क्या डेविड और जॉन जाएंगे भारत पढ़ने?

विदेशी छात्र इमेज कॉपीरइट AP

भारत में विदेशों में शिक्षा हासिल करने का बड़ा क्रेज़ है. इसके लिए लोग या तो विदेश जाकर शिक्षा हासिल करते हैं या कई निजी शिक्षण संस्थान विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ क़रार कर भारत में ही डिग्रियां देते हैं.

अब भारत के कई निजी शिक्षा संस्थान चाहते हैं कि माहौल बदले और विदेशी छात्र भी भारत आकर शिक्षा हासिल करें.

इसके लिए वो अपने परिसर में विश्व स्तर का शैक्षणिक ढांचा होने का दावा भी करते हैं.

पिछले दिनों ब्रितानी संसद परिसर में हुए एक कार्यक्रम में ऐसी एक कोशिश देखने को मिली, जहां शिक्षा के क्षेत्र में काम करनेवाली एक संस्था ने 20 भारतीय निजी शिक्षण संस्थानों को एक्सेलेंस का सर्टिफ़िकेट दिया.

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इसके ज़रिए ब्रितानी शिक्षा जगत से जुड़े लोगों को बताने की कोशिश की गई कि भारत में भी अच्छे शिक्षा संस्थान हैं, जहां ब्रितानी छात्र फ़ुलटाइम कोर्स में दाखिला लेकर शिक्षा पा सकते हैं.

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Image caption ब्रितानी संसद के चर्चिल रूम में हुए कार्यक्रम में संस्थानों को सर्टिफ़िकेट दिया गया.

ब्रिटेन के निचले सदन हाउस ऑफ़ कॉमन्स के चर्चिल रूम में ब्रितानी राजनेता बॉब ब्लैकमैन ने भारत के 20 निजी विश्वविद्यालयों को 'एक्सेलेंस' का सर्टिफ़िकेट दिया.

अंतरराष्ट्रीय संस्था स्किल ट्री ने 250 से ज्यादा संस्थानों के पांच साल के शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर इनका चुनाव किया था, जिनमें एक्सएलआरआई जमशेदपुर, एपीजे सत्या यूनिवर्सिटी, मणिपाल यूनिवर्सिटी और फ़ोर स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट जैसे नाम हैं.

स्किल ट्री के प्रमुख शेखऱ भट्टाचार्य ने बताया, “इस सर्टिफ़िकेट से इन संस्थानों को मान्यता मिलेगी कि वो भारत के ऐसे संस्थान हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं.”

आदान-प्रदान

ब्रितानी सांसद बॉब ब्लैकमैन ने कहा कि ऐसे प्रमाणपत्र से संस्थानों का महत्व उजागर होता है और छात्र उनके प्रति आकर्षित होते हैं. साथ ही इनसे दो देशों के बीच छात्रों के आदान-प्रदान में भी मदद मिलती है.

स्किल ट्री के मुताबिक़ ग्लोबल स्टूडेंट मार्केट का आठ फ़ीसदी यानी क़रीब दो लाख छात्र भारत में शिक्षा ले रहे हैं, जिनमें ज़्यादातर पड़ोसी और अफ्रीकी देशों के छात्र हैं.

Image caption ब्रितानी सांसद लॉर्ड स्वराज पॉल ने भारतीय शिक्षाकर्मियों को संबोधित किया.

संस्था का मानना है कि अगर सही तरीक़े से भारत के शिक्षा संस्थानों के बारे में जागरूकता फैलाएं तो छात्रों की संख्या कई गुना बढ़ सकती है.

ऐसे ही एक प्रयोग के बारे में एक्सएलआरआई के डीन प्रणबेश रे ने बताया कि किस तरह तीन देशों के छात्रों का एक दल जमशेदपुर में मैनेजमेंट की शिक्षा ले रहा है.

संभावना

भारत से आए शिक्षाकर्मी चाहे जो कहें पर हक़ीक़त यही है कि अभी भी भारत को सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों पर शिक्षा के लिए अनुकूल ग्लोबल डेस्टिनेशन नहीं माना जाता.

ब्रिटेन के कई शिक्षा संस्थानों से जुड़े और मशहूर उद्योगपति लॉर्ड स्वराज पॉल कहते हैं, "भारत में ग्लोबल एजुकेशन हब बनने की संभावना है लेकिन इसके लिए अभी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है जैसे सुरक्षा का आश्वासन, वैश्विक स्तर की सुविधा इत्यादि. तभी पश्चिमी देशों के छात्र पढ़ने के लिए भारत आएंगे. हालांकि इसमें अभी वक़्त लगेगा."

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