हस्तक्षेप' नहीं करेंगे.

इस फ़ैसले का वैश्विक स्तर पर विरोध हो रहा है.

इस सबंध में मिस्र के राष्ट्रपति फ़तेह अल सीसी ने कहा, "हमें न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना चाहिए और बाकी लोगों के विरोध के बावजूद उसकी आलोचना नहीं करनी चाहिए."

सोमवार को अल-जज़ीरा चैनल के तीन पत्रकारों पूर्व बीबीसी संवाददाता और ऑस्ट्रेलियाई नागरिक पीटर ग्रेस्टे, कनाडाई और मिस्री मोहम्मद फहमी और मिस्र के ही बाहेर मोहम्मद को सात साल जेल की सज़ा सुनाई थी.

फ़ैसले का विरोध

पत्रकारों को जेल भेजने का दुनियाभर के विभिन्न मीडिया समूहों ने विरोध किया है.

बीबीसी के पत्रकारों ने लंदन में पत्रकारों को जेल की सज़ा के विरोध में ठीक 24 घंटे बाद एक मिनट का मौन रखा. इसमें विभिन्न देशों में मौजूद बीबीसी ब्यूरो के लोग भी शामिल हुए.

बीबीसी के समाचार निदेशक जेम्स हार्डिंग ने कहा, "यह मामला अन्यायपूर्ण है."

उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया के पत्रकारों को 'एकजुट होना चाहिए' क्योंकि पत्रकारों को केवल उनका काम करने के लिए जेल की सज़ा दी जा रही है.

उन्होंने कहा कि पत्रकार मिस्र के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उनसे मामले में हस्तेक्षप करने का अनुरोध करेंगे.

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