पाकिस्तानी आमों की पौ बारह

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हालांकि आम का सीज़न ख़त्म होने को चला है लेकिन बाज़ार में आम अभी भी मिल रहे हैं.

आम के शौक़ीन केवल भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश या श्रीलंका में ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी हैं.

बहुत कम लोग जानते हैं कि पाकिस्तान दुनिया में आम का आठवां सबसे बड़ा निर्यातक देश है.

यूरोपियन यूनियन की ओर से भारतीय आमों पर एक साल के लिए लगाई गई रोक के बाद पाकिस्तानी निर्यातक इसका लाभ उठाने की कोशिश में हैं.

वो नए बाज़ारों का रुख़ भी करना चाहते हैं.

पाकिस्तान से नौशीन अब्बास की रिपोर्ट

शाकिर हुसैन आम निर्यातक हैं जो बिचौलिए के बतौर आम के कारोबार से जुड़े हैं.

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वे स्थानीय उत्पादकों से आम ख़रीदकर उनका निर्यात करते हैं.

वे बताते हैं, "हमें आयरलैंड से ऑर्डर मिला है. यह पहली बार है कि हमें वहां से कोई ऑर्डर मिला. उन्हें एक हफ़्ते में डेढ़ टन आम चाहिए. मतलब ये कि भारत पर लगे प्रतिबंध का अगर पाकिस्तान फ़ायदा उठाना चाहे, तो वह उठा सकता है."

दिलचस्पी

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फिर भी पाकिस्तान में ज़्यादातर निर्यातकों को मक्खियों के कारण आम बाहर भेजने में मुश्किलें पेश आ रही हैं.

अगर ये मुश्किल हल हो गई, तो कई पश्चिमी देश पाकिस्तानी आम ख़रीदने में दिलचस्पी रखते हैं.

आमों की गुणवत्ता सुधारने के लिए पश्चिमी डोनर एजेंसियां पाकिस्तान सरकार के सहयोग से छोटे किसानों को नई तकनीक और नए तौर-तरीक़ो से रूबरू करा रही हैं.

बाज़ार

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अंतरराष्ट्रीय एजेंसी 'यूएसएड' ने पाकिस्तानी आमों की गुणवत्ता सुधारकर उन्हें निर्यात लायक़ बनाने के लिए 'वाटर ट्रीटमेंट प्लांट' तकनीक की पहल की है.

जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की ज़रूरतें पूरी करने के लिए सरकार बहुत तेज़ी से काम नहीं कर रही.

हालांकि अधिकारी कहते हैं, "अगर हम अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करें, तो हम अपना राजस्व दोगुना कर सकते हैं. हमारी क्षमता 100 मिलियन डॉलर की है, जिसके आधे तक ही हम पहुंच पाए हैं."

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