अमरीकी सिखों का पहचान 'जताने' का फ़ैसला

हरलीन कौर

दो साल पहले अमरीका में ओक ग्रीक गुरुद्वारे में जब एक बंदूकधारी ने अंधाधुंध गोलीबारी की, तो ठीक दो हफ़्ते बाद, हरलीन कौर ने अपनी ज़िंदगी का एक अहम फ़ैसला किया.

अपनी सिख पहचान को जताने के लिए उन्होंने पगड़ी पहननी शुरू कर दी.

उनका कहना है कि कॉलेज हो या एयरपोर्ट, लोग अब उन्हें अलग नज़रों से देखते हैं.

वो कहती हैं, "अब मैं जब एयरपोर्ट पर जाती हूं तो मुझे दो बार स्क्रीनिंग से गुज़रना पड़ता है जो कि पहले नहीं होता था."

लेकिन वो इससे परेशान नहीं हैं. उनका कहना है कि उन्हें एक मौक़ा मिला है दूसरों को सिख मूल्यों के बारे में बताने का और उनकी पगड़ी से हर पल ये ज़ाहिर भी होता रहता है.

पढ़िए पूरी रिपोर्ट

अमरीका पर ग्यारह सितंबर को हुए हमले के बाद यहां रहने वाले सिखों को मुसलमान समझकर उन पर कई बार क़ातिलाना हमले हुए हैं.

लेकिन विस्कॉंसिन राज्य के ओक क्रीक इलाक़े में गुरुद्वारे पर हुए हमले ने सिख समुदाय को दहला कर रख दिया.

अब वो अमरीका को अपनी पहचान बताने के लिए कमर कस रहे हैं.

हरलीन ओक क्रीक में ही पली बढ़ी थीं, और उस गुरुद्वारे से उनका एक ख़ास लगाव था.

जब एक अमरीकी बंदूकधारी ने वहां घुसकर अंधाधुंध गोली चलाई, छह सिखों को मार डाला, कुछ को घायल कर दिया तो उन्हें ये एहसास हुआ कि उनके आसपास के लोगों को भी इस क़ौम के बारे में कितनी कम जानकारी है.

इस हफ़्ते वो अमरीकी कांग्रेस में एक लंगर की मेज़बानी करने पहुंचीं. मक़सद था अमरीका में सिखों के बारे में बेहतर समझ पैदा करना.

विरोध प्रदर्शन

वो कहती हैं, "मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि सिख मूल्य और अमरीकी मूल्य अलग-अलग नहीं हैं. कांग्रेस में हम जो लंगर कर रहे हैं वो एक तरह से उसी तरह की समानता को दिखाता है जैसा हमारे सिख धर्म में है."

ओक क्रीक पर हुए हमले के बाद सिखों ने दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन किया था. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी अमरीकी हुकूमत से इस मामले पर बात की थी.

सिख अधिकारों के लिए काम करने वाली एक संस्था के प्रमुख जसजीत सिंह कहते हैं कि हमले ने सिख समुदाय को अंदर तक झकझोर दिया.

वो कहते हैं, "ओक क्रीक अमरीकी सिख समुदाय के लिए वाक़ई एक निर्णायक घटना थी... किसी धार्मिक स्थल पर किया गया अमरीकी इतिहास का सबसे दहला देने वाला हमला. वो ऐसा मौक़ा था जिसने हमें सोचने पर मजबूर किया कि हमने इस देश में अब तक आख़िर क्या हासिल किया है?"

एक रिपोर्ट के अनुसार 70 प्रतिशत अमरीकी अभी भी एक तस्वीर के ज़रिए किसी सिख की पहचान नहीं कर सकते और आधे, सिखों को मुसलमान समझते हैं. उनकी दाढ़ी और पगड़ी बहुतों के मन में घबराहट पैदा करती है.

शिकायत

सिख बच्चों को स्कूलों में चिढ़ाए जाने और परेशान किए जाने की शिकायतें अक्सर सुनने में आती हैं.

कुछ महीने पहले जब जानीमानी अमरीकी कंपनी गैप ने यहां के सिख डिज़ाइनर और एक्टर वारिस अहलूवालिया को अपने मॉडल के तौर पर इस्तेमाल किया तो न्यूयॉर्क में कुछ जगह उनके पोस्टरों पर काला रंग पोता गया.

पोस्टरों पर "ओसामा वापस जाओ, आतंकवादी वापस जाओ" जैसी बातें भी लिखी गईं.

अब एक नई मुहिम के तहत वही वारिस अहलूवालिया टीवी विज्ञापनों के ज़रिए अमरीकियों को सिखों के बारे में बता रहे हैं.

इन विज्ञापनों में वो कह रहे हैं कि अमरीकी सिख की ज़िंदगी दूसरे अमरीकियों से कोई अलग नहीं है.

परेशानी

अमरीकी क़ानून बनाने वालों में यहां की सिख क़ौम की परेशानियों के बारे में समझ बढ़ी है.

लेकिन कैलिफ़ोर्निया से डेमोक्रैट सांसद माइकल होंडा का कहना है कि रास्ता अभी काफ़ी मुश्किल है.

वो कहते हैं, "जो सिख धर्म के बारे में नहीं जानते उनके लिए थोड़ी मुश्किल होती है. अगर आप इस देश के चर्चों में जाएं तो आप देखेंगे कि लोग कितने गर्माहट से गले मिलते हैं. अगर उसी आसानी से हम चर्च के बाहर के लोगों को गले लगा सकें तो फिर ये ज्यादा मुश्किल नहीं होगा."

ज़ाहिर है अभी हरलीन कौर और वारिस अहलूवालिया जैसे कई और ब्रांड ऐंबसडर्स को आगे आना होगा, अमरीका को समझाने के लिए कि इस देश में उनका इतिहास 125 साल पुराना है. और यह कि हर पगड़ी पहनने है और दाढ़ी रखने वाले इनसान को ख़तरे की तरह न देखा जाए.

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