अनाथालय से अरबपति बनने का सफ़र

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बचपन भारी ग़रीबी में गुजर रहा था तो बेबस मां ने अनाथालय भेज दिया. सपने देखने की तो हिम्मत बची नहीं थी, लेकिन जिस दौर में जी रहे थे उसने भविष्य के लिए तैयार होने में मदद ज़रूर की. दूरदर्शी सोच रंग लाई और फिर वह दुनिया के अरबपतियों की सूची में शामिल हो गए.

यहां बात हो रही है दुनिया की सबसे बड़ी गिफ़्ट कार्ड वेबसाइट गिफ्टकार्ड्स डॉट कॉम के मालिक जेसन वॉल्फ की. वॉल्फ कहते हैं, "सच बयां करने के लिए शायद मैं आज ज़िंदा नहीं होता."

वॉल्फ कहते हैं, कई बच्चों के साथ संघर्ष कर रही एक मां जब आपको 10 साल की उम्र में अनाथालय भेजने को मजबूर हो जाए तो उस वक़्त भविष्य की कल्पना करना ही मुश्किल होता है.

अब 45 वर्ष के हो चुके वॉल्फ कहते हैं, "बचपन का बेहद मुश्किल दौर आपको लचीला बना देता है, इसलिए मुझे लगता था कि मैं अब कुछ भी कर लूंगा."

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आज वॉल्फ एक कामयाब कंपनी के मालिक हैं जो ग्राहकों को प्री-पेड वीज़ा या मास्टरकार्ड गिफ़्ट कार्ड उपलब्ध कराती है.

पीट्सबर्ग स्थित गिफ्टकार्ड्स डॉट कॉम के उनका सालाना कारोबार औसतन 72 फ़ीसदी की दर से बढ़ रहा है और यह पिछले साल बढ़कर 110 मिलियन डॉलर यानी लगभग 638 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

चॉकलेट बनी प्रेरणा

वॉल्फ ने कभी उद्यमी बनने के बारे में नहीं सोचा था. लेकिन अनाथालय की स्थापना करने वाले और मशहूर चॉकलेट कंपनी के मालिक मिल्टन हर्शे उनके प्रेरणास्रोत बने.

वह कहते हैं, "शायद यह मेरे भीतर ही था कि मैं उनकी नक्शेक़दम पर चलना चाहता था."

रही बात गिफ़्ट कारोबार शुरू करने की तो वह भी बचपन से जुड़ी यादों का ही नतीजा रहा.

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उन्होंने कहा, "मुझे याद है एक क्रिसमस पर अनाथालय में सन्नाटा सा था और मैं कंबल ओढ़कर सो रहा था. तभी किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी. हमने बाहर जाकर देखा तो वहां एक बक्सा रखा था जिसमें हमारे लिए उपहार थे."

दुर्घटना ने दिखाई राह

वर्ष 1994 में ब्लूसबर्ग यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होने के बाद वॉल्फ कूपन कारोबार में उतरने वाले थे. शुरुआत में उनका इरादा इन्हें वीडियो स्टोर्स पर जाकर बेचने का था.

लेकिन तभी उनके साथ एक बड़ी दुर्घटना हुई और उन्हें कई महीने अस्पताल के बिस्तर पर गुजारने पड़े. वॉल्फ कहते हैं, "अस्पताल में मैंने एक किताब पढ़ी और सीखा कि कंप्यूटर में कोडिंग किस तरह होती है."

कंप्यूटर कोडिंग सीखने के बाद वॉल्फ ने वीडियो स्टोर्स पर कूपन बेचने का इरादा छोड़ दिया और इसे वेबसाइट के ज़रिये बेचने का फ़ैसला किया और इस तरह माईकूपन्स डॉट कॉम की स्थापना हुई.

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