'चमड़ी का रंग पड़ेगा नौकरी पर भारी'

  • 1 जुलाई 2014
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ब्रिटेन में करीब तेरह प्रतिशत एशियाई मूल के बच्चे इस आशंका से चिंतित हैं कि उनके रंग की वजह से उन्हें नौकरी मिलने में परेशानी होगी.

गोरे बच्चों में यह चिंता काफी कम है जहां सिर्फ दो प्रतिशत बच्चे इसे चिंता का कारण मानते हैं.

सबसे बुरी स्थिति काले बच्चों की है जहां हर पांच में से एक बच्चा मानता है कि उन्हें रंग की वजह से ऐसे भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है.

बीबीसी के न्यूज़राउंड प्रोग्राम के लिए किए गए एक शोध में ये बातें सामने आई हैं.

यह सर्वे करीब 1600 बच्चों में किया गया जिनकी उम्र आठ से 14 साल के बीच थी. इनमें 276 बच्चे काले थे, 640 बच्चे गोरे थे और 711 बच्चे अलग-अलग अल्पसंख्यक समुदायों के थे.

ब्रिटेन के सांसद डेविड लैमी ने कहा है कि देश को और काले बुद्धिजीवियों की ज़रुरत है.

'नौकरी में परेशानी'

सर्वे के अनुसार तीन चौथाई से कम गोरे बच्चे यूनिवर्सिटी जाने की इच्छा रखते हैं जबकि दस में से नौ काले बच्चे यूनिवर्सिटी नहीं जाना चाहते हैं.

सर्वे में पाया गया कि 24 प्रतिशत एशियाई बच्चे बड़े होकर फुटबॉलर बनना चाहते हैं जबकि 21 प्रतिशत काले बच्चे मानते थे कि उन्हें रंग के कारण भविष्य में सफलता मिलने में परेशानी होगी.

लंदन के एक स्कूल के एक बच्चे ने न्यूज़राउंड की रिपोर्टर आयशा तुल से कहा कि 'इस पीढ़ी को भी लोग एक ख़ास नज़रिए से देखते हैं इसलिए हमारे लिए बड़े होने के बाद अपने मन का काम करना मुश्किल होगा.'

ब्रिटेन के ऑस्कर विजेता फिल्म निर्देशक स्टीव मैक्वीन ने इस हालत पर चिंता जताई है और कहा है कि काले बच्चों को लेकर ये स्थिति परेशान करने वाली है.

मैक्वीन ने '12 ईयर्स ए स्लेव' नाम की फिल्म बनाई थी जिसे ऑस्कर मिला था.

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