मेहर से बचने के लिए एक दूसरे की बहनों से शादी

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यमन में बहन की शादी के बदले बहनोई की बहन से शादी का प्रचलन है, लेकिन इससे सफल वैवाहिक जीवन भी तबाह हो रहे हैं.

इस तरह की शादियों को शेगर कहा जाता है और एक दंपत्ति के बीच संबंध बिगड़ने की स्थिति में इसका प्रभाव दूसरे दंपत्ति पर पड़ता है.

हालांकि इस तरह की शदियों को गैर-इस्लामिक क़रार दिया जा चुका है लेकिन मेहर की रक़म न दे सकने की क्षमता के चलते अभी भी बहुत परिवारों में यह प्रथा क़ायम है.

पुरातन परम्परा, ग़रीबी और वर ढूंढने की मुश्किलें इस तरह की अदला बदली वाली शादियों का कारण हैं.

पढ़िए माई नोमन की पूरी रिपोर्ट-

अरब देशों में शादियों में दुल्हन के परिवार को मेहर के रूप में धन देने का चलन है. लेकिन यमन में एक दूसरे की बहनों-भाईयों से शादी करने की पुरातन प्रथा है.

इस वैवाहिक अदला-बदली को 'शेगर' कहा जाता है. मेहर देने से बचने के लिए ग़रीब परिवारों में इसका काफ़ी चलन है लेकिन अब इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं.

Image caption मोहम्मद होमुद का कहना है कि अदला बदली वाली शादी की परम्परा बहुत पुरानी है.

'यदि तुम मेरी बहन से शादी करो तो मैं तुम्हारी बहन से शादी कर लूंगा' की तर्ज पर होने वाली इन शादियों का दूसरा पहलू है- 'यदि तुमने मेरी बहन को तलाक़ दिया तो मैं तुम्हारी बहन को तलाक़ दे दूंगा.'

यमन में मेहर की रकम 3,500 डॉलर (क़रीब दो लाख रुपए) तक होती है, जबकि यहां ज़्यादातर लोगों की आय प्रति दिन दो डॉलर (60 रुपए) है.

राजधानी साना के पास स्थित सवान गांव के एक वृद्ध मोहम्मद होमुद कहते हैं कि जब मेहर और शादी का खर्च उठाने का पैसा नहीं होता है तो लोग 'शेगर' शादी करते हैं.

वो कहते हैं कि यहां यह बहुत पुरानी परम्परा है लेकिन अब इसमें कमी आ रही है क्योंकि यह ग़रीबी को और बढ़ा देती है.

एक युवा महिला नादिया एक ऐसे व्यक्ति से ब्याही गई थीं जिसकी बहन उनके भाई से ब्याही गई थी. नादिया के तीन बच्चे हैं.

तलाक का जवाब तलाक से

Image caption वलीद और उनकी बहन नोरा परिजनों के दबाव में शेगर के लिए सहमत हुए थे.

उसकी जिंदगी में मुश्किल तब शुरू हुई जब उसके भाई ने उसकी ननद को तलाक़ दे दिया.

इसके जवाब में उसके पति ने उसे भी तलाक दे दिया और उसके तीन बच्चों को भी छीन लिया.

इन तीन बच्चों में सबसे छोटी बच्ची सात माह की थी.

वो अपनी इस दुधमुंही बच्ची को तीन साल बाद दोबारा देख पाई.

कई धार्मिक विद्वान इन शादियों का विरोध करते हैं और इसे ग़ैर इस्लामिक घोषित कर दिया है क्योंकि मुस्लिम शादी समझौते में मेहर अनिवार्य होता है.

हालांकि इस तरह की शादियों में भी मेहर का चलन है.

भाई बहन वलीद और नोरा की शादी अपने चचेरे भाई बहनों से हुई लेकिन दोनों परिवारों ने मेहर दिया और इस बात पर सहमति जताई कि दोनों शादियां एक दूसरे पर निर्भर नहीं रहेंगी.

बच्चे इस शादी के लिए तैयार नहीं थे और उन्होंने रोकने की थोड़ी बहुत कोशिश भी की.

वर ढूंढने का दबाव नहीं

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लेकिन वहीद के वैवाहिक जीवन में दिक्कतें आनी शुरू हो गईं. नौ महीने बाद अपने उसने तलाक दे दिया.

इसके बदले वहीद के बहनोई ने भी नोरा से रिश्ता तोड़ लिया. हालांकि वे खुश थे.

वहीद का कहना है, ''मुझे अपनी बहन के लिए अफसोस है लेकिन मैं अपनी शादी को और ज़्यादा नहीं झेल सकता था.''

सौभाग्य से रिश्तेदारों और दोस्तों के हस्तक्षेप से नोरा फिर से अपने पति के साथ रहने लगीं हैं, लेकिन शेगर के तहत होने वाली शादियां सबके लिए भाग्यशाली नहीं होतीं.

शेगर का चलन इसलिए भी है कि परिजनों पर अपनी बेटियों के लिए वर ढूंढने का दबाव नहीं होता है.

उस देश में जहां एक चौथाई महिलाओं की शादी 15 वर्ष की उम्र से पहले ही हो जाती है वहां परिजन बेटियों की छोटी उम्र में ही उनकी शादी की चिंता करने लगते हैं.

इसका एक और कारण है पिछली पीढ़ी के दिखाए गए रास्ते. वलीद और नोरा के मता-पिता की इसी तरह शादी हुई है और आज भी खुश हैं.

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