ये हैं 'इस्लामिक स्टेट के नए ख़लीफ़ा'

  • 31 जुलाई 2014
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पांच जुलाई को अबु बकर अल-बग़दादी, जिन्हें उनके समर्थक ख़लीफ़ा इब्राहिम कहते हैं, पहली बार जुमे की तक़रीर के दौरान दुनिया के सामने आए थे.

इससे पहले उनकी तस्वीरें चोरी-छुपे दुनिया के सामने ज़रूर आईं थीं लेकिन आईएसआईएस (अब इसे इस्लामिक स्टेट यानी आईएस कहा जाता है) के नेता बनने के चार साल बाद भी उन्होंने अपना चेहरा किसी को नहीं दिखाया था.

अप्रैल 2013 से पहले उनका कोई ऑडियो संदेश भी लोगों तक नहीं पहुंचा था. मई 2011 में पहली बार उनका एक लिखित बयान सार्वजनिक हुआ था जिसमें उन्होंने ओसामा बिन लादेन की तारीफ़ की थी.

जुलाई 2012 में पहली बार उनका ऑडियो मेसेज सामने आया था.

लेकिन क्या आप जानते हैं बग़दादी कौन हैं और उनकी ख़ासियत क्या हैं?

  • जुलाई 2013 में बहरीनी विचारक तुर्की अल-बिनालि, ने बग़दादी की जीवनी लिखी.
  • इसमें दावा किया गया था कि बग़दादी दरअसल इस्लाम के पैग़ंबर मोहम्मद के वंशज हैं.
  • जीवनी में कहा गया है कि बग़दादी अल-बु बद्री क़बीले के हैं जो पहले समारा और दियाला में रहता था और ऐतिहासिक रूप से इस क़बीले के लोगों को पैग़ंबर मोहम्मद का वंशज माना जाता है.
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  • तुर्की अल-बिनाली के अनुसार इराक़ में अमरीकी हमले से पहले बग़दादी ने बग़दाद के इस्लामिक विश्वविद्यालय से इस्लामी संस्कृति, इतिहास, शरिया, और न्यायशास्त्र में पीएचडी हासिल कर ली थी.
  • वह समारा की इमाम अहमद इब्न हनबल मस्जिद में धार्मिक शिक्षा देते थे. लेकिन उनके पास प्रमुख सुन्नी धार्मिक शिक्षण संस्थानों जैसे क़ाहिरा का अल-अज़हर विश्वविद्यालय या मदीना के इस्लामिक विश्वविद्यालय से कोई औपचारिक डिग्री नहीं है. लेकिन ओसामा या ज़वाहिरी जैसे अल-क़ायदा के बड़े नेताओं की तुलना में उन्होंने इस्लाम की शायद ज़्यादा शिक्षा ली है, इसीलिए उनके समर्थक उनकी बहुत ज़्यादा इज़्ज़त करते हैं.
  • 2003 में इराक़ पर अमरीकी हमले के बाद कुछ सहयोगियों के साथ बग़दादी ने जमात जैश अह्ल अल-सुन्नाह वा-अल-जमात (जेजेएएसजे) का गठन किया.
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  • यह संगठन समारा, दियाला और बग़दाद में सक्रिय था.
  • इस संगठन में बग़दादी शरिया समिति के प्रमुख थे.
  • अमरीकी-नेतृत्व वाली सेना ने उन्हें फ़रवरी से दिसंबर 2004 तक हिरासत में रखा लेकिन फिर छोड़ दिया, उस समय कोई उन्हें किसी बड़े ख़तरे के रूप में नहीं देख रहा था.
  • साल 2006 की शुरुआत में जेजेएएसजे ने अपना नाम बदलकर मजलिस शुरा अल-मुजाहिदीन रख लिया.
  • अल क़ायदा के साथ वफ़ादारी की क़सम खाते हुए संगठन उसमें शामिल हो गया. इस नए संगठन में भी बग़दादी को शरिया कमेटी में शामिल किया गया. जब इस संगठन ने अपना नाम बदलकर आईएसआईएस रखा तब बग़दादी को संगठन के सर्वोच्च सलाहकार परिषद का सदस्य बनाया गया.
  • जब इस गुट के नेता अबु अमर अल-बग़दादी की अप्रैल 2010 में मृत्यु हुई तब अबु बकर अल-बग़दादी ने उनकी जगह ले ली.

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