दशहत में हैं तिकरित की भारतीय नर्सें

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उत्तरी इराक़ के शहर तिकरित में शनिवार को टीचिंग हॉस्पिटल के कैज़ुअल्टी विभाग के सामने हुई बमबारी से भारतीय नर्सों में दहशत का आलम है.

आईएसआईएस के चरमपंथियों ने दो सप्ताह पहले जब इस इलाक़े पर हमला बोला था, तभी से ये नर्सें यहां फंसी हैं.

वहां फंसी 46 भारतीय नर्सोंमें से एक मरीना जोस ने फोन पर बीबीसी हिंदी को बताया, ''हम यहां अब एक और दिन नहीं रह सकते. पूरी रात हम सब अस्पताल के आसपास बमबारी की आवाज़ सुनते रहे हैं. शनिवार को हेलीकॉप्टर से फेंके गए बम की वजह से कैज़ुअल्टी विभाग के पास तीन कारें जल गईं.''

इससे पहले समाचार एजेंसी पीटीआई ने भारत के विदेश मंत्रालय के हवाले से कहा था कि इराक़ में भारतीय मिशन इन नर्सों के संपर्क में है और अस्पताल परिसर में कोई बमबारी नहीं हुई है.

जोस ने बताया, ''शयनगृह बन चुके एक बड़े वार्ड में मौजूद एक नर्स को पिछली रात दौरा पड़ा. अस्पताल में मौजूद एकमात्र चिकित्सक, डॉक्टर अली ने उस नर्स को देखा.''

'एक दिन नहीं रुकना चाहते'

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तिकरित से बाहर जाने की मांग जोस के अलावा एक दूसरी नर्स भी कर रही हैं, जो अपनी पहचान ज़ाहिर नहीं करना चाहतीं. उन्होंने कहा, ''हम सबसे पहले तिकरित से बाहर जाना चाहते हैं.''

उन्होंने बताया, ''पास में बम फटने से हर बार इमारत हिलती है. तीन दिन पहले यहां रेडक्रॉस के अधिकारी आए थे.

उनका कहना था कि जब बग़दाद की ओर जाने वाली सड़क खाली हो जाएगी, तब वे हमें बाहर ले जाने के लिए गाड़ी लेकर आएंगे. लेकिन, हम यहां एक और दिन नहीं रुकना चाहते हैं.''

वापसी की आस

इस नर्स ने यह भी कहा, ''हमें खाना मिल रहा है, लेकिन यह कहां से आ रहा है, हम नहीं जानते. यह ताज़ा तैयार मांसाहारी भोजन है. मिल्क पाउडर से बनी चाय और कॉफ़ी भी दी जा रही है.''

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नर्सों ने बताया, ''एक डॉक्टर और एक सेवक कर्मचारी को छोड़कर अस्पताल में कोई मरीज़ या सुरक्षाकर्मी नहीं हैं.''

46 नर्सों में से 14 भारत लौटने की इच्छुक हैं और उनमें जोस भी शामिल हैं.

इनमें से 32 नर्सें वापस नहीं लौटना चाहतीं, लेकिन वे इराक़ में कहीं और काम करना चाहती हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी पढ़ाई करने और नौकरी सुरक्षित करने के लिए भर्ती एजेंसियों का भुगतान करने के लिए कर्ज़ लिया था.

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हालांकि दोनों नर्सों ने बताया कि उन्होंने अस्पताल के पास दो हफ़्ते पहले ही किसी भी चरमपंथी या सरकारी सैनिक को नहीं देखा.

इराक़ में फंसे 10,000 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत ने तीन कैंप कार्यालय खोले हैं.

परिस्थितियों पर विचार के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रविवार को खाड़ी देशों के भारतीय राजदूतों की बैठक बुलाई है.

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