इमरान कहीं केजरीवाल की राह पर तो नहीं?

इमरान खान इमेज कॉपीरइट Reuters

लोकतंत्र का कोई और लाभ हो न हो पर इतना जरूर है कि आदमी का मन लगा रहता है. अब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को ही लें.

इमरान खान 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर 'एजिटेशनल वनडे' खेलने के मूड से इस्लामाबाद आए लेकिन पहुँचने से पहले ही तेज़ बारिश ने राजनीतिक पिच खराब कर दी और अब ये वनडे ड्रॉ की तरफ़ जाने वाले टेस्ट में बदल चुका है.

क्योंकि विकेट इतनी गीली है कि गेंद क्रीज पर खड़ी सरकार तक जाने से पहले जहाँ भी टप्पा खाती है, वहीं धँस जाती है. अब कप्तान जी का बस नहीं चल रहा है कि ख़ुद हाथ से जाकर विकेट उखाड़कर चिल्लाएं, 'हाउज़ दैट.'

कप्तान जब 350 किलोमीटर की स्वतंत्रता यात्रा लेकर पाँच दिन पहले लाहौर से चले थे तो उन्हें बताया गया कि आदमियों को तो छोड़िए सिर्फ मोटर साइकिलें ही एक लाख होंगी और एक मोटर साइकिल पर अगर दो लोग भी सवार हों तो दो लाख तो सिर्फ यही हो गए.

और रास्ते में जीटी रोड पर हर शहर से अगर पचास पचास हजार लोग भी जुलूस में मिलते चले गए तो मानो इस्लामाबाद पहुँचते-पहुँचते 10 लाख तो कहीं नहीं गए.

पढ़िए पाकिस्तान डायरी विस्तार से

इमेज कॉपीरइट AP

हुआ यूं कि कप्तान अपने साथ मिलियन मार्च में शरीक 20-25 हज़ार लोगों के इस्लामाबाद आने के बाद तकरीर करके खुले आसमाँ और गीली घास पर छोड़कर अपने घर सोने के लिए चला गया.

तब से अब तक यही तमाशा हो रहा है और इस तमाशे का नाम रखा गया है धरना. जैसे-जैसे दिन गुजर रहे हैं कप्तान का पारा चढ़ रहा है.

क्योंकि कप्तान तो बोलिंग एंड पर खड़ा गेंद रगड़ रहा है मगर नवाज़ शरीफ क्रीज़ पर आने के लिए तैयार ही नहीं और कप्तान के साथ आने वाले तमाशाई भी उतावले होते जा रहे हैं. न आज़ादी मिल रही है उन्हें और न मैच शुरू हो रहा है.

ऑपोजिशन वाले भी कप्तान की मजबूरी समझ गए हैं इसलिए वे नवाज़ शरीफ़ से कह रहे हैं कि कुछ न कुछ नुमाइशी ऐलान कर दो ताकि कप्तान की नाक रह जाए लेकिन मुश्किल ये है कि कप्तान नवाज़ शरीफ़ के इस्तीफ़े से कम किसी बात पर राजी नहीं है.

लीगल तरीका

इमेज कॉपीरइट AP

मगर वो ये भी नहीं बता रहे हैं कि संविधान के अनुसार सिर्फ पार्लियामेंट ही प्रधानमंत्री को हटा सकती है. इसके अलावा और कौन सा लीगल तरीका उनके जेहन में है.

कप्तान की ये बात भी बहुत कम लोग हजम कर पा रहे हैं कि एक साल पहले होने वाले चुनाव में ज़बरदस्त धांधली हुई और नवाज़ शरीफ़ ने क्या सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस और क्या चुनाव कमीशन सभी को ख़रीद कर मुझे इलेक्शन नहीं जीतने दिया.

मगर कप्तान ये नहीं बताता कि अगर ऐसा है तो एक राज्य यानी खैबर पख्तूनख्वाह में कप्तान की पार्टी ने कैसे अपनी सरकार बना ली और कप्तान ने ख़ुद नाजायज़ पार्लियामेंट से अब तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया.

वैसे चुनाव के एक साल बाद धांधली का शोर अपुन की समझ में नहीं आ रहा है. ये तो वो वाली बात हुई कि एक आदमी ने बाज़ार में एक और आदमी को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया. पिटने वाले ने पूछा कि मेरा क्या कसूर है. पीटने वाले ने कहा कि तुमने मुझे पिछले साल गैंडा क्यों कहा था.

इमरान केजरीवाल!

इमेज कॉपीरइट ImranKhanPTI

पिटने वाले ने कहा अगर कहा भी था तो अब इतने दिन बाद मुझे क्यों मार रहे हो. पीटने वाले ने कहा कि मैंने कल ही गैंडे की फोटो देखी है. तुमने मुझे गैंडा कहा था.

अब लग रहा है कि अगर इमरान खान पीछे नहीं हटते तो फिर आख़िरी रास्ता ये बचता है कि या तो इस उम्मीद से वे प्रधानमंत्री भवन पर चढ़ दौड़ें कि न तो खेलूंगा और न ही खेलने दूंगा भले ही एक बार फिर मार्शल लॉ क्यों न लग जाए.

दूसरा रास्ता ये है कि इमरान ने जिस सत्याग्रह का एलान किया है, उसमें और गर्मी लाने के लिए खैबर पख्तूनख्वा सूबे में अपनी ही सरकार गिरा दें और पार्लियामेंट से इस्तीफ़ा देकर इमरान ख़ान से इमरान केजरीवाल बन जाएँ.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप केलिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार