ट्विटर, फ़ेसबुक से बहस को बढ़ावा नहीं

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एक अध्ययन में पता चला है कि फ़ेसबुक और ट्विटर का इस्तेमाल करने वाले बहुत से लोग विवादास्पद मुद्दों पर अपनी राय कम ही रखते हैं, यहाँ तक की जब वो ऑफ़लाइन होते हैं तब भी.

चौकाने वाले ये नतीज़े प्यू रिसर्च सेंटर की ओर से किए गए सर्वेक्षण में सामने आए हैं. यह अध्ययन रुटजर्स विश्वविद्यालय के सहयोग से 1801 लोगों के बीच अमरीका में हुआ.

इनमें से 86 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि वो एनएसए के पूर्व कॉनट्रेक्टर एड्वर्ड स्नोडन की सार्वजनिक की गई सरकारी जासूसी के बारे में बैठकों, कार्यस्थलों और रेस्टोरेंट में अपने मित्रों के साथ चर्चा करना चाहेंगे.

फ़ेसबुक और ट्विटर का इस्तेमाल करने वालों केवल 42 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि वो इस बारे में पोस्ट करना पसंद करेंगे.

स्व नियंत्रण को बढ़ावा

सोचा जाता था कि सोशल मीडिया बहस को बढ़ावा देता है, लेकिन पाया गया कि फ़ेसबुक और ट्वीटर जैसी वेबसाइट वास्तव में स्व निंयत्रण को बढ़ावा देती हैं.

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि लोग किसी विवादास्पद विषय पर तब तक अपनी राय नहीं रखते हैं, जब तक उन्हें अपने श्रोताओं के बारे में जानकारी न हो.

यह अध्ययन अमरीका सुरक्षा एजेंसी एनएसए के पूर्व विश्लेषक एडवर्ड स्नोडन द्वारा ख़ुफिया सूचनाओं को सार्वजनिक करने के बाद किया गया.

इससे पता चला था कि अमरीकी सरकार व्यापक तौर पर नागरिकों के टेलीफ़ोन कॉल और ईमेल की निगरानी करती है.

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