मोबाइल की जांच के लिए भी 'वॉरंट चाहिए'

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अमरीका की सर्वोच्च अदालत ने एक फ़ैसले में कहा है कि पुलिस बिना वॉरंट के हिरासत में लिए गए लोगों के मोबाइल फ़ोन नहीं जांच सकती है.

गोपनीयता की वकालत करने वालों के लिए यह निर्णय एक जीत की तरह है जो कि यह दलील देते हैं कि मोबाइल फ़ोन की जांच करना निजी ज़िंदगी में अनुचित हस्तक्षेप है.

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने फ़ैसला देते हुए लिखा कि मोबाइल "अमरीकियों के निजी जीवन का हिस्सा" है.

यह आदेश उस वक़्त आया जब मोबाइल फ़ोन में मौजूद सबूतों के आधार पर दोषी पाए गए दो लोगों की अपील पर उच्च अदालत विचार कर रहा था.

संविधान का संरक्षण

अमरीकी संविधान के चौथे संशोधन के अंतर्गत पुलिस और अन्य सरकारी अधिकारियों को आमतौर पर किसी भी तरह की जांच करने से पहले जज से वॉरंट लेने की ज़रूरत होती है.

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वॉरंट के लिए ज़रूरी होता है कि संदिग्ध के द्वारा अपराध करने के सबूत मौजूद हों.

न्यायाधीश राबर्ट्स ने लिखा, "मोबाइल फ़ोन में मौजूद चीज़ों पर संविधान का संरक्षण लागू होता है भले ही गिरफ़्तार व्यक्ति के द्वारा रखे गए अन्य समानों से वे मात्रात्मक और गुणात्मक रूप से भिन्न होते हों. आधुनिक मोबाइल फ़ोन अन्य उपकरणों की तरह नहीं हैं इसमें मौजूद चीजें अमरीकियों की निजी ज़िंदगी का हिस्सा होती हैं. मोबाइल फ़ोन की जांच से पहले पुलिस को कोर्ट से वॉरंट ज़रूर लेना चाहिए. "

प्यू शोध केंद्र के मुताबिक़ 90 फ़ीसदी से ज़्यादा अमरीकियों के पास कम से कम एक मोबाइल फ़ोन है.

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले आदेश दिया था कि हिरासत के दौरान पुलिस बिना वारंट के किसी संदिग्ध के पास मौजूद सभी चीजों की जांच कर सकता है.

लेकिन बुधवार को आए इस फ़ैसले के मुताबिक़ यह तर्क मोबाइल फ़ोन पर लागू नहीं होता है.

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