लीबिया में जल्द हो संघर्ष विराम: यूएन

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने लीबिया में तुरंत संघर्ष विराम से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया है. साथ ही इस प्रस्ताव में व्यापक स्तर पर प्रतिबंधों की चेतावनी भी दी गई है.

परिषद के सदस्यों ने त्रिपोली और बेनग़ाज़ी जैसे शहरों में लड़ाई बढ़ने पर चिंता जताई है. वहाँ चरमपंथी गुटों, लड़ाकुओं और सेना के विभिन्न गुटों के बीच संघर्ष जारी है.

सुरक्षा परिषद ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे राजनीतिक वार्ता के ज़रिए लीबिया में स्थिरता लाने की दिशा में काम करें.

इस प्रस्ताव में उन लोगों और गुटों पर प्रतिबंध की चेतावनी दी गई है जो 'लीबिया की सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा कर रहे हैं या राजनीतिक बदलाव को नुक़सान पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं'.

ऐसे लोगों या गुटों की संपत्ति फ़्रीज़ की जा सकती है या उन पर यात्रा से जुड़े प्रतिबंध भी लग सकते हैं.

'गृह युद्ध जैसे हालात'

संयुक्त राष्ट्र में लीबिया के राजदूत ने इस प्रस्ताव को मील का पत्थर बताते हुए चेतावनी दी कि लीबिया में स्थिति जल्दी ही पूरे गृह युद्ध जैसी बन सकती है.

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वहीं लीबिया में संयुक्त राष्ट्र के मदद कार्यक्रम के प्रमुख तारिक़ मित्री ने बताया कि आतंकवादी गुटों का बढ़ना वहाँ एक ज़मीनी हक़ीक़त बन चुका है. साथ ही उनके मुताबिक़ सरकार के पास इनका सामना करने की सीमित क्षमता ही है जिसके चलते लीबिया में ख़तरा लगातार बढ़ता जा रहा है.

त्रिपोली में मौजूद बीबीसी संवाददाता राणा जवाद के मुताबिक़ वैसे तो अभी ये स्पष्ट नहीं कि ये प्रतिबंध ख़ास तौर पर किसके विरुद्ध होंगे मगर माना जा रहा है कि सभी पक्षों में जो लड़ाकुओं के कमांडर हैं और जो हिंसा में लगे हैं वे इसका निशाना बन सकते हैं.

ये भी माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव से उन बाहरी तत्वों पर भी ध्यान जाएगा जो लीबिया में विरोधी गुटों को मदद पहुँचा रहे हैं. इस प्रस्ताव के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया में लोगों ने कहा है कि क्या वास्तव में लड़ाकुओं की सेहत पर इस तरह के प्रस्ताव का कोई असर पड़ेगा भी?

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