गांधी: जब नसीर और किंग्सली ने स्क्रीन टेस्ट दिया..

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फ़िल्म गांधी के निर्देशक सर रिचर्ड एटेनबरा का 90 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने अपने 60 साल के अभिनय और निर्देशन के करियर में कई सम्मान हासिल किए.

ऑस्कर जीतने वाली फ़िल्म 'गाँधी' में कस्तूरबा गाँधी का किरदार निभाया था रोहिणी हतंगड़ी ने.

इस फ़िल्म में अभिनेता ओम पुरी भी फ़िल्म में एक छोटे लेकिन बेहद अहम सीन में नज़र आए थे.

उनके निधन पर बीबीसी से ख़ास बात करते हुए रोहिणी हतंगड़ी और ओम पुरी ने सर रिचर्ड एटेनबरा से जुड़ी यादें साझा की हैं.

रोहिणी हतंगड़ी

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32 साल हो गए लेकिन मैं आज तक 'गाँधी' में काम करने के अनुभव को भूल नहीं पा रही हूं.

तीन घंटे में गाँधी को समेटने जैसे नामुमकिन काम को सर रिचर्ड जैसा शख़्स ही कर सकता था. वो 20 साल से इस फ़िल्म पर काम कर रहे थे.

सेट पर एक ट्रंक हुआ करता था जिसमें गाँधी से जुड़ी किताबें भरी रहती थीं. जहां भी कुछ मुश्किल पेश आई, फ़ौरन किताब पढ़ी जाती थी.

कैसे बनीं 'बा'

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मुझे स्क्रीन टेस्ट के लिए लंदन बुलाया गया.

स्क्रीन टेस्ट देखने के बाद वो मेरे पास आए और बोले कैसा लगा तुम्हें अपना परफ़ॉरमेंस. तो मैं बोली, "मुझे लगा मैंने कुछ ज़्यादा ही कर दिया."

तो वो बोले, "देखो ये सिनेमा है. दर्शक तुम्हारे साथ हैं. तुम्हारा चेहरा इतना एक्सप्रेसिव है कि ज़्यादा भाव लाने की ज़रूरत ही नहीं."

मुझे लगा कि मैं पास नहीं होने वाली. लेकिन मेरी हैरानी का ठिकाना नहीं रहा जब मुझे पता लगा कि मैं 'बा' के रोल के लिए चुन ली गई हूं.

'चलो फिर रोटी बनाओ'

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एक सीन में मुझे किचन के अंदर रहना था. चंपारण से एक व्यक्ति आया था, उसे खाना खिलाना था और गाँधी जी उसके सामने बैठे थे.

उन्होंने मुझसे पूछा कि किचन के अंदर तुम क्या करोगी. मैंने कहा, ज़ाहिर है उस व्यक्ति को खाना खिलाना है तो मैं किचन में रोटी ही बनाऊंगी. तो उन्होंने कहा, गुड. चलो रोटी बनाओ.

गांधी का रोल

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महात्मा गाँधी और कस्तूरबा गाँधी के रोल के लिए तीन सेट बनाए गए थे.

बेन किंग्सली और मैं. नसीरुद्दीन शाह और स्मिता पाटिल. जॉन हर्ट और भक्ति बर्वे. सबका स्क्रीन टेस्ट हुआ और आख़िर में, मुझे और किंग्सले को चुना गया.

मैं हैरान थी कि बेन किंग्सली कैसे गाँधी बन पाएंगे. लेकिन जब मैंने उन्हें सूट पहने देखा तो वो बिलकुल दक्षिण अफ़्रीक़ा वाले गाँधी लगे जिन्हें मैंने तस्वीरों में देखा था.

तब मैं सर रिचर्ड का लोहा मान गई कि क्या पारखी आदमी है.

ओम पुरी

'गाँधी' फ़िल्म में एक और अहम भूमिका निभाने वाले ओम पूरी ने बीबीसी से बातचीत के दौरान एटेनबरा की तारीफ़ करते हुए कहा, ''उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को जिस तरीक़े से अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने पेश किया वैसा कोई नहीं कर पाया.''

ओम पूरी ने आगे कहा, ''जिस लगन और भावना से उन्होंने गाँधी बनाई उसका जवाब नहीं. एक ब्रितानी होने के बावजूद उन्होंने बड़े निष्पक्ष तरीक़े से गाँधी को परदे पर उतारा.''

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