प्रथम विश्व युद्ध: पहली चिंगारी - आर्चड्यूक की हत्या-2

  • 28 जून 2014
आर्जड्यूक फ़र्डिनेंड, डचेज़ सोफ़ी इमेज कॉपीरइट MARY EVANS LIBRARY

आज से ठीक 100 साल पहले 28 जून 1914 को ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य के उत्तराधिकारी आर्चड्यूक फ़र्डिनेंड अपनी पत्नी के साथ बोस्निया में साराएवो के दौरे पर थे. वहाँ उनकी और उनकी पत्नी की हत्या कर दी गई जिसके बाद शुरू हुआ वो घटनाक्रम जो प्रथम विश्व युद्ध कहलाया.

बीबीसी आपके लिए लाया है 28 जून 1914 की सुबह का घटनाक्रम और कुछ मुख्य पल:

पढ़िए: प्रथम विश्व युद्ध: पहली चिंगारी - आर्चड्यूक की हत्या-1

स्थानीय समय 0947

ट्रेन से आर्चड्यूक और उनकी पत्नी के साराएवो पहुंचने से पहले ही सैकड़ों लोग सड़कों के दोनों ओर जमा होना शुरू हो गए थे जहाँ से शाही सवारी को निकलना था. पूरे रास्ते को झंडों और फूलों से सजाया गया था.

0949

ट्रेन साराएवो स्टेशन पहुँची, जहाँ आर्चड्यूक और उनकी पत्नी के स्वागत के लिए बोस्निया-हर्ज़ेगोवेनिया के सैन्य गवर्नर, जनरल ऑस्कर पोटियोरेक और साराएवो के मेयर फ़ेहिम एफ़ेन्दी चुयर्चिच मौजूद थे.

(सौ साल पहले सारायेवो में आर्चड्यूक फ़्रांज़ फ़र्डिनेंड की हत्या के ऐतिहासिक क्षणों को बीबीसी ने यहां प्रस्तुत किया है. सौ साल पुरानी यह घटना आज के श्रोताओं-पाठकों के लिए आधुनिक न्यूज़ रिपोर्टिंग की तकनीकों के ज़रिए इस तरह से बताई गई है जैसे आज का न्यूज़ मीडिया उसे कवर करता.)

0950

आर्चड्यूक और डचेस साराएवो की खिलखिलाती धूप में उतरे और उनका विधिवत तरीके से स्वागत हुआ.

पढ़िए: प्रथम विश्व युद्ध: पहली चिंगारी - आर्चड्यूक की हत्या-3

आर्चड्यूक हूसर्स के जनरल की यूनिफ़ॉर्म – नीली पतलून और हरे मोरपंखी रंगों वाली हेलमेट पहन रखी थी.

0951

डचेस सोफ़ी ने सफ़ेद ड्रेस के साथ लाल रंग की कमरपट्टी और बड़ी हैट पहन रखी थी

0953

शाही युगल का स्वागत औपचारिक गार्ड ऑफ़ ऑनर देकर और 15वीं आर्मी कोर बैंड ने ऑस्ट्रिया के राष्ट्र गान को बजाकर किया गया.

0954

उस दिन के दौरे का पहला पड़ाव सिटी हॉल था जहां मेयर चुयर्चिच को आधिकारिक स्वागत भाषण देना था.

इसके बाद आर्चड्यूक को राष्ट्रीय संग्रहालय में एक कार्यक्रम में भाग लेना था और जिसके बाद गवर्नर के घर पर दोपहर के खाने में उनकी डचेस से फिर मुलाकात होनी थी.

0957

सबसे पहले उन्होंने स्टेशन के सामने मौजूद सैनिकों के बैरेकों का संक्षिप्त दौरा किया, जहां आर्चड्यूक ने टुकड़ियों का निरीक्षण किया.

1000

इमेज कॉपीरइट AP HISTORICAL ARCHIVES SARAJEVO

इसके बाद यह शाही जोड़ा एक खुली छत वाली कार में सवार हुआ जिसकी रक्षा करते हुए जनरल पोट्योरिक और काउंट फ्रांज़ हैरैख़ चल रहे थे. इसके बोनट पर शाही ध्वज लहरा रहा था.

1002

मिलियात्स्का नदी के उत्तरी किनारे पर ऐप्पल घाट के साथ-साथ गाड़ियों का काफ़िला शहर में से होते हुए बढ़ा.

1003

शहर के पूर्व में स्थित पुराने तुर्की किले की तोपों से 24 गोले दाग कर दौरा शुरू होने की घोषणा की गई.

1004

जब आर्चड्यूक और सोफ़ी की कार दोनों ओर लोगों की भीड़ लगी गलियों गुज़री तो कुछ लोग चिल्लाए 'ज़ीवियो' (आपकी उम्र लंबी हो).

इस दौरे का स्थानीय अख़बारों में प्रचार किया गया था ताकि क्षेत्र में शाही दौरे के अंतिम दिन बड़ी संख्या में लोग आएं.

1005

शाही काफ़िला ऐप्पल घाट के साथ-साथ 1896 में बने सिटी हॉल की तरफ़ बढ़ रहा था.

1007

कारों के 50 ग़ज़ की दूरी पर पहुंचने पर झंडों से सजे हुए घर मिले. इन पर हैप्सबर्ग के काले और पीले के साथ ही बोस्निया के लाल और पीले झंडे लगे थे.

धूप से बचने के लिए ज़्यादातर भीड़ ऐप्पल घाट में शहर की ओर थी.

1010

आर्चड्यूक की कार केंद्रीय पुलिस स्टेशन और सेना के नए बैरेकों के सामने से गुज़री.

1012

तभी ख़बर आई कि आर्चड्यूक के गाड़ियों के काफ़िले के पास एक विस्फोट हुआ. यह पता नहीं चल सका कि यह किस वजह से हुआ था.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बहुत ज़ोर का धमाका हुआ और आर्चड्यूक की गाड़ी जल्दी से मुड़ गई थी.

किसी के घायल होने की कोई ख़बर नहीं मिली थी.

1013

इमेज कॉपीरइट AP FILE PHOTO

आर्चड्यूक की गाड़ी के पीछे चल रही गाड़ियां रुक गईं. ऐसा लगता था कि उनमें से एक गाड़ी को नुक़सान पहुंचा था.

पुलिस भीड़ के बीच मौजूद थी. वह नज़ारा बेहद चकराने वाला था. वहां धुआं और मलबा था.

अधिकारियों और भीड़ में लोगों के घायल होने की अपुष्ट ख़बरें मिल रही थीं.

1015

आर्चड्यूक की कार रुक गई थी. अधिकारी आर्चड्यूक को उस घटना के बारे में बता रहे थे.

ख़बरें यह भी थीं कि विस्फोट ऐप्पल घाट के नदी वाले छोर की ओर से भीड़ में से फेंके गए एक बम की वजह से हुआ था.

1019

आर्चड्यूक और सोफ़ी अब भी कार में ही थे. उन्होंने अपने एड (सहायक) काउंट फ्रांज़ हैरैख़ को घटनास्थल के निरीक्षण के लिए भेजा.

1021

शुरुआती ख़बरों में करीब 20 लोगों के विस्फ़ोट में घायल होने का पता चला. इनमें दो सैन्य अधिकारी और इंपीरियल पार्टी की एक महिला भी शामिल थीं. माना गया कि वह डचेस नहीं थीं.

1023

बाद में प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने एक व्यक्ति को आर्चड्यूक की कार पर बम फेंकते देखा. उनका कहना था कि खुद आर्चड्यूक ने अपनी गाड़ी को बचाकर उसे पीछे आ रही गाड़ी के रास्ते की ओर फेंक दिया.

अपुष्ट ख़बरों से संकेत मिले कि बम विस्फोट के सिलसिले में एक आदमी को हिरासत में लिया गया. ऐसा लगता था कि मौके से भागने के चक्कर में उसने तटबंध से कूदने की कोशिश की थी.

1024

बाद में पता चला कि डचेस सोफ़ी को इस घटना के दौरान कुछ चोट लगी थी. ख़बरों के अनुसार उन्हें विस्फोट के बाद उड़े टुकड़ों से गाल पर खरोंच आ गई थी. बताया गया कि आर्चड्यूक पूरी तरह सुरक्षित थे.

1026

बताया गया कि आर्चड्यूक फ्रांज़ फ़र्डिनेंड और डचेस सोफ़ी ने अपना दौरा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही जारी रखने का फ़ैसला किया.

1028

आर्चड्यूक को यह कहते हुए सुना गया कि घटना को गंभीरता से न लिया जाए. उन्होंने कहा, "यह व्यक्ति पागल है. हम लोग पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम को जारी रखेंगे."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए